Divyang rights activist Armaan Ali will represent India at the American event

  • मांग पूरी न होने पर 2 नवंबर को आंदोलन करने का अल्टीमेटम

उल्हासनगर. मनपा क्षेत्र में रहने वाले गरीब तबके के दिव्यांगों को मनपा द्वारा दिवाली से पहले अनुदान वितरित किए जाने की मांग दिव्यांगों के बीच काम करने वाली संस्थाओं ने की है. जल्द मांग पूरी न होने पर दिव्यांगों की संस्थाओं ने मनपा के खिलाफ आंदोलन की भी चेतावनी दी है.

उल्हासनगर मनपा क्षेत्र में लगभग 1200 विकलांग व्यक्ति रहते हैं. महाराष्ट्र सरकार के सरकारी नियम 2018 के अनुसार, मनपा के कुल बजट निधि का 5 प्रतिशत राशि स्थानीय निकायों द्वारा विकलांग व्यक्तियों के बीच खर्च करने का नियम है. उल्हासनगर द्वारा इस नियम का पालन किया जाता है. प्रति वर्ष लगभग 1200 व्यक्तियों को सालाना प्रति व्यक्ति 12,000 रुपए का अनुदान दिया जाता है. हालांकि इस वर्ष फॉलो-अप के बावजूद, अनुदान अभी तक वितरित नहीं किया गया है. दिव्यांगों की मांग है कि देश के सबसे बड़े त्यौहार दिवाली से पहले अनुदान हर हाल में वितरित किया जाना चाहिए.

दिव्यांग संघर्ष समिति उल्हासनगर के अध्यक्ष 

सचिन सावंत ने स्थानीय पत्रकारों को बताया कि उक्त मांग के अलावा मनपा मुख्यालय में विकलांगों के लिए तीन पहिया साइकिल और स्कूटरों की पार्किंग की व्यवस्था की जानी चाहिए. इसी तरह मनपा प्रशासन को दिए पत्र में अनुदान, पार्किंग की व्यवस्था के अलावा मनपा आने वाले दिव्यांगों को सहायता के लिए मनपा द्वारा कर्मचारी की नियुक्ति करने व 3 दिसंबर को विश्व दिव्यांग दिन को मनपा द्वारा भी मनाए जाने और महानगरपालिका क्षेत्र में मनपा के प्रत्येक सार्वजनिक शौचालय में रैंप प्रदान किए जाने की मांग की गई है 

इस मांग को लेकर मनपा प्रशासन का कहना है कि विकलांगों को मनपा द्वारा नियमानुसार मदद की जाती है. इस वर्ष कोरोना संकट के कारण मनपा का संपत्ति कर की वसूली बहुत ही कम हुई है. कोरोना के 3 करोड़ रुपए के बिल बकाया है. सरकारी अनुदान भी मनपा को प्राप्त नहीं हुआ है. जिसने मनपा के कर्मचारियों और अधिकारियों के वेतन के लिए भी समस्या पैदा कर दी है. इसलिए दिव्यांगों को अनुदान मिलने में देरी हो रही है.