जिले में अतिवृष्टि से सोयाबीन, कपास बर्बादी की कगार पर

    यवतमाल. जिले में मुसलाधार बारिश के बाद गिले अकाल की स्थिति निर्माण हो चुकी है. अगस्त और सितंबर माह में सभी 16 तहसीलों में भारी बारिश के कारण सोयाबीन और कपास की फसल बर्बादी की कगार पर पहूंच चुकी है. प्राप्त जानकारी के मुताबिक इन दिनों दारव्हा, कलंब, बाभुलगांव, पुसद,उमरखेड इन तहसीलों में भारी बारिश के कारण खेतों में पानी जमा हो जाने और अतिवृष्टी के कारण कपास के फल सड रहे है.

    जबकी सोयाबीन की फसल पुरी तरह सडगलकर फल्लीयां काली पड चुकी है, साथ ही सोयाबीन के दानों के अंकुर फुटने शुरु हो चुके है.अनेक तहसीलों में बारिश के कारण सोयाबीन के पौधे जमीनदोज होने और,खेतों में पानी जम जाने से सडकर फसल काली हो रही है.जबकी कपास के फल काले पडने और सड जाने से पौधों से निचे गिर रहे है.

    इस स्थिती के बाद कृषी विभाग द्वारा फसल बर्बादी का सर्वे करने का दावा कीया जा रहा है.जबकी फसल बिमा निकालनेवाले किसानों के खेतों में बिमा कंपनीयों ने अब तक सर्वे शुरु नही कीया है.भारी बारिश से एैन निकालने के समय सोयाबीन कपास की फसल बर्बाद हो रही है,जिससे कृषी विभाग के अधिकारी, कर्मचारीयों ने केवल कार्यालय में बैठकर कागज काले करने की बजाय तात्काल खेतों में पहूंचकर फसलों का पंचनामा जरुरी हो चुका है.

    बता दें की कृषी विभाग के आग्रह पर किसान कंपनीयों से फसल बिमा निकालते है, जिससे बिमा कंपनी पर फसल बर्बादी का सर्वे करने का दबाव भी कृषि विभाग द्वारा डाला जाना चाहीए,हजारों किसानों नें समय पर बिमा भरा है, कंपनीयों कों कौनसी फसल कब निकलती है, यह पता होने से अब अतिवृष्टी के दौरान फसल बर्बादी का सर्वे करने की जिम्मेदारी कृषी विभाग और बिमा कंपनीयों की है, जिससे इस मामलें में तात्काल सर्वे की मांग किसान वर्ग कर रहा है.

    मानसुन के पुर्व सिंचाई के साधनोंवाले खेतों में किसानों नें अर्ली क्वालीटी की सोयाबीन बोयी थी, जो फिलहाल निकल रही है, इसकी आवक भी बाजारमंडी में हो चुकी है, अच्छे स्तर की अर्ली सोयाबीन को प्रतिक्वींटल11 हजार रुपयों के दाम मिलने से इसके बाद दिपावली से पहले निकलनेवाली सोयाबीन को भी अच्छे दाम मिलेंगे एैसी उम्मीदें किसान जता रहे थे.

    लेकिन खरीफ की सोयाबीन निकलने के पुर्व ही कृषीउपज बाजार मंडीयों और निजी खरीददार व्यापारीयों द्वारा प्रतिक्वींटल 4500 से 5 हजार रुपयों तक दाम तय होते दिख रहे है.एैसे में अतिवृष्टी से सोयाबीन काली पड जाने, दानों का आकार छोटा होकर निकलनेवाली सोयाबीन को क्या दाम मिलेंगे, इसे लेकर ही अब किसानों में चिंता दिख रही है.