एशिया का सबसे स्वच्छ गांव भारत में, प्लास्टिक मुक्त यह गांव है बेहद सुंदर

    नई दिल्ली : दुनिया में कई ऐसे जगह है, जो अपने किसी खासियत को लेकर जाने जाते है।2014 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्वच्छ भारत अभियान की शुरुआत की थी। इस मिशन के माध्यम से प्रधानमंत्री ने देश को स्वच्छ बनाने के लिए एक मुहिम छेड़ी थी। इस मिशन का बहुत व्यापक असर देश में देखने को मिला। परंतु उस समय भी देश में एक ऐसी जगह थी, जहां इस मुहिम की कोई जरूरत ही नहीं थी, यह गांव पहले से स्वच्छता के मामले में एक मिसाल पेश करता है। इस गांव का नाम मौलिन्नोंग है और ये मेघालय की ईस्ट खासी हिल्स में स्थित है। तो आज जानते हैं इस गांव की खास बातें….

    प्लास्टिक मुक्त है गांव, नहीं होता इस्तेमाल

     

    जहां तक हम वर्तमान में जी रहे है हमें पता है। प्लास्टिक अब हमारे जिवन में क्या भूमिका रखता है। उस चीज को देखते हुए प्लास्टि को पूरी तरह से उपयोग के बाहर निकलना एक बहोत बडी चुनौती है। बता दें की एशिया में एक ऐसा गांव है, जहां प्लास्टिक बिलकुल भी नहीं इस्तेमाल किया जाता। इस खूबसूरत गांव में प्लास्टिक का इस्तेमाल नहीं किया जाता है। यहां बांस की बनी हुई डस्टबीन का प्रयोग किया जाता है। इस गांव में लोग सामान ले जाने के लिए कपड़ों से बने थैलों का प्रयोग करते हैं। यहां के बच्चे भी साफ-सफाई का विशेष ध्यान रखते हैं।

    साक्षरता दर 100% है 

    प्रतीकात्मक तस्वीर

    ऐसा कोई गावं नहीं जहां सब पढ़े लिखे हों, ऐसा हमें लगता है। लेकिन इस गांव के साक्षरता की बात करे तो यहां के सभी लोग शिक्षित हैं। ये एक आदर्श गांव है। यहां के लोग पेड़ों के लिए खाद बनाने के लिए कचरे को एक गड्ढे में डालकर रखते हैं। हर एक चीज का यह पुनरुपयोग करते है। रीसायकल की हुई चीजों को ये अपने दैनदिन जीवन नेब फिरसे इस्तेमाल करते है। 

    मां के सरनेम से जाने जाते है बच्चे 

    प्रतीकात्मक तस्वीर

    जैसा की हम सब जानते है, भारत पितृसत्ताक देश है। यहां के बच्चों को पिता के नाम से जानते है  और पिता का नाम ही बच्चों से जोड़ते है। पर हमारे ही देश में एक ऐसा गांव है जहां मां का सरनेम बच्चों को दिया जाता है। ये गांव महिला सशक्तिकरण की मिसाल भी पेश करता है। यहां पर बच्चों को मां का सरनेम मिलता है और पैतृक संपत्ति मां द्वारा घर की सबसे छोटी बेटी को दी जाती है।

    गांव को कहते है भगवान का बगीचा

    भगवान सेजुड़ी सभी बाते और चीजे बेहद ही पवित्र और स्वच्छ होती है। भगवान का बगीचा इस नाम सही हम अंदाजा लगा सकते है की इस गांव की खूबसूरती क्या होगी। इस गांव की खूबसूरती का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि इसे भगवान का बगीचा बोला जाता है। ये गांव कई सालों से स्वच्छता के लिए प्रसिद्ध है। 

    यहां है अनोखे ब्रिज 

    जहां तक हम सब जानते है  ब्रिज या तो सीमेंट से बनाये जाते है। लेकिन इस हगाव की और एक अनोखी बात यह है की यहां पेड़ों की जड़ों से ब्रिज बनाए जाते  हैं। इस गांव में पेड़ों की जड़ों से ब्रिज बनाए गए हैं। इन ब्रिज की खूबसूरती देखते ही बनती है और ये ट्रेकिंग के लिए भी खास हैं।

    खूबसूरती की मिसाल यह गांव 

    ये गांव अपने आप में पूर्ण रूप से संपन्न हैं, यहा सभी लोग साक्षर है। इतनाही नहीं यह गांव पूर्ण स्वच्छ भी है। प्लास्टिक का यहां दूर दूर तक नामों निशान नहीं है।खूबसूरती की बात की जायें तो इनमे भी यह गांव सबसे आगे है। यहां झरना, ट्रेक, लिविंग रूट ब्रिज, डॉकी नदी के लिए मशहूर है। यहां की प्राकृतिक सुंदरता देखते ही बनती है। इस गांव में कई रंग- बिरंगें फूलों के गार्डन भी हैं जो यहां की खूबसूरती में चार चांद लगाते हैं। इस आदर्श गांव की एक बार सैर जरूर करे।