प्रशासन ने नहीं सुनी मांग, तो महिलाओं ने किया श्रमदान

बदलापुर. सभी तरह के कानूनी रास्ते व महकमे से बार-बार अनुरोध करने के बाद भी जब न्याय नहीं मिलता है, तो लोग सड़कों पर उतर आते हैं और विरोध करते हैं। लेकिन मुरबाड़ तालुका के नांदेणी गांव की महिलाओं ने इससे हटकर अपनी मांगों की ओर प्रशासन का ध्यान आकर्षित करने के लिए गांव की सड़क पर साफ सफाई कर अपना विरोध दर्शाया है।

500 मीटर सड़क के लिए तरस रहे लोग

पिछले दो दशकों से बार-बार संबंधित विभाग से पत्र व्यवहार करने के बावजूद नांदेणी गांव केवल 500 मीटर के लिए मुख्य सड़क से नहीं जुड़ पा रहा है। इसलिए ग्रामीणों को वैकल्पिक मार्ग से आने-जाने के लिए दस किलोमीटर का चक्कर लगाना पड़ता है। देप ग्राम पंचायत के अधीन आने वाले नांदेणी गांव की आबादी लगभग 550 है और पांच साल की उम्र से मासूमों को आगे की शिक्षा के लिए पड़ोसी किशोर और आसेले गांवों के स्कूलों में जाना पड़ता है। चूंकि सड़क नहीं है, इसलिए उन्हें स्कूल पहुंचने के लिए खेत और खेत की मेंडों से गुजरना पड़ता है।

बरसात में स्थिति काफी भयानक हो जाती है। खेत दलदल व मेंडे कीचड़ का रूप ले लेती हैं। बरसात के मौसम में घुटने तक पानी होता है। लेकिन इन बच्चों को स्कूल पहुंचने के लिए इस खतरनाक रास्ते से जाना पड़ता है। 20 वर्षों से इस सड़क पर काम बाधित है। लेकिन प्रशासन इस समस्या के समाधान के लिए कोई उपाय नहीं खोज पाया है।

गूंज एनजीओ ने की सड़क के लिए की पहल  

सामाजिक संगठन गूंज जो देश भर में सार्वजनिक भागीदारी के माध्यम से विभिन्न परियोजनाओं को लागू कर रहा है, इस संगठन के पास जब नांदेणी गांव की बात पहुंची तो उन्होंने गांव आकर गांव की इस समस्या पर ध्यान दिया है।  ग्रामीणों की दुर्दशा को देखते हुए, उन्होंने स्थानीय लोगों से कड़ी मेहनत करने की अपील की। अपील के कारण सोमवार की सुबह, गांव की 85 महिलाए झाड़ू और फावड़े लेकर घर से निकलीं। रास्ते के पत्थरों को किनारे किया, घास काटी, जहां कीचड़ हटाया और मिट्टी की भराई कर जगह को समतल बनाया। गूंज एनजीओ ने इस कार्य के लिए गांव की श्रमदान करने वाली महिलाओं को राशन तथा अन्य जरूरी सामान प्रदान की।