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शुरू में प्रतिदिन 4 हजार लोगों को भोजन दिया जाता था अब लंगर सेवा का रोजाना 15 हजार लोग लाभ ले रहे हैं

उल्हासनगर. प्राकृतिक आपदा के दौरान बाढ़ की त्रासदी हो या प्लेग का दौर, सार्वजनिक धार्मिक पर्व हो या फिर आपातकाल. संकट के हर मौके पर अपनी कसौटी पर खरा उतरा है स्थानीय हीरा घाट स्थित धन गुरु नानक डेरा संत बाबा थाहिरिया सिंह साहिब दरबार. दुनिया के सबसे बड़े संकट अर्थात कोरोना महामारी के मौके पर भी दरबार द्वारा लंगर की सेवा निरंतर शुरू है. कोरोना के कारण 20 मार्च 2020 से सेवा शुरू हुई 29 जुन को 100 दिन पूरे हुए हैं जो अपने आप में एक रिकॉर्ड है.

धन गुरु नानक डेरा संत बाबा थाहिरिया सिंह साहिब दरबार देश के अनेक प्रांतों में है इसी में उल्हासनगर का समावेश है जो मुख्य दरबार है. यह  दरबार जो शहर में हमेशा से हर आपदा के दौरान जनसेवा के लिए तैयार रहता है. कोरोना के कारण शुरू हुए लॉक डाउन में गरीबों को भोजन की काफी दिक्कत आ रही थी, लोग भूखे न रहे इसलिए दरबार के माध्यम से 20 मार्च से लंगर की सेवा शुरू की थी 29 जून को लंगर की विशेष सेवा को 100 दिन पूरे हुए हैं. इस सेवा को दरबार वाहे गुरु की कृपा बता रहें है. 

 उक्त दरबार के भाई साहब त्रिलोचन सिंह साहिब ने बताया कि संत भाई मेहरबान सिंह साहिब के आशीर्वाद व दरबार के मुख्य भाई साहिब जसकीरत सिंह साहिब के मार्गदर्शन से दरबार में सभी धार्मिक विधियां होती है व जब जब कोई संकट की घड़ी आती है तो दरबार प्रबंधन अपने सेवाधारियों के सहयोग से लोगों को मदद करता है जो वाहे गुरु की मर्जी होती है. 

इसके अलावा शहर में मानसून के दौरान जर्जर इमारतों का गिरने की दुखद घटना हो या फिर किसी बिल्डिंग के चटकने, स्लैब गिरने से बेघर हुए लोगों को खाना खिलाने का पुनीत कार्य, इस काम में दरबार हमेशा ही अग्रसर रहा है. उल्हासनगर ही नहीं आसपास परिसर के शहरों में भी दरबार द्वारा लंगर की सेवा हर प्रभावित कोने में पहुंचाई गई थी ठीक उसी तरह इस कोरोना महामारी में भी बेघर, दिहाड़ी मजदूर व गरीब जनता को खाना पहुंचाने का कार्य दरबार द्वारा निस्वार्थ भाव से किया जा रहा है. लाकडाऊन के पहले दिन 4 हजार पार्सल से शुरू हुई सेवा तकरीबन 10 से 15 हज़ार लोगों तक पहुंची, यह सेवा 24 घंटे निरंतर जारी रही.

घर घर से 3000 रोटियां बनाकर हर रोज़ लोगों में बांटी जा रही थी. सेवा को और विस्तृत करते हुए गरीब मजदूरों की भूख मिटाने के लिए दरबार ने रोटी बनाने की मशीन लगाई गयी थी. जिसमें 2 घण्टे में 1200 रोटी बनाने की क्षमता रही, अब जिससे रोज़ 10,000 गरीबो को अब खाने में चावल भाजी के साथ पौष्टिक रोटी भी प्रसाद के  रूप में दी गयी थी. 

इस दरबार से पुलिस विभाग के साथ साथ मनपा प्रशासन, सरकारी अधिकारी, नेता, नगरसेवक, सामाजिक कार्यकर्ता व एनजीओ को भी पार्सल पहुंचाए जा रहे थे, दरबार द्वारा सेवाधिकारियों से सामाजिक दूरी के पालन का उचित रूप से ख्याल आज भी रखा जा रहा है. साथ ही खाना पार्सल के दौरान भी वितरण की उचित व्यवस्था की गई है. उल्हासनगर,  म्हारल,  वरप, कांबा, अंबरनाथ आदि जगहों पर दरबार की तरफ से भोजन लंगर पहुंचाने के लिए करीबन 35 सेंटर और स्वयंसेवी संस्थाओं द्वारा हररोज़ 10,000 लोगों को चावल सब्ज़ी और अब पौष्टिक रोटियां भी प्रसाद के रूप में देने की सेवा व्यवस्था कोरोना काल मे पिछले 3 महीनो से जारी है.