Yavatmal Basti
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  • फ्लोराइडयुक्त पानी से हर वर्ष 15 प्रभावित

उमरखेड़. तहसील के बंजारा आदिवासी बहुल इलाके के गांव घामापुर(तांडा)के नागरिक किडनी की बीमारी से ग्रसित है. जिला स्वास्थ्य विभाग इस स्थिति की ओर अनदेखी करते दिखाई दे रहे हैं. प्रति वर्ष दस से पंद्रह लोग इस बीमारी से ग्रसित पाए जाते हैं. गांव जंगलों से घिरे एक सुंदर वातावरण में यह गांव बसा है. अमडापुर लघु परियोजना (बांध) गांव की आबादी लगभग दो हजार है. यहां के अधिकांश लोग कृषि से जुड़े हुए हैं और उनमें से अधिकांश छोटे भू-धारक हैं.

यह गांव गुर्दे की बीमारी से पीड़ित मरीजों से घिरा हुआ है. गांव में हर साल लगभग दस से पंद्रह लोगों को किडनी की बीमारी होती है. इतने लोगों को डायलिसिस जैसे महंगे इलाज के लिए हर साल नागपुर या नांदेड़ जैसे शहरों के अस्पतालों में जाना पड़ता है. ग्रामीणों के अनुसार इस बीमारी से अब तक लगभग 15 लोग प्रभावित हो गए हैं. स्थानीय लोगों का कहना है कि गांव में फ्लोराइड युक्त दूषित पानी की आपूर्ति होती है. गांव में ग्रापं द्वारा स्थापित वॉटर फिल्टर है, लेकिन अधिकांश समय बंद रहता है.

पानी के 876 नमूने पीने योग्य नहीं

जिले में बड़ी संख्या में फ्लोराइडयुक्त पानी के स्रोत पाए गए हैं. इस साल लिए गए 6,647 पीने के पानी के नमूनों में से 876 नमूने पीने योग्य नहीं पाए गए. 92 पानी के नमूने फ्लोराइडयुक्त पाए गए. फ्लोराइड युक्त पानी के कारण गुर्दे की बीमारी के मरीजों की संख्या बढ़ी है. सरकार को ऐसे गांवों में वाटर फिल्टर लगाने की जरूरत है. वहीं वाटर फिल्टर की नियमित देखरेख करने पर भी ध्यान देना जरूरी है. जिप की आम बैठक में उमरखेड़ तहसील के घामापुर और सेवादासनगर में तत्काल वाटर फिल्टर लगाने का प्रस्ताव पेश किया.

RO प्लांट और डायलिसिस की सेवा दें

घामापुर में किडनी की बीमारी 1996 में शुरू हुई. तब से इसे जानबूझकर नजरअंदाज किया. जा रहा है. इसलिए आज गांव के पुरुष और महिलाएं इससे ग्रसित हैं. कुछ लोगों को उपचार के दौरान डायलिसिस पर रहना पड़ रहा है. इस बीमारी से विगत कुछ वर्षों में ग 40 से 50 लोगों की मौत हो गई. दैनिक मजदूरी करने वाले ग्रामस्थों के लिए डायलिसिस का खर्च उठाना मुश्किल है. सरकार को घामापुर में रोगियों को मुफ्त डायलिसिस की सुविधा उपलब्ध कराना चाहिए. शुद्ध पेयजल के लिए गांव में आरओ प्लान्ट स्थापित करना चाहिए.

-विशाख जाधव, उपसभापति पंस.