Satish Dwivedi

    राजेश मिश्र

    लखनऊ: खासी फजीहत के बाद आखिरकार बुधवार को आर्थिक रुप से दुर्बल (EWS) कोटे से प्रदेश सरकार के सिद्धार्थ विश्वविद्यालय (Siddharth University) में असिस्टेंट प्रोफेसर (Assistant Professor) की नौकरी पाने वाले यूपी के बेसिक शिक्षा मंत्री सतीश द्विवेदी (Satish Dwivedi) के भाई ने इस्तीफा (Resigns) दे दिया। मंत्री के भाई ने ईडब्लूएस का कोटा लगाकर राजकीय सिद्धार्थ विश्वविद्यालय में मनोविज्ञान विभाग में असिस्टेंट प्रोफेसर की नौकरी हासिल की थी। मंत्री के भाई अरुण द्विवेदी की पत्नी भी उच्च शिक्षा विभाग में शिक्षक हैं और संयुक्त परिवार में रहते हुए उनकी हैसियत करोड़ों की है। बेसिक शिक्षा मंत्री सतीश द्विवेदी के भाई को ईडब्लूएस कोटे से नौकरी मिलने के बाद बवाल मचा हुआ था। राजभवन से लेकर प्रदेश सरकार में लोगों ने इसको लेकर शिकायती पत्र भेजा था। राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने इसको लेकर विश्वविद्यालय के कुलपति से जवाब-तलब किया था।

    बुधवार सुबह मंत्री सतीश के भाई अरुण द्विवेदी ने अपना इस्तीफा कुलपति के पास भेज दिया। कुलपति ने इस्तीफे को तुरंत स्वीकार भी कर दिया। इस्तीफा भेजने के बाद एक बयान जारी कर अरुण द्विवेदी ने कहा कि उन्हें नौकरी योग्यता के आधार पर मिली थी और इसमें उनके मंत्री भाई की कोई भूमिका नहीं रही। उन्होंने कहा कि 2019 में सिद्धार्थ विश्वविद्यालय में आवेदन के समय उन्हें ईडब्लूएस का प्रमाणपत्र जारी हुआ था और उसमें कुछ गलत नहीं था। मंत्री सतीश द्विवेदी के बचाव में अरुण ने कहा कि वह ईमानदार और साफ छवि के हैं व नौकरी दिलवाने में उनका कोई हाथ नहीं है।

    पत्नी भी उच्च शिक्षा विभाग में कार्यरत

    सतीश दिवेदी के भाई अरुण दिवेदी को ईडब्लूएस का प्रमाणपत्र 2019 में जारी हुआ था और यह एक साल के लिए वैध होता है। हालांकि संयुक्त परिवार में रहने वाले अरुण की आर्थिक हैसियत कभी भी दुर्बल नहीं रही है। इतना ही नहीं ईडब्लूएस कोटे से नौकरी हासिल करने वाले अरुण इससे पहले राजस्थान के वनस्थली विद्यापीठ में प्रोफेसर की नौकरी कर रहे थे और उनकी पत्नी भी उच्च शिक्षा विभाग में कार्यरत है। अब अरुण का कहना है कि ईडब्लूएस का प्रमाणपत्र जारी होने के बाद उन्होंने शादी की, इस लिहाज से कुछ गलत नहीं किया। 

     ईडब्लूएस प्रमाण पत्र की वैधता के बारे में जानकारी नहीं : कुलपति सुरेंद्र दुबे

    उधर, सिद्धार्थ विश्वविद्यालय के कुलपति सुरेंद्र दुबे ने पूरा मामला खुलने के बाद कहा कि उन्हें ईडब्लूएस प्रमाण पत्र की वैधता के बारे में जानकारी नहीं है। प्रमाणपत्र जारी करने वाले लेखपाल ने कहा है कि यह केवल एक साल के लिए वैध था और बाद में उसके आधार पर कोई लाभ नहीं दिया जा सकता है। नियमों के मुताबिक, सवर्ण वर्ग के उन लोगों को आर्थिक रुप से दुर्बल (ईडब्लूएस) का प्रमाणपत्र दिया जाता है जिनके पास कुल जमीन 5 एकड़ से कम हो और अपने पास गांव में 1000 वर्गफुट या शहर में 900 वर्गफुट का आवासीय भूखंड या मकान हो। साथ ही परिवार की वार्षिक आय 8 लाख रुपये से कम होनी चाहिए। इसके ठीक उलट मन्त्री के जिस भाई अरुण द्विवेदी की विश्वविद्यालय में नियुक्ति पर विवाद है वह वनस्थली विद्यापीठ, राजस्थान में अध्यापन कार्य कर रहे थे और लगभग 75, 000 मासिक वेतन पा रहे थे। उनकी पत्नी जो पहले वनस्थली विद्यापीठ में अध्यापन कार्य कर रहीं थीं वो वर्तमान में एमएस डिग्री कॉलेज, मोतिहारी, बिहार में सहायक प्रोफेसर के पद पर कार्यरत हैं।

    गांव में आलीशान मकान

    संयुक्त परिवार में रहने वाले मंत्री सतीश दिवेदी और भाई अरुण दिवेदी की माली हालात करोड़ों रुपये की है। उनके परिवार में चार भाई एवं मां हैं, जबकि पिता का निधन हो चुका है। मंत्री के सभी भाई शादीशुदा हैं और सभी की पत्नियां सरकारी नौकरी में हैं। मन्त्री की माँ के नाम गांव में 36 बीघा जमीन है एवं गांव में आलीशान मकान है।  स्थानीय पत्रकारों का कहना है कि इटवा क्षेत्र से विधायक बनने के बाद सतीश द्विवेदी ने सिद्धार्थनगर जिले में करोड़ों रुपए की जमीन खरीदी। इन जमीनों में विशुनपुर सैनी गांव में 8 बीघा, इटवा, बिस्कोहर रोड़, डुमरियागंज रोड़ पर भारत पेट्रोल पंप के पीछे एक बीघा आवासीय जमीन, पूर्व विधायक स्वयंवर चौधरी के घर के बगल में राष्ट्रीय राजमार्ग पर एक बीघा आवासीय जमीन आदि शामिल है। मन्त्री खुद सिद्धार्थनगर स्थित एक डिग्री कॉलेज में सहायक प्रोफेसर, जबकि उनकी पत्नी लखनऊ के डिग्री कॉलेज में कार्यरत हैं। मन्त्री के दूसरे भाई भी डिग्री कॉलेज में सहायक प्रोफेसर हैं और चौथे भाई परिषदीय विद्यालय में अध्यापक हैं।