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    अंबरनाथ. कोरोना (Corona) के बढ़ते संक्रमण के कारण इस पर नियंत्रण पाने और इसकी चेन को तोड़ने के लक्ष्य को लेकर राज्य सरकार के दिशा-निर्देश पर स्थानीय नगरपालिका प्रशासन में मिनी लॉकडाउन (Mini Lockdown) के नाम से लॉकडाउन शुरू किया है। इससे स्थानीय इंडस्ट्रियल क्षेत्र स्थित निजी क्षेत्र की कंपनियों में ठेका पद्धति पर काम करने वाले मजदूर (Worker) तबके के लोगों ने धीरे-धीरे पलायन करना शुरू कर दिया है। 

    अंबरनाथ में केंद्र सरकार के रक्षा मंत्रालय द्वारा संचालित आयुध निर्माणी, मशीन टूल्स प्रोटोटाइप जैसी बड़ी कंपनियां है, इसके अलावा विविध 4 औघोगिक क्षेत्र में छोटी-बड़ी इस तरह एक हजार से भी अधिक देशी-विदेशी कंपनियां है। वहीं शहर में अनेक जगहों पर भवन निर्माण का भी कार्य शुरू है, जिसमें परप्रांतीय मजदूर बड़े पैमाने पर काम कर रहे हैं। साथ ही बेकरी, डेयरी, भंगार, ट्रांसपोर्ट, होटलों, मिठाई की दुकानों आदि में भी बड़े पैमाने पर परप्रांतीय मजदूर काम करते हैं। पिछले लॉकडाउन में सबसे पहले इसी तरह का काम करने वाले मजदूरों ने पलायन करना शुरू किया था जो बाद में एक बड़ा मुद्दा बनकर उभरा था।

    30 अप्रैल तक मिनी लॉकडाउन की घोषणा

    कोरोना के दूसरे चरण में सरकार द्वारा 30 अप्रैल तक मिनी लॉकडाउन की गई घोषणा और इसको सफल बनाने में स्थानिक स्वराज्य संस्था और पुलिस प्रशासन द्वारा बरती जा रही सख्ती से भी मजदूर वर्ग शहर छोड़ने पर मजबूर होता दिखाई दे रहा है। 

    एडिशनल अंबरनाथ औघोगिक क्षेत्र में ही 900 से भी अधिक छोटी-बड़ी कंपनियां है। इसके अलावा चिखलौली, मोरिवली, जूना भिंडी पाडा और वडोल गांव में सेंकडों कंपनी है। कई जगह नई कंपनियों का निर्माण कार्य भी शुरू है। लॉकडाउन के कारण रोजीना पर काम करने वाले मजदूर लॉकडाउन से डर गए है। वैसे हमारे सहयोगी उन्हें समझाने का प्रयास कर रहे है।

    -उमेश तायडे, अध्यक्ष, अतिरिक्त अंबरनाथ मेनुफेक्चर एसोसिएशन (आमा), अंबरनाथ

    टायर पंचर की दुकानों को अत्यावश्यक सेवा में लेना चाहिए। अग्निशमन दल की गाड़ियां, एम्बुलेंस, सरकारी महकमों सहित विविध आपात्कालीन सेवा में जुटे संबंधित महकमे के लोग 4 पहिया वाहन में चलते है। इन्हें सेवा उपलब्ध हो इसलिए नगरपालिका प्रशासन को टायर, पंचर की दुकान चलाने तथा छोटे गैरेज वालों को भी लॉकडाउन में दुकानें खोलने की छूट मिलनी चाहिए।

    -विजयन नायर, क्वालिटी टायर सर्विस सेंटर, अंबरनाथ

    पिछले लॉकडाउन से मजदूर वर्ग घबरा चुका है। कहीं यह मिनी लॉकडाउन लंबा न हो जाए इसको लेकर मजदूरों में बेचैनी है। पिछली बार मजदूरों को उनके गांव से बुलाने में काफी मश्क्कत का सामना करना पड़ा था। उनको टिकट के पैसे भेजे गए थे और अनेकों ने टिकट के साथ एडवांस भी लिया था।

    -प्रमोद आर. पांडेय, उघोगपति अंबरनाथ