मदुरै. बीते गुरूवार यानि 28 जनवरी को तमिलनाडु के मदुरै में श्री मीनाक्षी-सुंदरेश्वर मंदिर में 'फ़्लोट उत्सव' समारोह के लिए भक्तों की भीड़ रही। यहाँ के 'फ़्लोट फ़ेस्टिवल" को देखने के लिए बड़ी संख्या में लोग मंदिर में उमड़ पड़े। आयोजन में फ्लोट को फूलों और कपड़ों से सजाया गया था। भक्तों को रस्सी के जरिए नाव को खींचते हुए भी देखा गया। गौरतलब है कि लोकप्रिय रूप से फ्लोट फेस्टिवल के नाम से प्रसिद्ध इस महोत्सव को पारंपरिक रूप से थेपोत्सव के रूप में जाना जाता है जो एक हिंदू धार्मिक त्योहार है। इस उत्सव को दक्षिण भारत के अधिकांश हिस्सों में ही मनाया जाता है। जबकि, मुख्य रूप से यह तमिलनाडु के मदुरै शहर में मनाया जाता है। मदुरै सबसे पुरानी प्रामाणिकता और संस्कृति के रुझान वाले शहरों में से एक है। बताया जाता है यहां इस उत्सव को 17 वीं शताब्दी से मनाया जा रहा है जब लोगों ने एक प्राचीन मंदिर के पास बनी कृत्रिम झील में नाव की सवारी पर देवताओं को ले जाना शुरू कर दिया। इस अनुष्ठान में सुबह-सुबह हाथियों के साथ स्वर्ण पालकों में देवताओं को ले जाना और हाथियों और संगीतकारों द्वारा उन्हें अलविदा कहना शामिल है। यह त्योहार जनवरी के महीने में शुरू होता है और एक महीने तक चलता है।