blood banks
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वर्धा. कोविड-19 के चलते समूचे राज्य में रक्त की कमी निर्माण हो गई है. जिला भी इससे अछुता नही है. जिले में भी ब्लड की भारी कमी निर्माण हुई है. प्रतिदिन लगभग 100-150 ब्लड बैग की आवश्यक होती है.परंतु आज की स्थिति में जिले में ब्लड की उपलब्धता नही के बराबर है. जिससे जिले की ब्लड बैंक खुन के लिए तरस रही है. परिणामवश मरीजों को ब्लड चढाने में काफी दिक्कतें आ रही है. 

जिले में मुख्य तीन ब्लड बैक है, जिनमें जवाहरलाल नेहरु मेडिकल कॉलेज ब्लड सेंटर, वर्धा जिला अस्पताल ब्लड सेंटर व महात्मा गांधी मेडिकल कॉलेज ब्लड सेंटर में रक्त संकलन का कार्य किया जाता है. सभी शासकीय, निजी अस्पताल मिलाकर प्रतिदिन लगभग 100-150 ब्लड बैग की जरुरत होती है. जिसमें सावंगी अस्पताल में विविध शल्यक्रिया के लिए हररोज 30-35 बैग ब्लड की जरुरत होती है. महिने में 1500 ब्लड बैग की जरुरत है. वही सरकारी अस्पताल में प्रतिदिन 8-10 बैग व सेवाग्राम अस्पताल में 18-22 बैग की जरुरत होती है. फिलहाल सेवाग्राम अस्पताल में 128 ब्लड बैग उपलब्ध है.

अकेले सावंगी अस्पताल में हर महिने 500 रक्तदाता चाहिए. यानि पूरे जिले की बात करें तो करीब महीने के लगभग 1000 रक्तदाताओं की जरुरत है. परंतु जिले में रक्तदाताओं का प्रमाण काफी कम है. जिससे खून की किल्लत निर्माण हुई है. फिलहाल सावंगी अस्पताल में डब्यलूबी होल्ड ब्लड की 65 बैग है, जिनमें से 25 बैग पेशेंट के लिए रिजर्व है. यानी केवल 40 बैग उपलब्ध है. काम्पोनेन्ट 288 बैग उपलब्ध है, जिनमें से 100 बैग पेशंट के लिए रिजर्व है यानि 188 बैग उपलब्ध है. वही सरकारी अस्पताल में ब्लड नही के बराबर है. सेवाग्राम अस्पताल में भी ब्लड की किल्लत निर्माण हुई है. 

जरुरत 25 हजार बैग, संकलन मात्र 10 हजार 

जिले में तीन बडे अस्पताल है. जहां आस-पास के राज्य से बीमार लोग अपनी बीमारियों का उपचार करने आते है. जिसके तहत पूरे साल में जिले में कम से कम 20 से 25 हजार ब्लड बैग की जरुरत होती है. जिले के आचार्य विनोबा भावे अस्पताल, शालिनीताई सुपर स्पेशलिटी सेन्टर में लगभाग हर साल 10-12 हज़ार ब्लड बैग लग जाती है, बाकी फिर महात्मा गांधी मेडिकल कॉलेज में भी हर साल 6-7 हज़ार ब्लड बैग लगती है. वर्धा सरकारी अस्पताल मे 3 हज़ार बैग लगती है. परंतु जिले में एक साल में करीब 8000 से 10000 ब्लड बैग ही रक्त संकलन हो पाता है. जिससे ब्लड की किल्लत हमेशा रहती है.

ब्लड संकलन के लिए 3-2 प्रोडक्ट तैयार किया जाता है. जिसे वैद्यकीय भाषा में काम्पोनेंट कहते है. पीआरबीसी- प्लाज्मा रिच ब्लड कंसन्ट्रेट, पीसी-प्लेटलेट्स कंसन्ट्रेट, एफएफपी-फ्रेश प्रोजेन प्लाज्मा को मिलाकर यह आंकडा 13 हजार से 15 हजार तक भी जाता है. लेकिन कम रक्तदाताओं का पंजीयन हुआ है. उनमें महिला रक्तदाताओं की संख्या तो बहुत कम है. जिप पर डब्ल्यूएचओ, एनबीटीसी चिंता व्यक्त कर चुका है. गलतफहमी, उचित कॉन्सेलिंग से रक्तदाताओं की संख्या बढाना समय की जरुरत है. 

