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    नयी दिल्ली. पांच राज्यों में विधानसभा चुनावों (Vidhan Sabha Elections) के मद्देनजर भारतीय जनता पार्टी (BJP) की केंद्रीय चुनाव समिति (CEC) की बैठक बृहस्पतिवार को पार्टी के केंद्रीय कार्यालय में आरंभ हुई। इस बैठक में उत्तर प्रदेश के लिए उम्मीदवारों के नामों पर मंथन जारी है।

    सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, केंद्रीय मंत्री व उत्तर प्रदेश के प्रभारी धर्मेंद्र प्रधान, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य, प्रदेश अध्यक्ष स्वतंत्र देव सिंह सहित केंद्रीय चुनाव समिति के अन्य सदस्य पार्टी मुख्यालय में बैठक में हिस्सा ले रहे हैं। सूत्रों ने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, भाजपा अध्यक्ष जे पी नड्डा, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी डिजिटल माध्यम से इस बैठक से जुड़े।

    ज्ञात हो कि नड्डा, राजनाथ और गडकरी पिछले दिनों कोरोना वायरस से संक्रमित हो गए थे। उल्लेखनीय है कि पिछले दो दिनों से भाजपा में बैठकों का दौर जारी है। अब तक हुई बैठकों के दौरान भाजपा की चर्चाओं के केंद्र में उत्तर प्रदेश रहा। पार्टी ने जहां अपने संभावित उम्मीदवारों के नामों पर चर्चा की वहीं अपने सहयोगियों को साधने की भी कोशिश की। सूत्रों ने बताया कि इन बैठकों के दौरान पार्टी के भीतर योगी आदित्यनाथ को अयोध्या सीट से चुनाव लड़ाने को लेकर भी चर्चा हुई है लेकिन इसके बारे में अंतिम फैसला पार्टी की केंद्रीय चुनाव समिति पर छोड़ दिया गया है। ज्ञात हो कि सीईसी उम्मीदवारों के नामों को अंतिम रूप देती है।

    उत्तर प्रदेश में इस बार सात चरणों में चुनाव होगा और इसकी शुरुआत 10 फरवरी को राज्य के पश्चिमी हिस्से के 11 जिलों की 58 सीटों पर मतदान के साथ होगी। सूत्रों के मुताबिक, पहले व दूसरे चरण के मद्देनजर पार्टी आज की बैठक में अपने कुछ उम्मीदवारों के नाम तय करेगी। दूसरे चरण में 14 फरवरी को राज्य की 55 सीटों पर मतदान होगा। सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक, बुधवार को अपना दल (एस) की नेता अनुप्रिया पटेल ने केशव प्रसाद मौर्य और स्वतंत्र देव सिंह के साथ देर रात तक सीटों के तालमेल को लेकर चर्चा की, वहीं निषाद पार्टी के अध्यक्ष संजय निषाद ने अपने सांसद पुत्र प्रवीण निषाद के साथ अमित शाह से चर्चा की।

    सूत्रों ने बताया कि अनुप्रिया पटेल 20 सीटों की मांग कर रही हैं लेकिन भाजपा इसके लिए तैयार नहीं है। सूत्रों के मुताबिक, भाजपा चाहती है कि पिछले विधानसभा चुनाव में अपना दल को जितनी सीटें मिली थी, वह उतनी ही सीटों पर चुनाव लड़े। पिछले विधानसभा चुनाव में अपना दल को गठबंधन के तहत 11 सीटें मिली थीं। पार्टी को नौ सीटों पर जीत मिली थी।