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लखनऊ. उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) में आगामी होने वाले उपचुनावों के मद्देनजर कांग्रेस पार्टी (Congres) ने अपने संगठन के कील-कांटे दुरुस्त करते हुए, पूरी ताकत से उपचुनावों में उतरने का फैसला लिया है. उत्तर प्रदेश में तीन दशक से सत्ता का वनवास झेल रही कांग्रेस वापसी के लिए फिलहाल हरसंभव कोशिशों में जुटी हुई है.

कांग्रेस महासचिव व यूपी प्रभारी प्रियंका गांधी ने कांग्रेस का घोषणा पत्र बनाने को लेकर मजबूत रणनीति तैयार की है. कांग्रेस ने उत्तर प्रदेश के प्रस्तावित विधानसभा उपचुनावों के लिए कमर कस ली है और  हर सीट से आवेदन लेने के लिए एक हाई पॉवर कमेटी बनाई गई है. कमेटी में संबंधित विधानसभा क्षेत्रों की समझ रखने वालों को शामिल किया गया है. हर विधानसभा क्षेत्र के लिए प्रियंका की नयी टीम के सदस्य के साथ ही एक वरिष्ठ कांग्रेसी नेता को लगाया गया है. आवेदन हेतु प्रत्येक विधानसभा के लिए अलग-अलग कमेटियों का गठन किया गया है.

 कांग्रेस का जोर घाटमपुर, स्वार रामपुर और बांगरमऊ उन्नाव की सीटों पर है जहां पार्टी मजबूती से अपना उम्मीदवार लड़ाएगी. बुलंदशहर में और टूंडला  में पार्टी बीते पांच चुनावों से उपविजेता भी नहीं रही है. मल्हनी सीट पर भी पार्टी का नतीज कभी अच्छा नहीं रहा है. प्रियंका गांधी ने  बांगरमऊ सीट के संभावित प्रत्याशियों से कोरोना काल के पहले से चर्चा शुरु कर दी थी. बांगरमऊ में कुलदीप सेंगर कांड के दौरान प्रियंका गांधी व कांग्रेस काफी सक्रिया दिखी थी. पार्टी जहां तीन सीटों पर जीतने के जोर लगाएगी वहीं बाकी सीटों पर उसकी कोशिश मुकाबले में आने व अच्छे मत प्रतिशत पाने की रहेगी.

उत्तर प्रदेश में 8 विधानसभा सीट पर उपचुनाव होने वाले हैं.  कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष अजय कुमार लल्लू का कहना है कि पार्टी पूरी ताकत के साथ उपचुनाव में उतरेगी. चुनावी तैयारी के तहत हर सीट से आवेदन लेने हेतु एक हाई पॉवर कमेटी का गठन किया गया है. प्रदेश के वरिष्ठ नेताओं के नेतृत्व में बनी कमेटी ही अंत में टिकट फाइनल करेगी. नौगवां सादात (अमरोहा), बुलंदशहर, टुंडला (फिरोजाबाद), स्वार (रामपुर), बांगरमऊ (उन्नाव), घाटमपुर (कानपुर देहात), मल्हनी (जौनपुर) और देवरिया सदर सीट पर उपचुनाव होने है.

जिसमें घाटमपुर(सु0) सीट की जिम्मेदारी पूर्व केन्द्रीय मंत्री प्रदीप जैन आदित्य, पूर्व मंत्री आर0के0 चैधरी एवं पार्टी के प्रदेश उपाध्यक्ष योगेश दीक्षित को दी गयी है. इसके अलावा मल्हनी सीट की जिम्मेदारी पूर्व विधायक अजय राय, पूर्व विधायक राम जियावन तथा पार्टी के महासचिव मकसूद खान को सौंपी गयी है. देवरिया सदर सीट की जिम्मेदारी पूर्व विधायक नदीम जावेद, पूर्व सांसद बालकृष्ण चैहान व पार्टी के महासचिव विश्वविजय सिंह को दी गयी है.

बांगरमऊ सीट की जिम्मेदारी कानपुर कैण्ट से विधायक एवं प्रदेश उपाध्यक्ष सुहैल अख्तर अंसारी, पूर्व विधायक संजीव दरियाबादी और पार्टी के महासचिव विवेकानन्द पाठक को सौंपी गयी है. टूण्डला विधानसभा की जिम्मेदारी वरिष्ठ नेता एवं पूर्व मंत्री  नसीमुद्दीन सिद्दीकी, पूर्व मंत्री दीपक कुमार और प्रदेश महासचिव बदरूद्दीन कुरैशी को दी गयी है. नौगवां सादात की जिम्मेदारी पूर्व सांसद प्रवीन सिंह ऐरन, विधायक नरेश सैनी, प्रदेश महासचिव अली यूसुफ अली को सौंपी गयी है. बुलन्दशहर की जिम्मेदारी पूर्व सांसद हरेन्द्र मलिक, विधायक मसूद अख्तर, कांग्रेस महासचिव विदित चैधरी तथा रामपुर विधानसभा क्षेत्र की जिम्मेदारी पूर्व सांसद राशिद अल्वी, पूर्व विधायक नरेन्द्र पाल गंगवार तथा कांग्रेस महासचिव ब्रम्हस्वरूप सागर को सौंपी गयी है.

गौरतलब है कि सत्ता वापसी और कांग्रेस कि खोई सियासी जमीन तैयार करने के लिए कमान संभाल चुकीं प्रियंका गाँधी लगातार रोजगार, भ्रष्टाचार व किसानों के मुद्दे पर योगी सरकार को घेरती आ रही हैं. उनके इस मिशन को अंजाम तक पहुंचाने के लिए कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष अजय कुमार लल्लू दर्जनों बार जेल जा चुके हैं. फिलहाल कांग्रेस के लिए यह उपचुनाव किसी अग्नि परिक्षा से कम नहीं होगा तो वहीँ भ्रष्टाचार का दंश झेल रही सत्ताधारी दल भाजपा के सामने इस कोरोना काल में मुश्किलें भी कम नहीं.       

राजेश मिश्र