ब्लड सुरक्षा का तरीका अलग

ब्लड को सुरक्षित रखने का तरीका अलग-अलग होता है. जिसमें डब्ल्यू होल ब्लड 42 दिन तक स्टोरेज किया जा सकता है, पीआरबीसी प्लाज्मा रिच ब्लड कंसन्ट्रेट 42 दिन, वही पीसी प्लेटलेट कंसन्ट्रेट 5 दिन तथा एफएफपी फ्रेश फ्रोजेन प्लाज्मा 365 दिन तक सुरक्षित रहता है. 

हाईटेक है ब्लड बैंक

जिले में ब्लड बैंक हाईटेक है. आईएसओ प्रमाणित, एनबीएच अकररेडिड ब्लड सेंटर है. आचार्य विनोबा भावे अस्पताल का जवाहरलाल नेहरू मेडिकल कॉलेज ब्लड सेन्टर, को अस्पताल के ही दूसरे जगह पर स्थलांतरित किया जा रहा है. जिसकी अन्न एवम औषधि विभाग, सीडीएससीओ मुम्बई से मान्यता प्राप्त हो चुकी है. जिससे यह ब्लड सेन्टर पूरे मध्य भारत का सबसे सुसज्ज ब्लड सेन्टर होगा. जो कि पूरी तरह से वतानीकुलित है. नए उपकरणों के साथ जैसे कि अफेरेसिस मशीन के साथ जिसे सिंगल डोनर प्लेटलेट्स, SDP सिंगल डोनर प्लाज्मा आ जाने से रक्त की बीमारियों से लड़ने में आसानी होगी, पहले यह प्रोडक्ट सिर्फ नागपुर में ही खाजगी ब्लड सेन्टर में उपलब्ध हुआ करते थे. जिसे जिले के रोगियों को वह लेने नागपुर जाना पड़ता था और खाजगी ब्लड सेन्टर मनमानी किम्मत पर रक्त बेचते थे. परंतु अब आचार्य विनोबा भावे अस्पताल यही प्रोडक्ट शासकीय दर में स्वस्थ कीमत पर उपलब्ध होंगे. जिसे मरीज और उनके परिवारगण को राहत मिलेगी.

हर माह में 1-10 बैग होती है डिस्करड

ब्लड सेन्टर में या किसी रक्तदान शिबिर में रक्त संकलन कर ब्लड सेन्टर मुख्यालय लाकर उससे वह कई टेस्ट से गुजारा जाता है. जैसे एचआईवी, एचबीएसएजी, एचसीवी, एमपी, वीडीआरएल अगर इन मानक टेस्ट में किसी ब्लड सैंपल की तीव्रता ज्यादा रही तब वह पॉजिटिव निर्धारित होता है. जो टेस्ट ऑटोमेटेड एलिसा प्रोसेसर मशीन से होता है. जिसकी कीमत अंदाजे 50-60 लाख है. यह पूरे जिले में सिर्फ जवाहरलाल नेहरू मेडिकल कॉलेज ब्लड सेंटर के आचार्य विनोबा भावे अस्पताल में सन 2017 से उपलब्ध है. जिसका टेस्ट करेक्शन सार्वउत्तम है. जिसमे बीमारी की पहचान आसानी से 2-3 घंटो में हो जाती है.  जो बैग इन टेस्ट में पॉजिटिव आती है उसे महाराष्ट्र राज्य प्रदूषण मंडल और बायो मेडिकल वेस्ट मैनेजमेंट के मानकों के तहत के निर्देश अनुसार डिस्कारड किया जाता है. एक माह में 1-10 बैग डिस्करड होती है.

मुंबई जाता है ब्लड

जिले में भी ब्लड बैग सुरक्षित रखा जाता सकता है. अगर उससे 3-4 डिग्री तापमान पे सुरक्षित और साफ बर्फ कॉन्टिनर में रखा जाए तोह मुम्बई जा सकता है और जाता भी है. हर ब्लड सेन्टर मैं 3-4 डिग्री का कोल्ड स्टोरेज फ्रिज होता है उसमें ब्लड बैग रखा जाता है. ऐसी जानकारी सावंगी अस्पताल के डा़ सुनील चावरे ने दी.