Parrot freed from cage closed for 10 months

    नवी मुंबई. पिछले साल अक्टूबर में नेरुल (Nerul) के एक स्कूल परिसर से वन विभाग (Forest Department) द्वारा जब्त किए गए तोतों (Parrots) को सफलतापूर्वक आजाद करा दिया गया। वन विभाग ने यह कार्रवाई सामाजिक कार्यकर्ता एडवोकेट सिद्ध विद्या की शिकायत पर की, जिन्होंने इसकी बाकायदा से शिकायत की थी।  उन्होंने पिछले साल नेरुल में दिल्ली पब्लिक स्कूल (Delhi Public School) के स्कूल परिसर के अंदर कुछ पिंजरे तोते देखे थे जिन्हें मुक्त कराने के लिए उन्हें लम्बी लड़ाई लडनी पड़ी। वन विभाग के अधिकारियों ने मामले पर संज्ञान लेते हुए तीनों पिंजरे जब्त कर लिया इस मामले में स्कूल के केयरटेकर पर भी मामला दर्ज किया है।

    रेंज फॉरेस्ट ऑफिसर एन मुथे की अगुवाई में रेस्क्यू ऑपरेशन चलाया गया और उनके मार्गदर्शन में पिंजरे में बंद तोतों को एक एवियन ट्रेनिंग सेंटर ले जाया गया जहां विशेषज्ञों ने इस बात की जांच की कि क्या छुडाये गए पक्षी खुले आसमान में उड़ने के काबिल हैं या नहीं।

    खुले आसमान में छोड़ दिया गया

    सिद्धविद्या ने बताया कि तीन तोतों को आठ महीने तक प्रशिक्षण केंद्र में रखने के बाद उन्हें आसमान में उड़ सकने के लिए फिट घोषित कर दिया गया और कल उन्हें सीवुड्स इलाके में खुले आसमान में छोड़ दिया गया। गौरतलब है कि भारतीय तोते वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 के तहत संरक्षित वन्यजीव प्रजातियां हैं, इसलिए तोते को पालतू जानवरों के रूप में पिंजरों के अंदर रखना कानूनन अवैध है।

    तोते के अवैध खरीद फरोख्त और पालने आदि पर प्रतिबंध है और इसका उल्लंघन करने पर 3 साल तक का कारावास और या 25000 का जुर्माना हो सकता है। बहुत सारे लोग तोते को पिंजरे में रखते हैं और इस तरह वह जाने अनजाने में वन्य जीवन के अंतर्गत अपराधी बन जाते हैं। तोते को पालने की बहुत पुरानी परंपरा है और इसलिए बहुत सारे लोग इस बात की जानकारी नहीं रखते कि तोते को पिंजरे में रखने से उनके ऊपर कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

    -एड. सिद्धविद्या, सामाजिक कार्यकर्ता