The countdown is underway, the charging station project

    ठाणे. ठाणे महानगरपालिका (Thane Municipal Corporation) द्वारा संचालित शहर में इलेक्ट्रिक वाहनों (Electric Vehicles) के लिए चार्जिंग स्टेशन (Charging Stations) शुरू तैयार करने का अभियान दो साल पहले शुरू हुआ था, लेकिन तत्कालीन आयुक्त संजीव जायसवाल (Commissioner Sanjeev Jaiswal) का यह महत्वाकांक्षी (Ambitious) प्रोजेक्ट भी अंतिम सांसे गिनता नजर आ रहा है। चौंकाने वाली बात यह है कि दो साल बाद भी महानगरपालिका के शहर विकास विभाग और संबंधित अन्य विभाग 100 में से एक भी जगह नहीं खोज सकी है। इसलिए संकेत मिल रहे हैं कि इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा देने का महानगरपालिका  का सपना चकनाचूर हो गया है।

    साल 2030 तक देश भर में इलेक्ट्रिक वाहन शुरू करने की केंद्र सरकार की नीति के तहत तत्कालीन ठाणे महानगरपालिका  आयुक्त संजीव जायसवाल ने शहर में ऐसे वाहनों के लिए चार्जिंग स्टेशन स्थापित करने का निर्णय लिया था। इस निर्णय के अनुसार महानगरपालिका  की खर्च से शहर में 100 चार्जिंग स्टेशन स्थापित किए जाने थे। हालांकि, महिंद्रा और कायनेटिक ग्रीन ने स्टेशन की स्थापना की लागत वहन करने पर सहमति व्यक्त की थी। इसलिए प्रशासन ने महानगरपालिका के फंड से चार्जिंग स्टेशन स्थापित करने के प्रस्ताव को खारिज कर दिया और प्रशासन ने संबंधित कंपनियों को चार्जिंग स्टेशनों के निर्माण के लिए केवल जगह उपलब्ध कराने का फैसला किया। इसके अलावा महानगरपालिका को संबंधित कंपनियों के माध्यम से शहर में इलेक्ट्रिक वाहन उपलब्ध कराना था और इसके लिए ऋण प्रदान करने वाले वित्तीय संस्थानों के साथ समन्वय करना था। एमओयू पर नवंबर 2018 में तत्कालीन अतिरिक्त आयुक्त राजेंद्र अहिवर और संबंधित कंपनियों के प्रतिनिधियों ने जायसवाल की उपस्थिति में हस्ताक्षर किए थे।

    महानगरपालिका ने यह भी दावा किया था कि इस परियोजना को जनवरी 2019 तक लागू किया जाएगा। इसी के तहत शहर के विभिन्न हिस्सों में चार्जिंग स्टेशन स्थापित करने के लिए खोजबीन अभियान चलाया गया। फिलहाल वर्तमान समय में शहर के पेट्रोल पंपों और सीएनजी स्टेशनों पर वाहनों की लंबी कतारें लगी हुई हैं, जिससे जाम की स्थिति बनी हुई है। हालांकि चार्जिंग स्टेशन लगाते समय इस बात का ध्यान रखा जाएगा। सड़कों पर जाम से बचने के भी प्रयास किए जा रहे हैं। दूसरी तरफ अब पूरे ढाई साल बाद भी शहर विकास विभाग को एक भी प्लॉट नहीं मिल पाया है। बिजली विभाग भी बार-बार शहर विकास विभाग से ऐसे भूखंडों की तलाश करने को कह चुका है, लेकिन ढाई साल में 100 में से एक भी प्लॉट नहीं मिला है। ऐसे में अब संकेत मिल रहे हैं कि चार्जिंग स्टेशन के इस प्रोजेक्ट को भी बंद करने की संभावना व्यक्त  की जा रही है।