लगातार बारिश से किसान हुए त्रस्त, बीमारियों की मार,फसलें सडने की संभावना

    रालेगाव. लगातार आठ दिनों से तहसील में हो रही बारिश के कारण किसानों में फसल को लेकर चिंता छायी हुई है.भारी बारिश का असर अब तहसील की कपास, सोयाबीन और अन्य फसलों पर दिखना शुरु हो चुका है. फसल की पत्तीयां गलने के साथ ही विभीन्न बिमारीयों की मार और बारिश से कपास के फल सड रहे है, एैसी शिकायतें किसानों से मिल रही है.इन दिनों बारिश के कारण एक ओर खेती के सभी काम ठप्प पडे है.

    लगातार बारिश से फसलों का उत्पादन कम हो सकता है,जिससे बारिश रुकने की उम्मीद किसान लगा रहे है.हर दिन तहसील में आकाश में बादल जमा होने के साथ बारिश की शुरुआत होती है.बिते आठ दिनों से मुसलाधार बारिश गिर रही है. जिससे तहसील के जलाशयों का जलस्तर बडे पैमाने पर बढा है, साथ ही नदी नालों में तेज बहाव और कुंए लबालब भर चुके है.लेकिनप इस बारिश ने खेतीहर फसल और जमीन को नुकसान पहूंचाया है.

    खेतों में पानी जमा होने से लेकर किचड बन चुका है.तहसील में बारिश का यह आलम है की कभी बारिश न हो तो खेती सुखे रहने का डर होता है, तो इस तरह बारिश होने से फसलों को नुकसान पहूंचता है. इन दिनों खेतों में जहां देखों वहां पानी जमा हुआ है.जीन खेतों से पानी निकल नही रहा है, वहां की फसलें पिली पडकर बर्बादी का डर है. बता दें की इससे पहले तहसील में इससे पुर्व केवल 50 फिसदी फसल हुई थी. तो अब भारी बारिश से खेतों में खरपतवार निकालने, फसल के पौधों में मिटटी भराई जैसे काम पुरी तरह बंद है.

    बारिश कम होने के बाद खेतों में खरपतवार का साम्राज्य होता है, इसे निकालने किसानों को नाको चने चबाने पडते है, इससे इस वर्ष भी किसानों को आर्थिक खर्च का तनाव झेलना पड सकता है.तो दुसरी ओर सभी किसानों के खेतों में निंदन के काम एक साथ आ जाने से मजदूर भी इसका लाभ लेकर मजदूरी बढा सकते है. इसे लेकर भी किसानों में अभी चिंता छायी हुई है.

    लगातार बारिश होने से इन दिनों कपास फसल पर गुलाबी ईल्ली और अन्य बिमारीयों का प्रकोप बढ रहा है, इस फसल पर फफुंद रोग होने से कपास पौधों की पत्तीयां पिली होने और फल सडकर निचे गिर रहे है.खेतों में उग आया माल इस तरह गिरने और बर्बाद होने से किसानों की जान आफत में है, क्योंकी इसे तैयार करने के लिए किसान खेतों में चार से पांच बार दवाईयों का छिडकाव कर चुके है,लेकिन यह खर्च अब व्यर्थ जाता दिख रहा है, जबकी नया माल लेने अधिक समय लग सकता है. बारिश का झटका कपास के साथ सोयाबीन फसल को भी लगा है, जिन किसानों की सोयाबीन फसल में फल्लीयां भर चुकी है, लेकिन भारी बारिश से अब पौधों पर लगी फल्लीयों फुटकर उसमें अंकुर फुटने की आशंका जतायी जा रही है.

    लगातार बारिश होने से इस फसल में बडे पैमाने पर खरपतवार बढ चुका है, जिससे उत्पादन लेने किसानों को कसरत करनी पड सकती है, साथ इसका खर्च भी बढेंगा.इसके अलावा इस बार पानी से तुअर की फसल को भी नुकसान पहूंच रहा है, पानी जमा होनेवाले खेतों में तुअर फसल जल चुकी है, जबकी अनेक खेतों में तुअर पिली पड रही है. ज्वार के भुटटों में अतिबारिश से अंकुर फुट रहे है.कुल मिलाकर तहसील में इस बार भारी बारिश से कमोबेश सभी फसलों को नुकसान पहूंचा है.जिससे बारिश के पहले फसल की अच्छी पैदावार की आस लिए किसानों के हाथ से यह बारिश पुरी तरह फसल ना छिन लें, यही डर किसानों को सता रहा है.