vegetables
File

    वाराणसी : मोदी-योगी (Modi-Yogi) का  किसानों (Farmers) की आय (Income) दुगनी करने का संकल्प सफल होता दिखाई दे रहा है। पूर्वांचल (Purvanchal) की हरी सब्जियों (Green Vegetables) ने एक बार फिर खाड़ी देशों की ओर उड़ान भरना शुरू कर दिया  है। दुबई (Dubai) और शारजाह (Sharjah) के शेख पूर्वांचल की पौष्टिक सब्जियों  का स्वाद चख सकेंगे। बाबतपुर स्थित लाल बहादुर शास्त्री अंतर्राष्ट्रीय  एयरपोर्ट से एयर इंडिया एक्सप्रेस का विमान हरी सब्जियों को लेकर  उड़ान भर दिया है। दो मीट्रिक टन के कार्गो में  परवल, भिंडी, नेनुआ, कुंदरू और सूरन आदि सब्जियां हैं। 

    2020 में भी लंदन, दुबई, दोहा, कतर जैसे कई देशों में  हरी मिर्च, बनारसी लंगड़ा आम, काला चावल निर्यात हो चुका है। बिचौलियों को बीच से हटा कर किसान खाद्य पदार्थों का अब सीधा निर्यात कर रहा है। जिससे उनको  अधिक मुनाफा  मिल  रहा है। योगी सरकार ने पूर्वांचल  के  किसानों के लिए एक्सपोर्ट  को आसान बना दिया है। किसानों के समूह  (FPO ) फार्मर प्रोडूसर आर्गेनाइजेशन के माध्यम से किसान बिना बिचौलियों के सीधे निर्यात कर रहे है। जिससे उनको अधिक मुनाफा हो रहा है। सरकार बिचौलियों को बीच  से हटा कर किसानों की मेहनत का पूरा पैसा उनको दिलाना चाहती है। इन उपक्रमों के माध्यम से सरकार किसानों की आय दुगनी करने में तेजी से सफल हो रही है। जिसमें खेती का आधुनिकीकरण, किसानों का  प्रशिक्षण, अच्छे बीज और खाद की समय से उपलब्धता, दैवीय आपदा में समय से उचित मुआवजा आदि सरकारी सहायताएं शामिल हैं।

     हरी सब्जियां यूएई भेजी गई

    क्षेत्रीय प्रभारी एपीडा डॉ. सी.बी सिंह ने बताया कि प्रधानमंत्री के संसदीय क्षेत्र वाराणसी के  लाल बहादुर शास्त्री अंतर्राष्ट्रीय एयरपोर्ट से इस सीज़न का पहली बार पूर्वांचल के जिलों  वाराणसी, प्रयागराज, भदोही से दो मीट्रिक टन हरी सब्जियां यूएई (संयुक्त अरब अमीरात) के दुबई और शारजाह के लिए रवाना हुईं हैं। जिसमें भिंडी, नेनुआ, परवल, कुंदरु और सूरन शामिल हैं। ये सब्जियां भदोही के  फार्मर प्रोड्यूसर आर्गेनाइजेशन के माध्यम से निर्यात की जा रही हैं। जिसमें करीब 15 -20 किसान  जुड़े हैं। जबकि पूर्वांचल में करीब 35 से 40 एफपीओ सक्रिय हैं। जिससे करीब 35 से 40 हजार  किसान जुड़ कर अपनी आय बढ़ा रहे हैं।

    आम के लिए नया बाजार  लंदन मिला 

    क्षेत्रीय प्रभारी एपीडा ने बताया कि वाराणसी को एग्री एक्सपोर्ट सेंटर बनाने का सिलसिला तो पहले से चल रहा था जो धरातल पर 1 नवंबर 2019 को उतरा। ये वो समय था जब  प्रधानमंत्री के संसदीय क्षेत्र वाराणसी  में बायर और सेलर  मीट का आयोजन हुआ, जिसमें  20 निर्यातक और 25 एफपीओ जिसमें 120 एफपीओ  से जुड़े  किसान शामिल हुए थे।  क्षेत्रीय प्रभारी एपीडा  बताया कि वाराणसी से दिल्ली और फिर लंदन के लिए  23 अप्रैल 2020 तक 3 मीट्रिक टन ताजी  हरी मिर्च जा चुकी है।  मई 2020 में दुबई के लिए तीन मीट्रिक टन फ्रेश लंगड़ा आम एक्सपोर्ट हुआ था।  आम के लिए नया बाजार  लंदन मिला जहां जून 2020  तक 1.2 मीट्रिक टन आम एक्सपोर्ट हुआ था। धान का कटोरा कहे  वाले जिला चंदौली से एपीडा के प्रयास से  एक्सपोर्टर ने जून 2020 में  80 मीट्रिक टन काला चावल का धान लिया। 

    किसानों के खाते में जमा हुआ पैसा

    उत्पादों के निर्यात से प्राप्त 68 लाख  रुपए सीधे 152 किसानों के खाते में पहुंचा था, इसके साथ ही दिसंबर में ही चंदौली का क्षेत्रीय चावल दोहा कतर के लिए 520 मीट्रिक टन एक्सपोर्ट किया गया था। जिसमें 12 मीट्रिक टन चंदौली का  काला चावल सहित 532 मीट्रिक टन चावल कतर निर्यात हुआ था। ओमान के ग्लोबल लोजिस्टिक्स ग्रुप ने भी वाराणसी का दौरा  किया था। जिससे एक्सपोर्ट को बढ़ावा दिया जा सके। किसानों  और एफपीओ को अधिक आर्थिक लाभ पहुंचाने के लिए  एफपीओ  को जुलाई 2020 से एक्सपोर्ट का लाइसेंस भी दिया जाने लगा है। जिसके कारण किसानों की मेहनत की फसल का सही दाम मिलने के साथ निर्यात बढ़ने के आय में वृद्धि भी हुई है।