कोरोना पर कंट्रोल करने में ठाणे मनपा फेल

– समय पर नहीं मिला रहा इलाज

– डाक्टरों पर अधिक काम का तनाव

ठाणे. ठाणे में कोरोना संक्रमण को देखते हुए मनपा की तरफ से एक कंट्रोल रूम तैयार किया गया है. इसके आलावा एक एप भी शुरू किया गया है, लेकिन इसके बावजूद शहर के कोरोना संक्रमित मरीजों को समय पर इलाज उपलब्ध होता नजर नहीं आ रहा है. 

बताया जा रहा है कि यदि कोई मरीज संबंधित विभाग के पास अथवा कंट्रोल रूम पर संपर्क करता है, तो उसे समय पर कोई जानकारी ही उपलब्ध नहीं हो पा रही है. ऐसे में अब सवाल उठा रहा है कि आखिर कब तक कोरोना संक्रमितों को समय पर इलाज मिल पाएगा. वहीं बताया जा रहा है की डाॅक्टरों पर काम का तनाव अधिक होने के कारण वे मरीजों का सहयोग करने में असफल साबित हो रहे हैं.  

 मरीजों का आकड़ा 6 हजार के पार 

ठाणे में कोरोना संक्रमित मरीजों का आकड़ा 6 हजार पार कर चुका है, जबकि करीब 225 मरीजों की इस बीमारी से मौत हो चुकी है. इतना ही नहीं पिछले 15 दिनों में पाए गए मरीजों की संख्या देखी जाए तो औसतन प्रतिदिन 150 नए मरीज मिल रहे हैं. ऐसे में इन मरीजों को अस्पताल में भर्ती होने में समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है. आलम यह है कि शहर में मरीजों को एंबुलेंस के लिए भी घंटों इंतजार का पड़ता है.

3 घंटे एंबुलेंस का इंतजार

रविवार को इसी प्रकार की एक घटना सामने आई है. एक मरीज को घंटों एंबुलेंस के लिए कई जगहों पर फोन लगाना पड़ा और तब कहीं जाकर 3 घंटे के लंबे इन्तजार के बाद एंबुलेंस मिली, जबकि मनपा प्रशासन द्वारा दावा किया जा रहा है कि शहर में कुल 100 एंबुलेंस की व्यवस्था की गई है, लेकिन प्रतिदिन बड़ी संख्या में मिल रहे नए मरीजों के कारण अब यह व्यवस्था भी चरमराती नजर आ रही है.

टीएमटी बसों के एंबुलेंस में विशेषज्ञ की कमी

मनपा प्रशासन एंबुलेंस की कमी को ध्यान में रखते हुए टीएमटी की 30 बसों को एंबुलेंस में परिवर्तित किया गया है, लेकिन इसमें विशेषज्ञ अभी तक मनपा के पास से उपलब्ध नहीं कराया गया है और बस के ड्राइवरों को यह काम करना पड़ रहा है. साथ ही इन बसों के एंबुलेंस में न वेंटिलेटर की व्यवस्था है और न कॉल करने पर तत्काल उपलब्ध ही हो पा रहा है. जिसके कारण मरीजों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है.

कोविड कंट्रोल रूम फेल

वहीं मनपा प्रशासन की तरफ से मनपा मुख्यालय में स्थित आपदा प्रबंधन विभाग में कोविड मरीजों के लिए भी एक कंट्रोल रूम बनाया गया है. इस कंट्रोल रूम में तीन शिफ्ट में एक-एक डॉक्टर की नियुक्ति की गई है, लेकिन इन डाॅक्टरों पर काम का बोझ और तनाव अधिक होने के कारण वे फोन का जवाब भी सही तरीके से नहीं दे रहे है. बताया जा रहा है कि कंट्रोल रूम के कारण भी शहर के मरीजों और उनके परिजनों को करीब 5 से 6 घंटे अनायास ही परेशान होना पड़ रहा है.