suresh-deshmukh

  • हायकोर्ट की फटकार: 29 को कोर्ट में हाजिर रहने आदेश

वर्धा. राष्ट्रवादी कॉंग्रेस के नेता तथा पुर्व विधायक सुरेश देशमुख के खिलाफ हायकोर्ट ने अवमानना मामले में जमानती वारंट जारी किया है.साथ ही देशमुख व विलास साबले को 29 अक्टूबर को हायकोर्ट में उपस्थित रहने के आदेश जारी किये है.ज्ञात रहे की, अभियांत्राकी कॉलेज के प्राध्यापकों नोकरी से निकालने के मामले में यह एक्शन लिया है.

collage

बापुराव देशमुख फांऊडेशन के सचिव पद पर सुरेश देशमुख कार्यरत है.फांऊडेशन व्दारा सुरेश देशमुख अभियांत्रिकी कॉलेज चलाया जाता था.किंतु अचानक व्यवस्थापन ने प्राध्यापक व कर्मचारियों को नोकरी से निकाला था.सहायक प्राध्यापक भावना चिलके,सुमित वैदय,अनिकेत भोयर,प्रवीण लाखे,नीलेश मुरेकर, शैलेश साखरे,रिना सातपुते,दिव्या चंदन ने सुरेश देशमुख व साबले के खिलाफ मुंबई उच्च न्यायालय के नागपुर खंडपीठ में अवमानना याचिका प्रस्तुत की थी.नियम के अनुसार नियुक्ती व सेवा में कायम होने के उपरांत भी अप्रैल 2018 में अचानक सेवा से निकाला गया था.

किंतु उनका अगस्त 2016 से अप्रैल 2018 का वेतन तक नही दिया गया था.इस संदर्भ में प्राध्यापकों ने उच्च न्यायालय में याचिका दायर की थी.11 दिसंबर 2019 को उच्च न्यायालय ने प्राध्यापकों का बकाया वेतन चार सप्ताह के भितर देने का आदेश दिया.तत्पश्चात प्राध्यापकों ने बकाया वेतन के लिये आवेदन किया.परंतु उनके आवेदन पर अनदेखी की गई.अबतक उन्हें वेतन नही दिया गया.नतिजन प्राध्यापकों ने उच्च न्यायालय में अवमानना याचिका दायरकर सुरेश देशमुख व विलास साबले पर कार्रवाई तथा बकाया राशी देने की मांग की.इस मामले में न्यायालय ने देशमुख व साबले को न्यायालय में प्रस्तुत होने के आदेश देकर स्वंय का पक्ष रखने के लिये कहां था.लेकीन देशमुख व साबले न्यायालय में उपस्थित नही हुये.जिससे न्यायाधिश अतुल चांदूरकर व नितीन सुर्यवंशी ने देशमुख व साबले के खिलाफ 15 हजार रूपयों का जमानती वारंट देकर उन्हें  29 अक्टूबर को उच्च न्यायालय में उपस्थित रहने के आदेश दिये.याचिकाकर्ताओं की और से एड.प्रशांत शेंडे ने काम संभाला.