Pak raises the concern of Indian exporters, cheap Pakistani onions came in the international market
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    यवतमाल. यवतमाल जिले में आस्मान छुते प्याज के दाम,इसका उत्पादन बढते ही अचानक गिर चुके है.प्याज की आवक कम होने के बाद व्यापारीयों द्वारा महंगे दरों पर प्याज बेंचा जाता है,लेकिन भरपुर उत्पादन के बाद प्याज काफी कम दरों पर खरीदी होने से जिले में उत्पादक किसानों कों खासा लाभ नही मिल पा रहा है.प्याज के दाम कम होने और बढने इन दोनों मामलों में प्याज उत्पादक किसानों को ही नुकसान उठाना पड रहा है.इस बार भी यही हालत है.

    2 माह पुर्व बडे पैमाने पर दाम बढने के बाद प्याज के दाम उत्पादन होते ही गिर चुके है.फिलहाल प्रति 10 रुपए किलों के दर से प्याज की खुले बाजार में बिक्री हो रही है.जबकी थोक मंडीयों में प्याज काफी कम दरों में खरीदा जा रहा है. स्थानिय प्याज की तुलना में नासिक और अन्य ठिकानों से आनेवाले प्याज के दर कम होने से इसे प्राथमिकता दी जा रही है, एैसे में यवतमाल जिले समेत अन्य स्थानों पर नया प्याज मार्केट में आते ही इसके दाम धडधडाकर गिर चुके है.

    एैसी हालत में किसानों का लागत खर्च निकलना मुश्कील हो चुका है, एैसी शिकायतें प्याज उत्पादक किसान कर रहे है,तो दुसरी ओर व्यापारीयों को भी इससे खासा मुनाफा नही मिल रहा है,जबकी थोक मंडी के दलालों को किसान के उत्पादन खर्च और मुनाफे से कोई लेनादेना नही है,उनका कमिशन तय होता है.

    लेकिन सरकार ने प्याज के गैरंटी दाम तय नही किए है,ना ही प्याज उत्पादकों कों अनुदान दिया जा रहा है, जिससे इस बार भी एक तरह से प्याज उत्पादन बडा खामियाजा प्याज उत्पादक किसानों को उठाना पड रहा है.एैसे में प्याज उत्पादन को लेकर ही अब किसानों में संभ्रम की स्थिती निर्माण हो चुकी है.एैसी प्रतिक्रिया उत्पादक किसानो ने चर्चा के दौरान दी.

    स्थानिय थोक और खुले बाजार में इन दिनों प्याज के दर काफी कम हो चुके है. प्रति किलो 10 से 15 रुपयों के दामों पर प्याज बिक रही है, जिले में इस बार भी प्याज का बम्पर उत्पादन हुआ है, एैसे में बाहरी शहरों से होनेवाली आवक कुछ कम है, एैसी जानकारी व्यापारीयों ने दी. थोक और खुले मंडी में दाम न होने से शहर के कुछ ईलाकों में प्याज के व्यापारी और उत्पादक किसान बोरीयों में प्याज भरकर उसे थोक दरों पर बेंचते दिख रहे है.जिले की सभी तहसीलों में प्याज बिक्री का यही आलम है.जिससे इस बार भी भरपुर आवक होने के बावजुद प्याज उत्पादक किसानों को नुकसान उठाना पड रहा है.

    सरकार समझे उत्पादकों की समस्या

    खेती व्यवसाय पुरी तरह प्रकृती पर निर्भर है, उसने साथ देने पर भरपुर उत्पादन होता है, लेकिन बाजार में प्याज उत्पादकों को इसके दाम नही मिलते है, क्योंकी सरकार ने प्याज पर कोई गैरंटी मुल्य लागु नही किया है, जिससे किसानों के लिए प्याज उत्पादन बेभरोसे का मामला है.अधिक उत्पादन होने से इस बार भी प्याज उत्पादकों को बर्बादी का मुंह देखना पड रहा है.एैसे में प्याज उत्पादन को लेकर सरकार किसान हित का फैसला लें, एैसी मांग की जा रही है.

    तो दुसरी ओर जीवनावश्यक वस्तु के दाम न बढें जिससे जनता नाराज न हों, लेकिन सरकार अपनी चमडी बचाने सुविधानुसार फैसले लेती है.सब्जीयों के दाम बढने पर गृहिणीयों का किचन बजट बिगडता है, इसे लेकर आवाज उठती है, लेकिन किसानों के कृषी उपज बम्पर होने पर उसके दाम गिरने के बाद प्याज 5 रुपए और पालक की गढ्डी 1 रुपए में बेंचने की नौबत किसानों पर आती है, उसका न जनता और ना ही सरकार पक्ष लेती दिख रही है.

    फिलहाल प्याज को दाम न होने से क्षेत्र के किसान दिक्कतों में आ चुके है, बारह महिनों प्याज उत्पादन करनेवाले किसान भी दिक्कतों में आ चुके है, नया प्याज लगाने पर बाजार में दाम गिरने पर फिर से लागत खर्च नही निकलेंगा, यह डर किसानों को होता है, तो दुसरी ओर उत्पादन कम होने पर इसके दाम मिलेंगी यह आस भी किसानों को होती है, इसी तरह का जुआ प्याज उत्पादक किसान खेलकर बर्बाद हो रहे है, आसपास के राज्यों में भी किसान भरपुर प्याज उत्पादन करते है.

    बिते वर्ष बारिश में प्याज अतिरिक्त बारिश से बर्बाद हुई थी, जिससे उत्पादन कम हुआ, एैसे में कुछ समय पहले इसे अच्छे दाम मिलें, सरकार को भी जनता का ध्यान अधिक होने से सीधे बाहरी देशों से प्याज की आयात की गयी, , एैसे में राज्य और केंद्र सरकार की प्याज खरीदी फरोख्त नितीयों का खामियाजा किसानों को भुगतना पड रहा है.

    जिले में ग्रिष्मकालीन प्याज की बुआई भरपुर हुई थी, सिंचाई जल उपलबध होने से प्याज का अच्छा उत्पादन होकर आर्थिक लाभ होंगा, एैसी किसानों को आस थी लेकिन उत्पादन निकलते ही एक माह में ही प्याज केवल 8 से 10 रुपए प्रतिकिलों तक पहूंच गयी, इस दर से किसानों ने व्यापारीयों कों प्याज बेंची, कांदा अधिक दिनों तक संग्रह कर रखा नही जा सकता है, वह नष्ट होता है, जिससे उसे तात्काल बेंचने की जल्दबाजी किसान और व्यापारीयों को होती है, एैसे में किसान उत्पादन के बाद फंसे हुए है.

    प्याज उत्पादक किसानों को नुकसान न हों इसके लिए सरकार उत्पादकों कों प्रति कीलो विशेष अनुदान दें, एैसी मांग हो रही है, लेकिन सरकार इसे लगातार नजरअंदाज कर रही है,इन दिनों केवल प्याज को छोडकर सभी सब्जीयों को अच्छे दाम है, महाराष्ट्र में नासिक में सबसे अधिक प्याज का उत्पादन होता है, इसके दामों को गैरंटी देने पर ही किसानों को राहत मिलेंगी,इस स्थिती में अब किसान आंदोलन की राह चुनने पर मजबुर है.ऐसे में सरकार विशेष अनुदान देकर किसानों आधार देकर उनका रोष कम करें, एैसी अपेक्षा जतायी जा रही है.