त्रिपुरा में बरसात करवाने हेतु वर्षा देवता को प्रसन्न करने के लिए मेंढकों का विवाह कराया गया। इसके लिए नई पोशाकों, वरमालाओं के आदान-प्रदान और सिंदूर (सिंदूर) लगाने तक आदि सभी जरुरी रस्मों को निभाया गया।