इस बार किसानों के लिए दिक्कतों भरी है राह, आधुनिक ज्ञान के अभाव में किसानों के लिए ई-फसल पंजीयन बना सिरदर्द

    • किसान, पटवारी,अधिकारी सभी हुए परेशान

    यवतमाल. राज्य सरकार ने इस वर्ष खरीफ फसल सत्र के दौरान बारिश, आपदा से फसल को नुकसान, फसलों और उसका क्षेत्र मिलाकर सभी तरह की तकनिकी और दस्तावेजी जानकारी किसानों को ई-फसल पेरा दर्ज करने सरकारी निर्णय निकाला, इसके बाद यवतमाल जिले में सरकार द्वारा निर्धारित विशेष एप्प के जरीए किसानों को ही इसमें जानकारी दर्ज करने के निर्देश दिए है.

    जबकी कुछ फिसदी राजस्व विभाग के तहसीलदार प्रशासन के अधिन आनेवाले पटवारीयों, मंडलअधिकारीयों कों भी फसल बुआई पंजीयन की जिम्मेदारी दी है.इसमें फसल पंजीयन, नुकसान सर्वे और मुआवजे में पारदर्शिता रखने की मंशा सरकार ने जतायी. लेकिन जिले के ग्रामीण ईलाकों के अधिकांश किसानों को आधुनिक मोबाईल तकनिक की ठोस जानकारी ना होने से जिले में अब यह ई-फसल पंजीयन का मामला उनके लिए सिरदर्द बनता दिख रहा है.

    इस फसल पंजीयन के नाम पर राजस्व विभाग के कर्मचारी, अधिकारीयों के पिछे सरकार ने अतिरिक्त काम लगा दिया है.जिससे उनपर भर भी काम का दबाव बढा है. जिले में फसल का बडा क्षेत्र और विभीन्न राजस्व मंडल होने से यह फसल पंजीयन, नुकसान सर्वे,सरकारी स्तर पर जानकारी दर्ज करने पटवारीयों, मंडल अधिकारीयों को इन दिनों नाको चने चबाने पड रहे है.

    एैसी जानकारी इस काम में जुटे पटवारीयो ने दी. स्थानिय मंडल अधिकारी राजेश नागलकर ने बताया की, सरकार ने जीआर.निकालकर इस वर्ष के लिए यह प्रक्रीया तो अपनायी है,लेकिन इस तरह का कामकाज हर वर्ष होंगा या नही इसके लिए फिलहाल कोई निर्देश नही है.

    त्रुटीरहीत फसल पंजीयन हों, सरकार के पास इसका सीधा रिकॉर्ड रहें, किसानों को लाभ मिलें, इसके लिए पीक पेरा प्रक्रीया शुरु की गयी है, इसके जरीए किसानों ने कहां पर क्या फसल ली है, इसकी जानकारी के साथ ही फसल का क्षेत्रफल अक्षांश और रेखांश में दर्ज होंगे.

    इससे पूर्व फसल पंजीयन का काम पटवारी के जिम्मे था, सर्कल, गुट में न जाकर मनमानी तौरपर फसल बुआई का क्षेत्र बताया जाता था, जिससे कुदरती आफत, बरसात के कारण किसानों को नुकसान मुआवजा देने में दिक्कतें थी,इसके अलावा सरकार को यह संदेह था की, फसल बर्बादी, नुकसान के बाद किसानों के नाम पर मुआवजा हडपा जाता है, क्योंकी अनेक स्थानों पर इस तरह के अनेक मामलें भी उजागर हुए थे.

    लेकिन इस पीक पेरा एप्प के जरीए किसानों को भी सरकार ने परेशानी में डाल दिया है, क्योंकी जिले में इसके लिए प्रशासनिक स्तर पर कीसी तरह का मार्गदर्शन या जनजागरण ठोस तौर पर नही हो पा रहा है, तो दुसरी ओर आधुनिक तकनिक, स्मार्टफोन, एंड्रायड मोबाईल की अधिकांश किसानों को जानकारी तक नही है, जिससे वें इस एप्प में जानकारी कैसे भरे यह पेचिदा सवाल किसानों के सामने है.

    इसी के चलते किसान यह प्रक्रीया दर्ज करने नजरअंदाजी कर रहे है. बता दें की सरकार ने इस एप्प में दो विकल्प दिए है.एक फार्मामित्र ऑप्शन जिसमें फसल नुकसान दर्ज करनें और ई पीक पाहणी एप्प में फसल बुआई का क्षेत्र दर्ज करना है.

    लेकिन इसमें जिला, तहसील, गांव,गुट, सर्वे नंबर,फसल चयन, सिंचाई के साधन,खाता क्रमांक दर्ज कर जानकारी सबमिट करना है, इसके अलावा किसानों कों इसका 4 अंकों का पासवर्ड याद रखना भी जरुरी है, इन सभी सिरदर्दभरे कामों के दौरान ग्रामीण ईलाकों में मोबाईल, वायफाय,इंटरनेट के सिग्नल, नेटवर्क न होने जैसी दिक्कतों से जुझना पडा है.

    यह सारा काम सरकार ने किसानों के जिम्मे डालने से पहले आनेवाली दिक्कतों पर गौर नही किया,एैसी चर्चा किसान और प्रशासनिक स्तर पर कर्मचारी, अधिकारी कर रहे है.एैसे में अधिकांश किसानों को आधुनिक तकनिक की जानकारी और ज्ञान न होने से जिले में सरकार का यह निर्णय किसानों के लिए पुरी तरह सिरदर्द बन चुका है.