There is growing resentment among traders in Ambernath

    अंबरनाथ. कोरोना (Corona) की दूसरी लहर (Second wave)में मरीजों में हो रही वृद्धि के चलते और इस चेन को तोड़ने के लक्ष्य लिए सरकार द्वारा शुरू किए गए मिनी लॉकडाउन (Mini Lockdown) को लेकर शहर के व्यापरियों का गुस्सा कम होने का नाम नहीं ले रहा है। दुकानदारों का कहना है कि अचानक लॉकडाउन (Lockdown) न्याय संगत नहीं है। सरकार को निर्णय लागू करने से पहले व्यापारियों को भरोसे में लेना चाहिए था। गुरुवार की सुबह भी अंबरनाथ व्यापारी संघ (Ambernath Traders Association) के बैनर तले दुकानदारों ने काली पट्टी लगाकर मिनी लॉकडाउन का विरोध किया।

    मिनी लॉकडाउन के कारण शहर की मौजूदा स्थिति को देखकर पिछले साल की याद आ रही है, पिछले वर्ष मार्च महीने में ही यह स्थिति पैदा हुई थी। कोरोना के बढ़ते प्रादुर्भाव को देखते हुए 22 मार्च से पूरे देश में लॉकडाउन घोषित कर दिया गया और अचानक सबकुछ रुक गया। ठीक उसी तरह इस बार भी मंगलवार से शहर में अचानक लॉकडाउन जैसी स्थिति बन गई है।

    व्यापारियों और आम जनता में असंतोष

    नगरपालिका और पुलिस प्रशासन ने मंगलवार 6 अप्रैल की सुबह ही अचानक अत्यावश्यक सेवाओं को छोड़कर शहर की सभी दुकानों को बंद करा कर मिनी लॉकडाउन शुरू किया। पिछली बार कुछ सामाजिक, राजनीतिक संघटनों और कुछ लोगों ने व्यक्तिगत रूप से जरूरतमंद लोगों की मदद की, लेकिन इस बार उसकी भी उम्मीद नहीं है। कोरोना के दूसरे दौर ने एक बार फिर से महाराष्ट्र में भूचाल मचा दिया है, इसलिए सरकार के लिए एक बार फिर से लॉकडाउन लागू करने की नौबत आ गई है, लेकिन अचानक किए गए मिनी लॉकडाउन से व्यापारियों और आम जनता में असंतोष फैला हुआ है।

    काली पट्टी बांधकर जताया विरोध

    गुरुवार को तीसरे दिन भी दुकानदारों ने अपना विरोध जारी रखा है। अंबरनाथ व्यापारी संघ के अध्यक्ष खानजी धल, उपाध्यक्ष यूसुफ शेख, धीरेन गाला, दामोदर बदलानी, मयूर विसारिया, स्टेशन परिसर व्यापारी संघ के अध्यक्ष प्रवीण शर्मा आदि के नेतृत्व में स्टेशन परिसर में काली पट्टी लगाकर मिनी लॉकडाउन का विरोध किया।