Bulk pulses became cheaper despite the decrease in arrivals

    राजीत यादव

    नवी मुंबई. वाशी (Vashi) स्थित एपीएमसी (APMC) में सब्जियों की तरह ही अब दाल (Pulse) भी सस्ती हो गई है। मौजूदा समय में यहां की अनाज मंडी में लगभग 100 टन विभिन्न प्रकार की दाल की आवक हर दिन हो रही है। जो साल 2019 की तुलना में लगभग 85 प्रतिशत कम है। इसके बावजूद थोक में इसकी कीमत में 5 से 10 प्रतिशत की गिरावट आई है। जिससे आम आदमी काफी राहत महसूस कर रहा है।

    वाशी स्थित एपीएमसी की अनाज मंडी में गेहूं, चावल और दाल का थोक में कारोबार कर रहे एक व्यापारी के अनुसार मौजूदा समय में विदेशों से दाल का आयात नहीं हो रहा है। मंडी में देश के विभिन्न हिस्सों से हर दिन लगभग 10 गाड़ी दाल की आवक हो रही है। लॉकडाउन के चलते थोक में दाल की बिक्री में 50 से 60 प्रतिशत की कमी आई है। जिसकी वजह से कम आवक के बावजूद थोक में दाल की कीमतों में गिरावट आई है।आनेवाले समय में इसकी कीमत में और गिरावट आने की संभावना है।

    दाल के लिए अब नहीं भरना पड़ता है सेस

    गौरतलब है कि दाल को साल 2014 से एपीएमसी के नियमों से मुक्त कर दिया गया है। दाल की कीमत इसे बेचने वाले किसानों और खरीदने वाले व्यापारियों के द्वारा तय की जा रही है। वहीं आम लोगों को सस्ते दाम में दाल उपलब्ध हो इसके लिए केंद्र सरकार ने दाल को सेस से मुक्त कर दिया है। जिसके चलते दाल की खरीदी व बिक्री करने वाले व्यापारियों को अब दाल के लिए सेस नहीं भरना पड़ रहा है। सेस मुक्त होने का असर भी दाल की कीमतों पर पड़ा है। जिसके चलते विगत लगभग 5 साल से थोक में इसकी कीमत 80 से 100 रुपए किलो के आसपास रही है।

    कारोबार पर कोरोना का दुष्परिणाम

    वाशी स्थित एपीएमसी की अनाज मंडी में दाल का थोक में कारोबार कर रहे व्यापारियों के अनुसार, दाल के कारोबार पर भी कोरोना की काली छाया पड़ी है। जिसकी वजह से दाल का कारोबार मंद गति से चल रहा है। व्यापारियों का कहना है कि कोरोना के संक्रमण की रोकथाम के लिए सरकार के द्वारा लॉकडाउन शुरू किया गया है। जिसके चलते जहां अधिकांश होटले बंद हैं। वहीं विवाह व अन्य बड़े समारोह नहीं हो रहे हैं। जिसकी वजह से दाल की खपत कम हो गई है। मौजूदा समय में लोग अपनी जरूरत के अनुसार ही दाल खरीद रहे हैं। पहले लोग मानसून के आगमन को देखते हुए अधिक मात्रा में दाल खरीदकर अपने घरों में रखते थे, लेकिन विगत वर्ष से इस तरह के ग्राहकों की संख्या में भारी कमी आई है।