Assembly session from today, Pilot will sit next to Gehlot, not next to him

    जयपुर: पंजाब में सत्ता परिवर्तन के बाद दो और कांग्रेस शासित प्रदेश छत्तीसगढ़ और राजस्थान में भी मुखिया बदलने की अटकलों का दौर शुरू है। चल रही इन अटकलों पर मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने बड़ा बयान दिया है। शनिवार को पत्रकारों से बात करते हुए उन्होंने कहा कि, “यहां कोई बदलाव नहीं हो रहा है और 2023 में भी मैं ही बनूंगा मुख्यमंत्री। इसी के साथ अपने पसंद के मंत्री भी चुनूंगा।” 

    मुख्यमंत्री ने कहा, “मीडिया में राजस्थान को लेकर जो बातें चल रही हैं, वैसा कुछ नहीं होने वाला है। वह पंजाब में हो गया है। यहां नहीं होगा। ये केवल मीडिया और भाजपा के लिए।राजस्थान में कांग्रेस अपना कार्यकाल पूरा करेगी और अगले 15 साल तक बनी रहेगी।” 

    पंजाब के बाद राजस्थान, छत्तीसगढ़ के बारे में कहानियां बनाई जाती हैं कि यहां भी बदलाव होने वाला है। आप निश्चिंत रहे पांच साल सरकार रहेगी और अगली बार भी सरकार बनाएंगे. अगली बार भी मै हीं मुख्यमंत्री बनूंगा और अपनी मर्ज़ी से मंत्री भी बनाऊंगा। मैं तो शांति धारीवाल को फिर से नगरीय विकास मंत्री बनाऊंगा।

    अशोक गहलोत, मुख्यमंत्री, राजस्थान

    भाजपा पर हमला बोलते हुए गहलोत ने कहा, “भाजपा वाले कहते हैं की मुख्यमंत्री सीएम आवास पर बैठे हैं। मैं तो जयपुर और जैसलमेर के होटल-होटल घूमता हूँ। अगर हमारे विधायक न होते तो पता  नहीं मैं कहा होता। 

    15 साल रहेगी मेरी सरकार 

    वहीं खुद पर बाहर नहीं निकलने और जमीनी हालातों की जानकारी नहीं होने के आरोप पर सफाई देते हुए मुख्यमंत्री ने कहा, “न मैं घर पर बैठा हूँ। वहीं मीडिया पर हमला बोलते हुए उन्होंने कहा, “जैसे ही मैं बाहर निकलूंगा आप को और आप के चाहने वालों को तकलीफ होने लगेगी।”

    पायलट और गहलोत के बीच चल रही लड़ाई 

    राजस्थान में मुख्यमंत्री पद को लेकर अशोक गहलोत और सचिन पायलट के बीच लड़ाई शुरू है। पिछले साल 2020 में मार्च महीने में पायलट ने बगावत कर दी और अपने समर्थक विधायकों के साथ हरियाणा के एक रिसोर्ट में जाकर रुक गए। उसके बाद लगातार कई दिनों तक राजस्थान सरकार में लगातार उथल-पुथल मची रही। अशोक गहलोत अपने समर्थक विधायकों को लेकर पहले जयपुर के एक होटल में रुके रहे फिर कुछ दिन बाद जैसलमेर के एक होटल में रखा गया। 

    इस संकट के दौरान गहलोत ने पायलट के खिलाफ कई विवादित बयान देते हुए उन्हें बत्तमीज तक कह दिया था। इस दौरान अशोक गहलोत ने अपनी सरकार से पायलट समर्थक दो मंत्रियों को भी हटा दिया था। वहीं राहुल गांधी और सोनिया गांधी के साथ बातचित के बाद