भटके विमुक्त, बारा बलूतेदारों कों क्रिमिलेअर से हटाए, हरीभाऊ राठोड की मांग

    यवतमाल. भटके विमुक्त,बारा बलूतेदारों कों क्रिमिलेअर से हटाने की मांग जिले के पुर्वसांसद हरीभाऊ राठोड ने की है. इस बारे में आज 20 सितंबर को जारी विज्ञप्ती के जरीए उन्होने कहा है की, सुप्रिम कोर्ट के इंदीरा साहनी मामलें में ओबीसी को आरक्षण देते समय क्रिमिलेअर की संज्ञा लागु की गयी है.

    लेकिन इसी समय ओबीसी में कुछ विशेष जाती जैसे पारंपारिक और व्यसायिक तथा भटके, विमुक्त जमात को क्रिमिलेअर की संज्ञा से बाहर रखने के आदेश दिए गए है. सुप्रिम कोर्ट के निर्देशों के मुताबिक, केंद्र सरकार ने 1993 में ओबीसी को 27 फिसदी आरक्षण देने का जो जीआर. जारी कीया था.

    उसमें साफ तौर पर कहा गया था की बारा बलूतेदार को इस संज्ञा में ना लें, जिससे यह संवैधानिक तौर पर यह साफ है की भटके विमुक्त और बारा बलूतेदार को कानूनी तौर पर हटाया जाए, लेकिन राज्य में 2004 के बाद गैरकानूनी तौर पर इस समाज को आरक्षण और सहुलियतें नकारी जा रही है, जिससे राज्य सरकार इस मामलें में तात्काल निर्णय लें और मंत्री जिम्मेदारीपूर्वक इस घटक को न्याय दें, एैसी मांग ओबीसी नेता और पुर्व सांसद हरीभाऊ राठोड ने की है.