भाषा की राजनीति में मगधी भाषा का अपमान बर्दास्त नहीं किया जाएगा : के. एन. त्रिपाठी

    ओमप्रकाश मिश्र 

    रांची. झारखंड सरकार के पूर्व मंत्री और इंटक के राष्ट्रीय अध्यक्ष के. एन. त्रिपाठी (K. N.Tripathi) ने मगही युवा मोर्चा की मगही भाषा (Magahi Language) को शामिल करने की मांगों का समर्थन करते हुए कहा कि आपकी मांगों को मानने के लिए मै अपनी पार्टी और झारखंड सरकार (Jharkhand Government) दोनों से बात करूंगा। मैं पहले भी कुछ मामलों को सरकार के समक्ष रखा हूं, मै आश्वस्त एवं विश्वस्त हूं कि हमारी पार्टी के साथ सरकार भी आपकी मांगों को मान लेगी। त्रिपाठी ने मगही युवा मोर्चा की मांगों को तर्कपूर्ण बताया ।

    उन्होंने कहा कि जिस तरह पूर्व की सरकार ने झारखंड राज्य को अलग-अलग कानून बनाकर 13 और 11 जिलों के तहत दो भागों में बांटने का कार्य किया था और आप लोगों के आंदोलन से उस कानून को सरकार को बदलना पड़ा, उसी तरह भाषा के आधार पर 12 और 4 भाषाओं में झारखंड को नहीं बांटा जा सकता है।

    5000 साल पुराना है मगधी भाषा 

    त्रिपाठी ने कहा कि एक समय था कि जब मगध साम्राज्य का इतिहास ही भारत का इतिहास थाI उस समय भारत देश मे मगध साम्राज्य स्थापित था। उसकी भाषा मगधी थी। उस समय मगध का साम्राज्य गया, पटना, राजगीर से लेकर अफगानिस्तान, दक्षिण भारत तक फैला हुआ था। कटक कलिंगा, उड़िसा से लेकर पुरा का पुरा भारत बांग्लादेश तक फैला हुआ था। यही मगध साम्राज्य था और इसकी भाषा मगधी प्राकृतिक थीI झारखंड सरकार द्वारा मगधी भाषा को नियोजन की नीति से अलग करने पर नाराजगी जाहिर करते हुए त्रिपाठी ने कहा कि मगधी भाषा 5000 साल पुराना है। 

    मगधी भाषा का इतिहास बहुत पुराना 

    मगध साम्राज्य के शासक जरासंध से लेकर  बिन्दुसार, आजातशत्रु, चन्द्रगुप्त मौर्य और सम्राट अशोक, भगवान बुद्ध, भगवान महावीर तक जैसी विभूतियों का नाम मगध की सरजमीं से जुड़ी है। ऐसे में मगही भाषा को अलग करना तर्कसंगत नहीं है I उन्होंने यह भी कहा कि झारखंड सरकार ने जिन बारह भाषाओं को नियोजन नीति में शामिल किया है उनमें से अधिकांश भाषाएं बंगाली, बांग्ला, उड़िया खोरठा, नगपुरीया, आसामी जैसी भाषाएं मगधी प्राकृत प्राचीन भाषा का ही अपभ्रंश है। इसी भाषा से निकलकर सारी भाषाओं का निर्माण हुआ है। मगध साम्राज्य मैथिली,अंगिका, भोजपुरी, उत्तर प्रदेश-वाराणसी, आसाम की भाषा सारी भाषाएं अपभ्रंश है। और यही भाषा पुरे भारत की भाषा मगधी प्राकृत प्राचीन भाषा है। इससे ही सभी भाषाओं का उद्भव हुआ है तो हम इस भाषा को कैसे छोड़ सकते हैं?  त्रिपाठी ने कहा कि मगध साम्राज्य का इतिहास चन्द्रगुप्त द्वितीय, समुद्रगुप्त का इतिहास मगधी प्राकृत प्राचीन भाषा है। लोग कहते है यह भाषा नहीं बोली है। अब अगर सरकार में बैठे लोगों को जानकारी का अभाव है तो क्या करें? नालंदा विश्वविद्यालय के अभिलेखों को देखेने से पता चलता है कि इस भाषा की जो लिपि थी वह न्यायपालिका की भाषा थी और इसकी लिपी कैथी लिपि थी। जो पहले राज्य-शासन के न्यायपालिका में चलती थी।

    आज पूरे राष्ट्र की भाषा हिन्दी है और हमें फक्र है। हम हिंदी इसलिए बोलते हैं की हम राष्ट्रवादी है और भारत राष्ट्र के साथ खड़े है। हिन्दी भाषा भी मगधी प्राकृत प्राचीन भाषा की टूटी हुई भाषा है। और मातृभाषा संस्कृत है। त्रिपाठी ने कहा कि मगधी भाषा का इतिहास बहुत पुराना है मगध साम्राज्य के न्यायपालिका की भाषा, महात्मा बुद्ध, भगवान महावीर जैन, राजवंशों की भाषा मगधी प्राकृत प्राचीन भाषा थी। तो झारखण्ड सरकार  इस भाषा को शामिल नहीं करने का फैसला कैसे कर सकती है? झारखंड के 11 जिलों में जो भाषा बोली जाती है उसको शामिल करना ही पड़ेगा। झारखंड राज्य की पहचान एवं अधिकारों पर यह कुठाराघात नहीं होने देंगें। 

    सभी भाषा का समान आदर करना चाहिए

    झारखंड के सवा तीन करोड़ की आबादी ,24 जिला और 267 प्रखंड में हर एक पंचायत के लोगों को उनकी भाषा बोली को झारखंड सरकार को ध्यान में रखना ही होगाI ऐसे में सरकार इस भाषा की उपेक्षा कैसे कर सकती है? त्रिपाठी ने भोजपुरी अंगिका मैथिली और मगही के साथ राजनीति ना करने की सलाह देते हुए कहा कि सरकार को सभी भाषा का समान आदर करना चाहिए।