Varala Devi pond is in the grip of contaminated water and garbage, the request of public representatives is also being ignored by the municipal administration

    भिवंडी. शहर के लाखों नागरिकों की प्यास बुझाने वाले शहर के एकमेव वराला देवी तालाब (Varala Devi Pond) में आसपास के क्षेत्रों का गंदा पानी(Dirty Water), कचरा, गटर, नाले द्वारा पानी में डाला जा रहा है। शहर के जागरूक नागरिकों सहित जनप्रतिनिधियों (Public Representatives) की बारंबार शिकायत पर भी महानगरपालिका प्रशासन तालाब में जा रहे दूषित पानी और कचरा को रोकने हेतु कोई सार्थक कदम नहीं उठा रहा है। महानगरपालिका  प्रशासन (Municipal Administration) की लापरवाही से तालाब से पानी पी रहे लाखों नागरिकों के ऊपर गंभीर बीमारियों का भारी खतरा मंडरा रहा है। शहर के जागरूक नागरिकों ने महानगरपालिका कमिश्नर (Municipal Commissioner) डॉ. सुधाकर देशमुख (Dr. Sudhakar Deshmukh) से वराला देवी तालाब में डाले जा रहे गंदे पानी, कचरा फेंकने को रोकने हेतु अत्यावश्यक कदम उठाए जाने की मांग की है। 

    गौरतलब है कि कामतघर क्षेत्र स्थित करीब 3 किलोमीटर के दायरे में वराला देवी तालाब स्थित है। तालाब के स्वच्छ पानी से कामतघर क्षेत्र के आसपास स्थित रहिवासी क्षेत्रों में लोगों को पीने के लिए जलापूर्ति की जाती है। उक्त तालाब से 2 एमएलडी पानी की आपूर्ति नागरिकों को की जाती है। आश्चर्यजनक तथ्य है कि, विगत कई वर्षों से वराला देवी तालाब की बाउंड्री वाल टूट कर बिखर गई है।  जिससे तालाब और पानी की सुरक्षा को गंभीर खतरा पैदा हो गया है। तालाब के किनारे स्थित फेना पाड़ा, फेना गांव, भाग्यनगर, मानसरोवर, फुलेनगर आदि रहिवासी क्षेत्रों में घरों से नित्य निकलने वाला गंदा प्रदूषित पानी गटरों के माध्यम से तालाब के पानी में जा रहा है। तालाब की बाउंड्री वॉल टूट जाने से दिन भर क्षेत्रीय परिवारों के बच्चे तालाब के पानी में नहाते, कपड़ा और बर्तन सहित गाड़ियां धोते हुए देखे जाते हैं। 

    मनपा बरत रही भारी लापरवाही

    हैरतअंगेज है कि वराला देवी तालाब से शहर के लाखों नागरिकों को पानी आपूर्ति किए जाने के बावजूद तालाब में जा रहे दूषित पानी और कचरा को देखकर भी सब आंखें मूंदे हुए हैं। महानगरपालिका  प्रशासन द्वारा तालाब की सुरक्षा हेतु कोई सिक्योरिटी गार्ड की भी तैनाती नहीं किए जाने से वराला देवी तालाब लावारिस बना हुआ है। तालाब में प्रतिमाह 2-4 लोगों के शव भी पाए जाते हैं जिन्हें पुलिस आत्महत्या करार देकर रफा दफा कर देती है। तालाब की सुरक्षा न होने से पानी में हुई मौतों का खुलासा आज तक नहीं हो सका है। महानगरपालिका प्रशासन द्वारा तालाब की सुरक्षा हेतु कहीं भी सीसीटीवी कैमरा भी नहीं लगाया गया है। 

    गंदा पानी पीने की मजबूरी झेल रहे लाखों लोग

    आलम यह है कि लाखों नागरिकों को पीने का पानी मुहैया कराने वाला तालाब स्वच्छ पानी की जगह गंदे दूषित पानी और कचरा से भर रहा है। असंख्य नागरिक तालाब का दूषित पानी पीने की मजबूरी झेल रहे हैं और पेट सहित संक्रामक बीमारियों को बढ़ावा दे रहे हैं।  भाजपा वरिष्ठ नगरसेवक निलेश चौधरी, महानगरपालिका  स्थाई समिति सभापति संजय म्हात्रे, वरिष्ठ शिवसेना नगरसेवक मनोज काटेकर सहित तमाम जनप्रतिनिधियों द्वारा महानगरपालिका  प्रशासन से लाखों लोगों के स्वास्थ्य से जुड़े मुद्दे पर विशेष ध्यान दिए जाने की अपील की गई है।