Bank workers on two-day strike, protesting against form distributed in Thane

    ठाणे. केंद्र सरकार (Central Government) द्वारा सरकारी बैंकों (Public Banks) का निजीकरण (Privatization) को लेकर लिए गए निर्णय के खिलाफ सोमवार को देश के सभी सरकारी बैंकों के अधिकारियों और कर्मचारियों ने आपत्ति जताते हुए सोमवार से दो दिवसीय हड़ताल (Strike) पर चले गए हैं। इसी तरह ठाणे जिले (Thane District) में भी हड़ताल के चलते सभी सरकारी बैंकों में ताला लगे थे। इतना ही नहीं कर्मचारियों ने युनायटेड फोरम ऑफ युनियन के प्रदेश महासचिव निलेश पवार के नेतृत्व में ठाणे स्टेशन परिसर में मूक प्रदर्शन किया गया। इसके साथ ही हड़ताली बैंककर्मियों ने अपनी भूमिका को लेकर पर्चा भी बांटे।  

    उल्लेखनीय है कि केंद्र सरकार ने देश के सभी सरकारी बैंकों का निजीकरण किए जाने का निर्णय लिया है। सरकार के इस निर्णय का विरोध करने के लिए सभी बैंककर्मियों ने सोमवार से दो दिवसीय हड़ताल शुरु कर दिया है। इसमें ठाणे जिले में स्थित सभी सरकारी बैंक भी हड़ताल में शामिल हुई हैं। यह हड़ताल ऑल इंडिया बैंक एम्प्लॉइज एसोसिएशन, नेशनल कांफेडरेशन ऑफ बैंक एम्प्लॉइज, ऑल इंडिया बैंक ऑफिसर्स कांफेडरेशन, ऑल इंडिया बैंक ऑफिसर्स एसोसिएशन, इंडियन नेशनल बैंक ऑफिसर्स कांग्रेस, इंडियन नेशनल बैंक एम्प्लॉइज फेडरेशन, नेशनल ऑर्गनायजेशन ऑफ बैंक वर्कर्स, नेशनल ऑर्गनायजेशन ऑफ बैंक ऑफिसर्स और बैंक एम्प्लॉइज फेडरेशन ऑफ इंडिया आदि संगठन शामिल हैं। 

    किया गया मूक प्रदर्शन

    सोमवार की सुबह साढ़े दस बजे के आस-पास निलेश पवार के नेतृत्व और स्टाफ युनियन के सह सचिव दिलीप चव्हाण, ऑफिसर्स एसोसिएशन के उपाध्यक्षा अरुणा अग्निहोत्री, विक्रम खराडे, सुबोध गायकवाड, प्रशांत देवस्थली की उपस्थिति में मूक प्रदर्शन किया गया। इस दौरान बैंक कर्मचारियों ने अपनी मांगों वाला एक पत्रक नागरिकों में बांट भूमिका को स्पष्ट किया। पत्रकारों से बातचीत करते हुए निलेश पवार ने कहा कि यह आंदोलन युनायटेड फोरम ऑफ बैंकिंग यूनियन के माध्यम से किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि इस हड़ताल में देश के करीब दस लाख बैंककर्मी शामिल हुए हैं।

     निजी बैंकों में भारी भ्रष्टाचार हो रहे हैं

     पवार ने कहा कि देश की अर्थमंत्री निर्मला सीरातरण ने केंद्रीय बजटीय अधिवेशन में यह स्पष्ट कर दिया है कि देश के सभी सरकारी बैंकों और बीमा कंपनी का निजीकरण किया जाएगा। इसके खिलाफ यह हड़ताल किया जा रहा है। पवार ने आरोप लगाते हुए कहा कि आज जनता के निवेश से तैयार हुए राष्ट्रीय संपत्तियों का निजीकरण करने की नीति जाहिर की गई है। उन्होंने कहा कि निजी बैंकों में भारी भ्रष्टाचार हो रहे हैं। इसका सबसे बड़ा उदाहरण पीएमसी बैंक है। वहीं सरकारी बैंकों में घोटाले तो नहीं होते हैं, लेकिन जिन्होंने सरकारी बैंकों के कर्ज को वापस करने में आनाकानी की है, सरकार द्वारा उन्हीं को बैंक बेचने की नीति लाया गया है। इसके खिलाफ हमने लड़ाई शुरू कर दी है। उन्होंने यह भी कहा कि सरकारी बैंकों को पूरी छूट मिलती है तो वह भी देश की अर्थ व्यवस्था को सुधारने में अच्छे से काम कर सकती है।