एसटी कर्मियों की हड़ताल 24 दिन भी रही भारी

    यवतमाल. राज्य परिवहन निगम को सरकारी विभाग में विलीन करने की मांग को लेकर राज्य समेत यवतमाल जिले के परिवहन विभाग के एसटी कर्मी बिते 24 दिनों से हडताल पर है. इससे एसटी सेवा बुरी तरह बाधित हुई है.यवतमाल विभागीय नियंत्रण कार्यालय के अधिन आनेवाले यवतमाल समेत सभी 9 डिपों के एसटी बसचालक, कंडक्टर, यांत्रिकी और प्रशासकिय कर्मचारी हडताल पर है, जिससे रापनि का काम पुरी हर ठप्प पडा हुआ है.

    जिले में सभी बस डिपों में यात्रीयों के लिए बसें ना होने से विरानी छायी हुई है. जबकी सभी डिपों के सामने एसटी कर्मी लगातार हडताल करते हुए अपने मांगों पर अडीग है. 24 दिन बितने पर भी सरकार और महामंडल प्रशासन द्वारा विलीनीकरण के मुददे से लेकर एसटी श्रमिकों के आर्थिक मुददो पर हल नही निकल पाया है,जिससे अब कर्मचारीयों में रोष व्याप्त है.

    पुर्वसांसद राठोड के बिगडे बोल से रोष में आए कर्मी

    इसी बीच अब इस मामलें में राजनिती भी गर्म होती दिख रही है. आज जिले के पुर्व सांसद तथा कॉंग्रेस नेता हरिभाऊ राठोड ने एसटी हडताल के दौरान भाजपा पर राजनिती कर हडतालीयों कों गुमराह करने का आरोप लगाया.इससे भाजपा से पहले एसटी कर्मी आंदोलनकारीयों में ही रोष उमड आया.

    उनके बयान के बाद स्थानिय आंदोलनस्थल पर महिलाकर्मीयों ने कहा की पुर्व राठोड खुद एक बार भी आंदोलनस्थल नही पहूंचे है, तो दुसरी ओर हडताल को समर्थन देनेवाले पार्टी पर अनर्गल बयान दे रहे है, वें सामने आकर बोले, भाजपा क्या करती है, इसे छोडकर वें क्या कर रहे है, यह ध्यान में ले,हडताल के कारण हो रही दयनिय हालत पर ध्यान दें, जब तक विलीनीकरण नही होता तब तक आंदोलन वापस नही होंगा, एैसी भूमिका राठोड के बयान के बाद संतप्त आंदोलनकारी कर्मचारीयों ने दर्ज की.

    इसी बीच एसटी कर्मीयों की हडताल के दौरान जिले में एसटी सेवा बाधित होने के बाद 162 कर्मचारीयों को निलंबित करदिया गया है, इसके अलावा हडताली कर्मचारीयों के वेतन रोक दिए गए है, जिससे उनकी आर्थिक स्थिती बिकट हो चुकी है, एैसी जानकारी एसटीकर्मीयों ने दी.

    राज्य सरकार द्वारा विलीनीकरण के मुददे पर हल निकालने की मांग इस दौरान की जा रही है.एसटी फेरीयां बंद होने से अब तक महामंडल को यवतमाल विभाग में ही करोडों का नुकसान हो चुका है, इसके अलावा यात्रीयों के लिए सेवा बंद होने से आम नागरिकों को यात्रा के लिए दिक्कतें झेलनी पड रही है.

    उल्लेखनिय है की रापनि कर्मीयों की विलीनीकरण की मांग पर जारी हडताल के दौरान निजी ट्रैव्हल्स और  निजी यात्री परिवहन करनेवाले वाहनों को यात्री परिवहन की अनुमति दी गयी है. लेकिन निजी यात्री वाहन दुरदराज और ग्रामीण ईलाकों के अंदरुनी गांवों में वाहन नही ले जा रहे है, जिससे ग्रामीण स्तर पर बडे पैमाने पर नागरिकों को दिक्कतों का सामना करना पड रहा है.

    तो दुसरी ओर एसटी बसें बंद होने का पुरा लाभ निजीत्री वाहन ले रहे है.इन दिनों पुणे, नासिक, नागपुर, अमरावती समेत बडे शहरों में जानेवाले नागरिकों से सामान्य किरायों की तुलना में 10 से 15 फिसदी राशि अधिक वसुली जा रही है, एैसी शिकायतें आए दिन नागरिक कर रहे है.

    निजी यात्री वाहनों में कोरोना नियमों का बंटाढार

    प्रशासनिक अनुमती के बाद धडल्ले से निजी यात्री वाहन फेरीयां चला रहे है, लेकिन अधिक मुनाफा कमाने की चक्कर में कोविड त्रिसुत्री का इन वाहनों में बंटाढार हो चुका है, किसी भी वाहन में सैनिटायजेशन की सुविधा का अभाव, सामाजिक अंतर के नियमों को दरकिनार कर यात्रीयों को मर्यादा से अधिक भरा जा रहा है, छोटे वाहनों में यात्रीयों को ठूसकर यात्रा के लिए वाहन छोडे जा रहे है, जिससे कोरोना के त्रिसुत्री का निजी ट्रैव्हल्स और यात्री वाहनों में बंटाढार होता दिख रहा है.