फसल हात से जाने का डर; चक्रभुंगा के साथ, सोयाबीन पर अब  खोडकिटो का आक्रमन; किसान चिंतित

    • भारी बारिश और बादल मौसम का असर

    यवतमाल. इस साल जून से पहले जिले में बारिश शुरू होने के कारण किसानों ने बुवाई  कर दी थी. अच्छी बारिश से खेतों में फसल लहलहा रही है. लेकिन अब इन अच्छी फसलों पर विभिन्न कीटो द्वारा हमला किया जा रहा है और जिले के कई तहसिलो में, चक्रभुंगा के बाद, सोयाबीन पर खोड कीटो द्वारा हमला किया गया है. इससे किसानों की चिंता बढ़ गई है और उन्हें अपनी फसल बर्बाद होने की चिंता सता रही है.

    मौसम विभाग ने इस साल जिले में भारी बारिश की संभावना जताई थी. इसलिए किसानों ने नए जोश के साथ खरीफ की बुवाई की. कपास के साथ सोयाबीन की बुआई भी बढ़ी है. कपास और सोयाबीन को किसानों के हाथ में नकदी फसल के रूप में देखा जाता है. इसलिए, किसान इन फसलों की खेती के लिए अधिक इच्छुक होते हैं.

    जिले में खरीफ सीजन के दौरान साडे चार लाख हेक्टेयर में कपास और ढाई लाख हेक्टेयर में सोयाबीन की बुवाई हुई है. जिले में जून की शुरुआत और फिर जुलाई में अच्छी बारिश हुई. कुछ तहसिल में औसत से अधिक बारिश हुई है. 10 तहसिलोओं में बारिश के कारण फसलों को भारी नुकसान हुआ, जहां भारी बारिश हुई. इन फसलों के नुकसान ने पहले ही किसानों को चिंतित कर दिया है. इसी तरह भारी बारिश और लगातार बादल छाए रहने से फसलों पर तरह-तरह के कीट दिखाई दे रहे हैं.

    जबकि सोयाबीन की फसल खेत में फल-फूल रही है, अब यह देखा गया है कि फसल अब चक्रभुंगा और खोड किट जैसी बीमारियों से ग्रसित है. ऐसे में फसल खराब होने से किसानों को एक बार फिर परेशानी का सामना करना पड़ सकता है. जिले के कुछ तहसिलो और मंडलों में, खोडमख्खी का आक्रमन अधिक हैं. इस क्षेत्र में लगातार बादल छाए रहने से इल्ली की संख्या में इजाफा हुआ है. इसे नियंत्रित करने के लिए किसान प्रयास कर रहे हैं.

    लेकिन इसके बावजूद उन्हें सफलता नजर नहीं आ रही है. फसल अच्छी है. हालांकि, यदि कीटों की घटनाओं में वृद्धि जारी रहती है, तो किसानों की आय में कमी आने की संभावना है. अधिक पानी के कारण फसल संकट में थी. हालांकि अब फसलों पर कीटों का प्रकोप शुरू हो गया है. ऐसे में किसान फिर से खुद को संकट में पा सकता है.

    किसान  वैज्ञानिक रूप से उपयोग करें

    जिले में मौसम से पहले बोई जाने वाली कपास पर गुलाबी बोंड ईल्ली का प्रकोप दिख रहा है. वहीं, सोयाबीन की फसल इस समय चक्रभुंगा और खोडईल्ली से ग्रसित है. इसलिए किसानों को थीयोमेथोक्सेन-लंबदा सिलोहैथ्रिन के मिश्रण का छिड़काव करना चाहिए.

    प्रा. डा. प्रमोद यादगीरवार, सहयोगी संचालक, संभागीय कृषि अनुसंधान केंद्र, यवतमाल.

    उपाय करने में सफलता नहीं मिल रही 

    सोयाबीन की फसल किट से प्रभावित हुई है. खोडकिट का संक्रमन हैं. यही स्थिति बनी रही तो सोयाबीन की फली नहीं भर पाएगी. इस साल फसल पर काफी खर्च हुआ है. कीटों को नियंत्रित करने के लिए किए गए उपाय कारगर होते नहीं दिख रहे हैं. इस संबंध में शिकायत भी की गई है. हालांकि अभी तक कृषि विभाग का कोई अधिकारीने व्हिजीट नहीं कि है.

    राम गोडे, किसान,घाटंजी. 

    कपास पर बोंडइल्ली का पुन: संक्रमण

    जिले में पूर्व में बोई गई कपास पर गुलाबी इल्ली दिखने लगी है. हालांकि कपास पर खोडकिट का प्रकोप फिलहाल कम है, लेकिन इसे शुरुआत मानी जाती है. यदि अभी उचित उपाय नहीं किए गए तो इल्ली के प्रकोप में वृद्धि की संभावना से इंकार नहीं किया जा सकता है. अगर ऐसा होता है तो किसानों की कपास की फसल को भी भारी नुकसान होने की संभावना है.

    इस प्रकोप के कारण कपास की फसल संकट में दवा छिड़काव का भी कोई फायदा नहीं

    जिले के जिन क्षेत्रों में सोयाबीन पर खोडकिट का प्रकोप अधिक है. क्षेत्र के किसानों ने छिड़काव शुरू कर दिया है. बुवाई के समय भी सावधानी बरती गई है. उसके बाद भी यह बीमारी फसलों को प्रभावित कर रही है. इसलिए किसानों की शिकायत है कि दवा का छिड़काव करने के बाद भी उसका ज्यादा असर नहीं हो रहा है.