Allahabad High Court

लखनऊ. हाथरस के चर्चित मामले को कोर्ट द्वारा एक अक्टूबर को स्वतः संज्ञान लिए जाने के बाद सोमवार को इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच में सुनवाई हुई. यूपी के हाथरस में बिटिया के साथ हुई हैवानियत के मामले में पीड़ित परिवार व लापरवाही बरतने के आरोपी अफसरों के बयान दर्ज किये गए. सुनवाई में पीड़िता के परिजनों ने पुलिस पर गंभीर आरोप लगाए. पीड़त पक्ष ने अदालत में अपना बयान दर्ज कराया तो सरकार की तरफ से अधिकारियों ने भी पक्ष रखा.

सुनवाई के लिए कोर्ट में प्रदेश के डीजीपी हितेश चंद्र अवस्थी, अपर मुख्य सचिव गृह अवनीश अवस्थी व हाथरस के जिलाधिकारी व पुलिस अधीक्षक मौजूद रहे जबकि पीड़ित पक्ष की तरफ से परिवार के पांच सदस्य मौजूद रहे. सभी ने जस्टिस पंकज मित्तल और जस्टिस राजन रॉय के समक्ष अपना पक्ष रखा. दोनों ही पक्षों का बयान दर्ज करने के बाद अगली सुनवाई के लिए दो नवंबर की तारीख तय की गई. कोर्ट ने पहले परिवार को सुना फिर डीएम हाथरस और पुलिस कप्तान ने सवालों का जवाब दिया. इस सुनवाई के दौरान 5 अधिकारी भी अदालत में मौजूद रहे.

इस मामले की सुनवाई के दौरान सिर्फ केस से जुड़े हुए लोग और सरकार के अधिकारी मौजूद रहे. पीड़ित परिवार की ओर से दिल्ली की निर्भया का केस लड़ने वाली वकील सीमा कुशवाहा रहीं तो सरकार का पक्ष रखने के लिए AAG विनोद शाही रहे. इसके पहले कड़ी सुरक्षा के बीच पीड़ित परिजनों को कोर्ट परिसर में लाया गया. इस दौरान आसपास बड़ी संख्या में पुलिस व पीएसी बल तैनात किया गया था. पीड़ित पक्ष के कोर्ट पहुंचने के बाद प्रदेश के डीजीपी कोर्ट परिसर पहुंचे. पीड़ित परिवार को सुबह करीब 11 बजे लखनऊ लाया गया, जहां उन्हें भारी सुरक्षा के बीच उत्तरखंड भवन में ठहराया गया.

पुलिस की कार्यवाही से कोर्ट नाराज

मिली जानकारी के अनुसार हाईकोर्ट ने पुलिस की कार्रवाई पर नाराजगी जताई. पीड़िता के परिजनों ने कोर्ट में कहा कि अंतिम संस्कार उनकी सहमति के बिना रात के समय कर दिया गया. परिजनों ने यह भी कहा कि अंतिम संस्कार में हमें शामिल तक नहीं किया गया. परिजनों ने खुद की सुरक्षा के साथ ही आगे जांच में फंसाए जाने की आशंका जताई. पीड़ित परिवार की ओर से अंतिम संस्कार को लेकर लगाए गए आरोप पर जिलाधिकारी ने कहा कि वहां काफी लोग जमा थे. कानून-व्यवस्था बिगड़ने की वजह से अंतिम संस्कार का फैसला लिया. डीएम के बयान के दौरान पीड़िता के परिजनों ने टोकते हुए सवाल किया कि वहां भारी तादाद में पुलिस बल मौजूद था तो कानून व्यवस्था कैसे खराब होती?

