चंद्रग्रहण के दौरान प्रेग्नेंट महिलाएं बिल्कुल न करें ये काम

    – सीमा कुमारी

    इस साल का पहला चंद्रग्रहण 26 मई यानी, कल लग रहा है। गौरतलब है कि यह चंद्रग्रहण (Lunar eclipse) वैशाख मास की शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि को पड़ रहा है।

    चंद्रग्रहण की घटना ज्योतिषी महत्व होने के साथ-साथ इसका वैज्ञानिक महत्व भी है। पहले चंद्रग्रहण के दिन चंद्रमा वृश्चिक राशि में रहेगा। चंद्रग्रहण दोपहर 2 बजकर 17 मिनट से शुरू होकर शाम 07 बजकर 19 मिनट पर समाप्त होगा।

    आमतौर पर चंद्रग्रहण (lunar eclipse) 9 घंटे पहले शुरू हो जाता है। लेकिन ये ग्रहण साल का पहला चंद्रग्रहण  ‘उपछाया ग्रहण’ है। जिसके कारण इसमें सूतक काल मान्य नहीं होगा। पहला चंद्रग्रहण भारत में ‘उपछाया चंद्रग्रहण’ के रूप में देखा जा सकेगा। जबकि पूर्वी, एशिया, ऑस्ट्रेलिया, प्रशांत महासागर और अमेरिका में पूर्ण ग्रहण होगा। चंद्र ग्रहण एक साधारण घटना है। सूर्य की चारों तरफ पृथ्वी और पृथ्वी के चारों तरफ चन्द्रमा चक्कर लगाते-लगाते सूर्य, पृथ्वी और चन्द्रमा जब एक सीध में आ जाते हैं और पृथ्वी की छाया चन्द्रमा पर पड़ने लगती है।

    खगोल शास्त्रियों के अनुसार इस घटना को चंद्रग्रहण कहा जाता है। एक वर्ष में चन्द्र ग्रहण की अधिकतम संख्या 3 हो सकती है। ज्योतिष विद्वानों के अनुसार इस बार चंद्र ग्रहण में सूतक काल नहीं लगेगा। ग्रहण के दौरान प्रेगनेंट  महिलाओं (pregnant women) को विशेष सावधानियां बरतने की आवश्यकता होती है। गर्भवती महिलाएं इन बातों का जरूर ध्यान रखें-

    पारंपरिक मान्यताओं के अनुसार, ग्रहण के दौरान गर्भवती महिलाओं को किसी भी नुकीली चीज का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए, जैसे-चाकू, कैंची, सूई आदि। यह भी कहा जाता है कि न सिर्फ गर्भवती महिलाएं बल्कि उनके पति भी इस समय इन चीजों का इस्तेमाल करने से बचें। ऐसा माना जाता है कि ऐसा करने से उसके गर्भस्थ शिशु के अंगों को हानि पहुंच सकती है।

    कहा तो यह भी जाता है कि गर्भवती महिलाओं को घर से बाहर नहीं निकलना चाहिए। ऐसा माना जाता है कि गर्भवती महिला अगर ग्रहण देख लेती है तो उसका सीधा असर उसके होने वाले बच्चे की शारीरिक और मानसिक सेहत पर पड़ता है।  ऐसे में कोशिश करें कि घर से बाहर बिल्कुल भी ना जाएं।

    पारंपरिक मान्यताओं के अनुसार, ग्रहण खत्म होने के बाद गर्भवती महिला को स्नान जरूर कर लेना चाहिए, नहीं तो शिशु को त्वचा संबधी रोग हो सकते हैं। ग्रहण के नकारात्मक प्रभाव से बचने के लिए गर्भवती महिला को तुलसी का पत्ता जीभ पर रखकर ‘हनुमान चालीसा’ और ‘दुर्गा स्तुति’ का पाठ करना चाहिए। कहते हैं कि ऐसा करने से ग्रह-गोचर के दुष्प्रभाव से  छुटकारा मिलता है।

    इस दौरान पूजा-पाठ करना वर्जित होता है और देवी-देवताओं की मूर्तियों को स्पर्श नहीं किया जाता है। मंदिरों के कपाट भी बंद कर दिए जाते हैं। कहा जाता है कि ग्रहण काल में भोजन करने वाले मनुष्य जितने अन्न के दाने खाता है, उसे उतने सालों तक नरक में वास करना पड़ता है। इस दौरान पत्ते, तिनके, लकड़ी और फूल आदि नहीं तोड़ने चाहिए।