रेडक्रॉस अस्पताल में सुविधाओं के लिए आमरण अनशन की चेतावनी

उल्हासनगर. उल्हासनगर में कोरोना पॉजिटिव मरीज़ों की संख्या 1200 पार कर चुकी है. संदिग्ध कोविड मरीज़ों को उपयुक्त इलाज  न मिलने की वजह से उनकी मृत्यु हो रही है. बार बार शिकायत करने के बाद भी स्थानीय रेड क्रॉस अस्पताल प्रबंधन अपनी कार्य पद्धति में बदलाव

नहीं ला रहा है, अगले 48 घंटों के भीतर यदि इस अस्पताल प्रबंधन ने मरीजो को आवश्यक सुविधाएं मुहैया नहीं कराई तो अस्पताल के सामने अनिश्चित कालीन अनशन पर बैठने की चेतावनी समाजसेवी शिवाजी रगड़े ने दी है. रेड क्रॉस अस्पताल प्रबंधन द्वारा मरीजों को लेकर जो लापरवाही बरती जा रही है उसको लेकर शिवाजी रगड़े ने  मनपा आयुक्त, महापौर, हेल्थ  अधिकारी सहित उल्हासनगर की पूर्व विधायक ज्योति पप्पू कालानी  को पत्र के माध्यम से विस्तृत  जानकारी दी है. रगड़े का कहना है कि उन्होंने कई बार अस्पताल के इंचार्ज से बात की लेकिन वह सुधार नहीं ला रहें जिस कारण नाहक ही मरीजों को दिक्कत व अपनी जान जोखिम में डालना पड़ रहा है.

इस संदर्भ में शिवाजी रगड़े ने बताया कि संदिग्ध कोरोना मरीज में लक्षण मिलने के बाद रिपोर्ट आनेतक रेडक्रॉस अस्पताल में एडमिट किया जाता है. रेडक्रॉस के इंचार्ज एम डी साइकोट्रिस्ट है, बाकी डॉक्टर ट्रेनी होने की जानकारी मिली है, यहां एडमिट होने वाले मरीज़ की प्रकृति गंभीर होने पर भी यहां सिर्फऑक्सीजन के अलावा कोई अत्यावश्यक सेवा नहीं है, इस वजह से टेस्ट करने के बाद रिपोर्ट आने के पहले ही संशयित कोविड मरीज़ की मौत हो जाती है, इस विषय पर बारबार ध्यान दिलाया गया कि संदिग्ध कोविड मरीज़ों को अत्यावश्यक उपचार सुविधा देना आवश्यक है परंतु प्रशासन ने हमेशा ही इस विषय को दुर्लक्षित किया है, मेरे सामने मैंने एडमिट किए हुए 4 मरीज़ की मौत हो चुकी है.