BSP Chief Mayawati said on violence after Uttar Pradesh Panchayat elections, the state government should take serious and urgent steps in this matter

    राजेश मिश्र

    लखनऊ: उत्तर प्रदेश में हुए बड़े राजनैतिक घटनाक्रम में बहुजन समाज पार्टी (Bahujan Samaj Party) सुप्रीमो मायावती (Mayawati) ने अपने विधानमंडल दल के नेता और एक अन्य प्रमुख नेता को निष्कासित कर दिया हैं। दोनों बसपा से अंबेडकरनगर जिले (Ambedkarnagar District) से विधायक हैं। मायावती ने अपने सबसे खास और वर्तमान में विधानमंडल दल के नेता लालजी वर्मा (Lalji Verma) और एक अन्य विश्वासपात्र विधायक और पूर्व मंत्री राम अचल राजभर (Ram Achal Rajbhar) को भी पार्टी से निकाल दिया है। मायावती ने इन दोनों नेताओं को निकालते हुए उन पर पंचायत चुनावों में पार्टी प्रत्याशियों के खिलाफ काम करने का आरोप लगाया है। लालजी वर्मा पूर्व में बसपा के प्रदेश अध्यक्ष भी रह चुके हैं। 

    लालजी वर्मा के निष्कासन के साथ ही बसपा सुप्रीमो मायावती ने आजमगढ़ के विधायक शाह आलम उर्फ गुड्डू जमाली को विधानमंडल दल का नेता बना दिया है। गुड्डू जमाली बसपा के टिकट पर दूसरी बार विधायक चुने गए हैं। वो इससे पहले 2014 में आजमगढ़ लोकसभा सीट से बसपा प्रत्याशी भी रहे हैं।

    समाजवादी पार्टी का दामन थाम सकते हैं

    बताया जा रहा है कि बसपा से गुरुवार को निकाले गए ये दोनों कद्दावर नेता समाजवादी पार्टी (सपा) का दामन थाम सकते हैं। बसपा के एक बड़े नेता के मुताबिक, लालजी वर्मा और रामअचल राजभर की बातचीत कई दिनों से सपा में चल रही थी और इसकी खबर मिलते ही मायावती ने उन्हें निकालने का फैसला ले लिया। लालजी वर्मा पूर्व में समाजवादी रह चुके हैं और बीते दो दशक से बसपा में थे। वह मायावती के सरकार में संसदीय कार्य मंत्री के पद पर भी रह चुके हैं। उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनावों में अब महज सात महीनों का समय बचा है। इन हालात में जल्दी ही अन्य दलों में भी दलबदल का खेल शुरु हो सकता है। टिकट कटने की आशंका में कई अन्य दलों के विधायक भी दूसरी पार्टियों में जा सकते हैं।

    कुछ अन्य नेताओं पर निष्कासन की  गिर सकती है गाज

    विधानमंडल दल के नेता बनाए गए पेशे से बिल्डर गुड्डू जमाली मायावती के खास लोगों में गिने जाते हैं और पूर्वांचल में पार्टी का मुस्लिम चेहरा हैं। माना जा रहा है कि जल्दी ही बसपा अपने कुछ अन्य नेताओं पर निष्कासन की गाज गिरा सकती है। उत्तर प्रदेश में लगातार मात खा रही बसपा में भगदड़ की घटना नयी नहीं है। इससे पहले राज्यसभा चुनावों के दौरान बसपा के सात विधायकों ने पाला बदल लिया था। उस समय सपा के साथ मिलीभगत रखने के आरोप में मायावती ने विधायक असलम राइनी, असलम अली, विधायक मुजतबा सिद्दीकी, हाकिम लाल बिंद, विधायक  हरगोविंद भार्गव, सुषमा पटेल के साथ विधायक वंदना सिंह को निलंबित कर दिया था। उस समय भाजपा के साथ मिलकर चुनाव लड़ने को लेकर नाराज इन विधायकों ने बसपा के राज्यसभा प्रत्याशी रामजी गौतम का नामांकन वापस ले लिया था। इन विधायकों ने रामजी गौतम के नामांकन पत्र पर हस्ताक्षर किए थे जिसे बाद में वापस लेने की अर्जी दे दी थी। हालांकि भाजपा की मदद से बसपा एक राज्यसभा सीट झटकने में कामयाब हो गयी थी। गुरुवार के निष्कासन के बाद विधानसभा में अब बसपा के कुल 9 विधायक ही बचे हैं। कांग्रेस की रायबरेली से विधायक अदिति सिंह और विधायक राकेश प्रताप सिंह पहले से ही पार्टी के खिलाफ बयान दे रहे हैं और उन्हें नोटिस दिया जा चुका है।