इस तारीख को दिखेगा 21 वीं सदी का सबसे लंबा आंशिक चंद्रग्रहण, 580 साल बाद ऐसा मौका

    नई दिल्ली: अंतरिक्ष में कई सारी घटनाएं होती है। उनमें से कुछ घटनाएं बहुत दुर्लभ होती है। जो बहुत कम दिखाई देती है। जी हां ऐसा ही कुछ मंजर 18-19 नवंबर को दिखाई देगा। आपको बता दें कि 21 वीं सदी का सबसे लंबा आंशिक चंद्रग्रहण (Longest Partial Lunar Eclipse) 18-19 नवंबर को दिखाई देने वाला है। आईये जानते है इससे जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारी…..   

    अमेरिका के 50 राज्यों में दिखेगा 

    इस बारे में वैज्ञानिकों को का यह कहना है कि 21 वीं सदी में दिखने वाला ये आंशिक चंद्रग्रहण अमेरिका के 50 राज्यों में दिखाई देने वाला है। आपको बता दें कि इतना लंबा चंद्रग्रहण 580 सालों के बाद हो रहा है। इसलिए दुनियाभर के वैज्ञानिक इस नजारे को अपने कैमरे में दर्ज करने के लिए तैयार बैठे हैं। आपको बता दें कि यह आंशिक चंद्र ग्रहण 3 घंटे 28 मिनट और 23 सेकंड लंबा होगा। जिसे देखने के लिए दुनिया के सारे वैज्ञानिक उत्साहित है। 

    द माइक्रो बीवर मून

    अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा (NASA) के अनुसार यह 580 साल के बाद इतना लंबा चंद्र ग्रहण हो रहा है। लेकिन जिस समय अमेरिका में लोग चंद्र ग्रहण देख रहे होंगे, उस समय भारत के लोग दिन में अपना काम कर रहे होंगे। आपको बता दें की इतना लंबा रहने वाले इस चंद्रग्रहण को  ‘द माइक्रो बीवर मून’ (The Micro Beaver Moon) कहते है।  रखने के पिच यह वजह है क्यों की यह धरती से अधिकतम दूरी पर रहता है। इसी समय में अमेरिका में ऊदबिलावों यानी बीवर को पकड़ा जाता है। इसलिए इसका नाम कुछ इस तरह से रखा गया है। 

    क्या है आंशिक चंद्रग्रहण 

    दरअसल इंडियाना के बटलर यूनिवर्सिटी स्थित होलकॉम्ब ऑब्जरवेटरी के मुताबिक आंशिक चंद्रग्रहण (Partial Lunar Eclipse) का मतलब होता है कि जब धरती की परछाई चांद के सिर्फ 97 फीसदी हिस्से को कवर करे। बता दें कि यह इस सदी का सबसे लंबा आंशिक चंद्रग्रहण होगा। इससे पहले साल 2018 में एक घंटे और 43 मिनट का चंद्रग्रहण लगा था। जबकि, इस बार होने वाला चंद्रग्रहण 3 घंटे 28 मिनट और 23 सेकंड लंबा होगा। ऐसी घटना 580 साल के बाद देखने को मिल रही है।

     ऐसे होता है चंद्रग्रहण 

    चंद्रग्रहण होने के पीछे अंतरिक्ष में कुछ घटनाएं होती है जिसकी वजह से चंद्रग्रहण होता है। चंद्रग्रहण तब होता है जब सूरज और चांद के बीच धरती आ जाती है। धरती की परछाई की वजह से चांद की रोशनी जमीन पर नहीं दिखती। धरती की परछाई पूरे चांद को भी कवर कर सकती है या फिर आंशिक रूप से कवर करती है।

    जिससे कई बार चांद लाल रंग का भी दिखाई देता है। ऐसा इसलिए होता है क्योंकि सूरज की रोशनी धरती की परछाई के गहरे हिस्से से सीधे नहीं टकराती। वह मुड़कर हमारे वायुमंडल से होकर गुजरती है। जैसे ही लाल और नारंगी वेवलेंथ धरती के वायुमंडल से गुजरता है तो वह महोगनी लाल रंग पैदा करता है, जिससे चांद लाल दिखाई देता है। 

    इन जगहों पर दिखेगा आंशिक चंद्रग्रहण 

    आपको बता दें की ये आंशिक चंद्रग्रहण हमारे देश में नहीं दिखने वाला है। इस चंद्र ग्रहण को उत्तरी अमेरिका, प्रशांत महासागर के द्वीप और देश, अलास्का, पश्चिमी यूरोप, पूर्वी ऑस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड और जापान के लोग देख पाएंगे। इस चंद्रग्रहण का शुरुआती हिस्सा यानी चांद के उगने के समय थोड़ा सा नजारा पूर्वी एशिया, ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड में भी दिखाई देगा। वहीं, दक्षिण अमेरिका और पश्चिमी यूरोप के लोग चंद्रग्रहण का उच्चतम स्तर देख सकेंगे।