Workers start going to village from Bhiwandi, know the reason

    भिवंडी. पावरलूम नगरी भिवंडी (Power Loom City ‍‍Bhiwandi) में वैश्विक महामारी कोरोना (Corona) की पुनः धीरे-धीरे हो रहे प्रसार से पावरलूम मजदूरों (Powerloom Workers) में स्वास्थ्य सुरक्षा को लेकर भय फैल रहा है। कोरोना महामारी शुरुआत में गत वर्ष हुए लॉकडाउन (Lockdown) के उपरांत मजदूरों को रोजगार बंदी, खानपान, स्वास्थ्य संबंधी एवं गांव पलायन में जो दर्दनाक तकलीफें झेलनी पड़ी उससे अभी तक उबर नहीं पाए हैं। 

    कोरोना की धमक से पावरलूम उद्योग से जुड़े मजदूर अगले माह होने वाले ग्राम पंचायत चुनाव (Gram Panchayat Election) में किसी न किसी संबंधी के खड़े होने की बात कहकर पावरलूम मालिकों से हिसाब मांग कर गांव जाने के लिए रेलवे टिकट (Railway Ticket) निकालने की जुगाड़ में जुटे हैं। कहना अतिशयोक्ति न होगा कि आगामी 15 दिनों में पावरलूम नगरी भिवंडी में मजदूरों का अकाल पड़ने से इंकार नहीं किया जा सकता है।

    लॉकडाउन में फंसे थे मजदूर

    गौरतलब हो कि वैश्विक महामारी कोरोना संक्रमण प्रसार की वजह से केंद्र सरकार द्वारा पिछले वर्ष समूचे देश में लॉकडाउन घोषित किया था जिसकी वजह से पावरलूम नगरी अचानक ठप्प हो गयी थी। पावरलूम उद्योग बंद होने से लाखों गरीब मजदूर जहां अकस्मात आई वैश्विक आपदा के कारण बेरोजगार हुए थे, वहीं दुकान सहित सभी उद्योग परक संस्थानों में कोरोना महामारी संसर्ग के डर से ताला लग गया था। पावरलूम नगरी में रोजगार बन्दी से लाखों मजदूरों के समक्ष लॉकडाउन संकट काल के दौरान भुखमरी की स्थिति पैदा हो गई थी। सरकार द्वारा कोरोना संक्रमण के सुरक्षा के लिए रेल सेवा भी  बंद कर दी गई थी जिससे लाखों मजदूर भिवंडी में ही फंसे रह गए थे। रोजगार बंद होने से आर्थिक रूप से संकटग्रस्त पावरलूम मजदूरों ने अप्रैल माह से एनकेन प्रकारेण मुलुक पलायन का रास्ता अख्तियार किया जो बेहद दर्दनाक साबित हुआ।

    पैदल, साइकिल से की यात्रा

    रेल सहित अन्य साधन बन्द होने से निराश भिवंडी से प्रतिदिन हजारों की संख्या में मजदूर परिजनों को साथ लेकर पैदल, साइकिल, टैम्पो, ट्रक आदि साधनों से उद्योग नगरी को छोड़कर मुलुक पलायन कर गए थे। बंद हुआ पावरलूम उद्योग अगस्त में अनलॉक घोषित होने के उपरांत रोजगार के लिए भिवंडी आना शुरू किया जो सिलसिला अभी धीमी गति से चालू है, लेकिन दुर्भाग्यवश कोरोना महामारी की पुनः धमक ने मजदूरों को फिर से पावरलूम नगरी छोड़ने पर विवश कर रहा है।

    लॉकडाउन दर्द की सोच से कांपता है कलेजा

    यूपी जिला बस्ती निवासी राम यादव, चंदर शर्मा, फुलऊ गौतम व बिहार मधुबनी निवासी रामपाल, एजाज कुरेशी, सलमान अंसारी, फूलकुमार पाल, अजगर हुसैन आदि मजदूरों ने आपबीती बताते हुए कहा कि अप्रैल 2020 में ट्रक से भूखे प्यासे भयंकर दुख भोगते हुए गांव गए थे। अनलॉक घोषित होने के बाद नवम्बर में फिर रोजी-रोटी कमाने आए थे, लेकिन महामारी फिर से शुरू होने से जान का डर सताने लगा है। अगर सरकार ने लॉकडाउन की घोषणा कर दिया तो फिर मुसीबत में फंस जाएंगे। भुखमरी से बचाव के लिए मुलुक जाना ठीक होगा। फैजाबाद, सुल्तानपुर, प्रतापगढ़, जौनपुर, बस्ती, बलिया, संत कबीर नगर, देवरिया आदि क्षेत्रों के कई पावरलूम मजदूरों ने कहा कि वैश्विक महामारी का खतरा तेजी से बढ़ रहा है। पिछले लॉकडाउन में भूखों सोए। कई दिनों पैदल चलकर चलकर गांव पहुंचे अब सोचकर ही कलेजा कांप जाता है।

    ग्राम पंचायत की धमक से गूंजा भिवंडी

    कई मजदूरों ने बताया कि आगामी अप्रैल माह में प्रधानी का इलेक्शन है। कई सगे सम्बन्धी, परिचित चुनाव में खड़े होंगे जो अभी से मदद के लिए प्रतिदिन फोन कर बुला रहे हैं। संभावित प्रधान प्रत्याशी आने-जाने का टिकट व पैसा भी दे रहे हैं। नागपुर की तर्ज पर लॉकडाउन घोषित होने के पूर्व ही परेशानी, भुखमरी से बचाव के लिए अभी सुरक्षित तरीके से गांव जाना ही ठीक होगा। मजदूरों के पावरलूम नगरी से पुनः पलायन की सोच से पावरलूम मालिकों के चेहरों पर पसीना झलकना शुरू हो गया है।