The officers raised slogans against the mayor, Mayor Asha Lakra sat on dharna

    ओमप्रकाश मिश्र 

    रांची. रांची नगर निगम (Ranchi Municipal Corporation) में मेयर (Mayor) और नगर आयुक्त (Municipal Commissioner) के बीच की लड़ाई अब प्रत्यक्ष रूप से सामने आ गई है। मेयर द्वारा आहूत आज की समीक्षा बैठक (Review Meeting) में नगर आयुक्त के समर्थन में जहां एक ओर नगर निगम के अधिकारीयों ने मेयर आशा लकड़ा के खिलाफ जमकर नारेबाजी की।

    वहीं नगर आयुक्त मुकेश कुमार और उनके सहयोगी अधिकारीयों की तानाशाही रवैये के खिलाफ  कुछ पार्षदों के साथ आशा लकड़ा धरने पर बैठ गई। जनता के मुद्दे पर आशा लकड़ा द्वारा बुलाई गई आज की  प्रस्तावित बोर्ड की बैठक इसी लड़ाई का परवान चढ़ गया। बैठक शुरू होने से पहले अधिकारियों ने हंगामा शुरू कर दिया। वे मेयर के खिलाफ नारेबाजी करने लगे और बैठक में शामिल होने से इंकार कर दिया।

    अधिकारियों को मनमानी करने नहीं दिया जाएगा

    निगम के अधिकारीयों की  मांग थी कि मेयर ने जिस तरह से अधिकारियों के लिए आपत्तिजनक शब्दों का इस्तेमाल किया है उससे वो आहत हैं। इसलिए जब तक मेयर अपनी बातों को वापस नहीं ले लेती हैं तब तक बैठक की कार्यवाही नहीं होने दी जाएगी। अधिकारियों के पक्ष में कुछ पार्षद भी उतर आए और हंगामा शुरू कर दिया।इसके बाद अधिकारियों की मनमानी को लेकर मेयर के साथ अधिकतर पार्षद गेट पर ही धरने पर बैठ गए। मेयर ने कहा कि इस तरह से अधिकारियों को मनमानी करने नहीं दिया जाएगा।

    मेयर ने कहा- बातचीत के दौरान जुबान फिसल गई होगी

    इधर मेयर का कहना था कि हो सकता है कि बातचीत के दौरान जुबान फिसल गई होगी। इसलिए मैं अपनी बातों को वापस लेती हूं। इसके बाद उन्होंने अधिकारियों से बैठक शरू करने की अपील की, लेकिन अधिकारी नहीं मानें।रांची नगर निगम में छाये वैमनस्यता के बादलों का कारण यह है कि पिछले 4 सितंबर को रांची नगर निगम की मेयर आशा लकड़ा ने नगर निगम के कर्मचारियों और पदाधिकारियों पर टिप्पणी करते हुए कहा था कि निगम के कर्मचारी – पदाधिकारी मोटी चमड़ी वाले हो गए हैं। ये लोग औरंगजेब का शासन चलाते हैं। मेयर के इसी बयान से अधिकारियों में मेयर के खिलाफ नाराजगी है। इसी कारण मेयर की बैठक और मीटिंग से अधिकारी गायब रह रहे हैं।

    बोर्ड की बैठक स्थगित कर दी गई थी

    आज की बोर्ड की बैठक में सरकार की जल नीति पर चर्चा होनी थी। इसके अलावा स्ट्रीट लाइट में टाइमर लगाने के लिए एजेंसी के चयन पर चर्चा होनी थी। पिछली बैठक में इन्हीं बिंदुओं को लेकर हंगामा हो गया था। मेयर ने इन प्रस्ताव पर रोक लगा दी थी। इसके बाद बोर्ड की बैठक स्थगित कर दी गई थी। तब से बोर्ड की बैठक नहीं हो पाई है।