पुलिस व प्राशासन की कार्यशैली से पीड़ित परिवार नाराज

कोर्ट में पीड़ित परिवार ने अपने बयान में पुलिस व प्रशासन को लेकर नाराजगी जाहिर करते हुए कहा कि परिवार की सहमति के बिना ही पीड़िता का शव जला दिया गया. पीड़िता के पार्थिव शरीर का आखिरी दर्शन भी नहीं करने दिया गया जिससे उन्हें काफी तकलीफ पहुंची है. परिवारवालों ने यह भी आरोप लगाया कि उन्हें इस बात का डर है कि हमें फंसाने की साजिश की जा रही है. पीड़ित परिवार के बयान में पुलिस को लेकर नाराजगी भी दिखी. उनका कहना था कि पुलिस ने उनकी शिकायत पर ध्यान नहीं दिया बल्कि उनके खिलाफ माहौल बनाया गया और पुलिस ने कुछ नहीं किया. कोर्ट में सरकार का पक्ष अपर महाधिवक्ता विनोद कुमार शाही ने रखा. अब अगली सुनवाई के दिन पीड़िता के परिजनों के आरोप पर बहस होगी. अदालत ने इस मामले का स्वत: संज्ञान लिया था और परिवार और सरकार का पक्ष पूछा था.

पिछली सुनवाई के दौरान सर्वोच्च न्यायालय ने यूपी सरकार से तीन सवाल पूछे थे. कोर्ट ने यूपी सरकार से पूछा था कि पीड़ित परिवार और गवाहों की सुरक्षा के क्या इंतजाम किए गए हैं? क्या पीड़ित परिवार के पास पैरवी के लिए कोई वकील है? इलाहाबाद हाईकोर्ट में मुकदमे की क्या स्थिति है? यूपी सरकार की ओर से पैरवी करते हुए सॉलिसीटर जनरल तुषार मेहता ने कोर्ट में कहा था कि वे इन सवालों के जवाब 8 अक्टूबर तक दे देंगे. 8 अक्टूबर की तिथि को गुजरे चार दिन हो गए, लेकिन यपी सरकार कोर्ट के सवालों के जवाब अब तक नहीं दे पाई है.

परिवार की सुरक्षा के लिए 66 सुरक्षाकर्मी और 8 सीसीटीवी कैमरे की व्यवस्था

पीड़ित परिवार ने अपनी जान का खतरा बताया था जिस पर पीड़िता के गांव में भारी भरकम सुरक्षा बल तैनात किया गया है. एसपी विनीत जायसवाल के अनुसार परिवार की सुरक्षा के लिए घर पर 66 सुरक्षाकर्मी तैनात किए गए हैं. आठ सीसीटीवी कैमरे भी लगाए गए हैं.  दरअसल, मामले की चर्चा पूरे देश में होने के बाद सभी की नजरें इस पर लगी हुई हैं. पीड़िता की लाश को परिजनों के विरोध के बावजूद आधी रात को जला देने से पूरा प्रशासनिक महकमा सवालों के घेरे में आ गया है. 

गौरतलब है कि इलाहाबाद हाई कोर्ट की लखनऊ बेंच ने 1 अक्टूबर को इस घटना पर स्वत: संज्ञान लिया था. हाई कोर्ट के दखल के बाद योगी सरकार हरकत में आई और परिवार को सुरक्षा का पहरा दिया गया. परिवार की सुरक्षा में करीब 60 पुलिसवालों की तैनाती की गई और घर के आसपास सीसीटीवी कैमरों का घेरा लगाया गया. इसके साथ ही घर आने-जाने वाले हर शख्स पर कड़ी नजर रखी गई. हाई कोर्ट की लखनऊ बेंच ने सुनवाई के दौरान अपर मुख्य सचिव गृह, डीजीपी हितेश चंद्र अवस्थी, एडीजी लॉ एंड ऑर्डर प्रशांत कुमार के अलावा हाथरस के डीएम प्रवीण कुमार और एसपी रहे विक्रांत वीर को तलब किया. हाथरस कांड में जिस तरह से पुलिसिया कार्रवाई हुई उससे पुलिस पर सवाल उठे हैं. और अब इस पूरे मामले की जांच सीबीआई करेगी. सीबीआई ने इस मामले में अपनी जांच पड़ताल शुरू कर दी है.  

-राजेश मिश्र.