Development and direction of the state will change only with agriculture

    ओमप्रकाश मिश्र 

    रांची. कृषि मंत्री बादल पत्रलेख ने कहा कि बिरसा कृषि विश्वविद्यालय (Birsa Krishi Vishwavidyalaya) की भूमिका राज्य में कृषि विकास के क्षेत्र में अविस्मरणीय रही है। उन्होंने कहा कि राज्य के किसानों (Farmers) की दशा और दिशा बदलने में बीएयू की भूमिका को नकारा नहीं जा सकता। वे बिरसा कृषि विश्वविद्यालय प्रांगण में आयोजित अभिनंदन समारोह में बोल रहे थे। बादल ने कहा कि राज्य में किसानों को आत्मनिर्भर बनाने के लिए विभिन्न योजनाओं के तहत सुविधाएं प्रदान की जा रही हैं। किसानों को कृषि यंत्र के साथ-साथ बीज का वितरण और किसान क्रेडिट कार्ड (Kisan Credit Card) की भी सुविधा दी जा रही है। कृषि मंत्री ने कहा कि विश्वविद्यालय के तकनीकी विकास एवं तकनीकी हंस्तान्तरण और तय मानकों के अनुरूप सरकार सहयोग करेगी I साथ ही छात्रों को गुणवत्तायुक्त शिक्षा और प्लेसमेंट के अवसर की दिशा में भी प्रयासरत्त रहेगी।

    बादल ने झारखंड को आदिवासी बहुल राज्य बताते हुए कहा कि इनके हितों की रक्षा और कृषि विकास के लिए पक्ष और विपक्ष के संयुक्त प्रयास से बिरसा कृषि विश्वविद्यालय को केन्द्रीय कृषि विश्वविद्यालय बनाने की दिशा में कदम उठाए जा रहे हैं। उन्होंने बीएयू की स्थापना में स्व. कार्तिक उराव के योगदान के बारे में बताया और उनके नाम से संस्थान की स्थापना की बात रखी। बादल ने कहा कि राज्य का विकास और दिशा कृषि से ही बदलेगा। कृषि विभाग एवं विश्वविद्यालय हर स्तर पर अधिकाधिक बिरसा किसानों को कृषि तकनीकी से जागरूक और समृद्ध करेंI किसानों का विश्वास जीता जाए और कृषि उत्पादों का किसानों को मुनासिब मूल्य मिले । उन्होंने प्रत्येक कृषि विज्ञान केन्द्रों को 5 हजार किसानों को जागरूक और आत्मनिर्भर बनाने का प्रयास करने की सलाह दी।

    अनुकम्पा आधारित नियुक्ति पत्र का वितरण

    पहली बार कृषि मंत्री बादल के आगमन पर बीएयू कुलपति डॉ. ओ.एन. सिंह ने उनका अभिनन्दन किया। समारोह में कृषि मंत्री द्वारा विश्वविद्यालय के मृत कर्मियों के 22 आश्रितों को अनुकंपा पर आधारित नियुक्ति-पत्र प्रदान किया गया।  उन्होंने कहा कि विभागीय स्तर पर नियुक्ति की प्रक्रिया चल रही है। जिसके परिणाम जल्द देखने को मिलेंगे। देश और राज्य की बहुतायत आबादी कृषि पर निर्भर है। देश के जीडीपी में कृषि का औसत योगदान 17 प्रतिशत और राज्य के जीडीपी में कृषि का औसत योगदान 12 प्रतिशत मात्र है। उन्होंने कहा कि केंद्र में कृषि का बजट मात्र 7 प्रतिशत और राज्य में 5 प्रतिशत है। इसमें सुधार के लिए अधिकार और कर्तव्य बोध पर ध्यान देने होगा। 

    पंचायत स्तर पर कृषि शो केस स्थापित करने की जरूरत 

    मौके पर रांची सांसद संजय सेठ ने बीएयू को केन्द्रीय कृषि विश्वविद्यालय का दर्जा देने का प्रस्ताव राज्य सरकार के स्तर से भेजने और केंद्र सरकार में हरसंभव प्रयास एवं सहयोग देनी की बात कही। उन्होंने कहा कि झारखंड कृषि मामलों में विशेषकर सब्जी उत्पादन में काफी समृद्ध है। जिसे आगे बढ़ाने और पंचायत स्तर पर कृषि शो केस स्थापित करने की जरूरत है। कांके विधायक समरीलाल ने प्रदेश के किसानों की खुशहाली के लिए राज्य सरकार द्वारा कृषि विश्वविद्यालय पर खास ध्यान देने की आवश्यकता जोर दिया। उन्होंने विश्वविद्यालय में गृह विज्ञान कॉलेज खोलने और केन्द्रीय कृषि विश्वविद्यालय की दर्जा दिलाने की मांग रखी। पूर्व शिक्षा मंत्री गीता उराँव ने विश्वविद्यालय के प्रगति के अवलोकन को भावुक क्षण बताया। उन्होंने विश्वविद्यालय द्वारा स्व. कार्तिक उराँव के सपनों को पूरा करने की दिशा में किसानों को अधिकाधिक तकनीकी लाभ देने, सूदूर ग्रामीण क्षेत्रों की समस्या का निराकरण करने और विश्वविद्यालय में बड़े क्षमतावाली ऑडिटोरियम का निर्माण करने की सलाह दी।

    दलहन उत्पादन के मामले में राज्य अग्रणी

    कृषि सचिव अबू बकर सिद्दीक ने कहा कि हमारे समाज में कृषि का कोई विकल्प नहीं है। राज्य में पिछले वर्ष सबसे अधिक उत्पादन हुआ। दलहन उत्पादन के मामले में राज्य अग्रणी है। राज्य कृषि विकास में बीएयू की अग्रणी भूमिका रही है। विश्वविद्यालय को पशुपालन, मत्स्य और वानिकी तकनीकी के क्षेत्र में विशेष ध्यान देना होगा। स्वागत भाषण में कुलपति डॉ. ओंकार नाथ सिंह ने विगत एक वर्षो में विश्वविद्यालय की उपलब्धियों को रखा। कार्यक्रम का संचालन शशि सिंह तथा धन्यवाद ज्ञापन डॉ. ए. वदूद ने दी।