MP Ramdas Tadas

    वर्धा.  ओबीसी समाज की स्वतंत्र जातिनिहाय जनगणना करने के लिए केंद्र सरकार ने जरूरी कदम उठाने चाहिए. इसके लिए सांसद रामदास तड़स ने लोस में नियम 377 के अंतर्गत संसद सत्र के पहले ही दिन प्रश्न उपस्थित कर ओबीसी समाज का आवाज सदन में बुलंद किया़  भारतीय जनगणना 2021 अनुसुची अंतर्गत कालम क्रमांक 13 में अनु़ क्रमांक 1 में अनुसूचित जाति, अनु क्रमांक 2 मे अनुसूचित जनजाति व अनु क्रमांक 3 में अन्य ऐसा उल्लेख किया है़  इस कालम में ओबीसी वर्ग का समावेश होने से संपूर्ण भारत में ओबीसी अंतर्गत आने वाली सभी जाति की संख्या विस्तृत रूप से सामने आएगी तथा भविष्य में केंद्र व राज्य सरकार को जानकारी का लाभ होगा़  इससे भारतीय जनगणना 2021 अनुसूची कालम क्रमांक 13में ओबीसी वर्ग का समावेश करने के बारे में लोकसभा नियम 377 अंतर्गत गृह विभाग के पास सांसद तड़स ने अपील की़.

    विकास में विशेष निधि से वंचित ओबीसी समाज 

    ओबीसी वर्ग को 1931 की जनगणनानुसार आज तक आरक्षण नहीं दिया गया है़  उपरांत ओबीसी वर्ग की जनगणना नहीं होने के कारण समाज उपेक्षित रह गया है़  ओबीसी की जनगणना न होने के कारण शैक्षणिक, राजनीतिक तथा आर्थिक पिछड़ापन दूर करने के लिए किसी भी प्रकार के ठोस उपाय करना संभव नहीं हो रहा है़  केंद्र सरकार द्वारा पिछड़ी जातियों के विकास के लिए राज्यों को निधि भेजा जाता है़  पिछड़ावर्ग की कुल जनसंख्या के आधार पर यह निधि भेजा जाता है़  ओबीसी की आकड़ेवारी नहीं रहने से उनके लिए विशेष निधि नहीं भेजा जाता़  इससे ओबीसी वर्ग की जनगणना करना जरूरी होने की बात सांसद ने रखी.  

    इंपेरिकल डाटा जमा करने राज्य सरकार विफल

    महाराष्ट्र सरकार द्वारा न्यायालय में निरंतर अवसर मिलने के बावजूद ओबीसी समाज की मांग प्रभावी रूप से नहीं रखी़  राज्य पिछड़ावर्गीय आयोग की स्थापना समय पर नहीं करने से ओबीसी समाज के राजनीतिक आरक्षण के लिए जरूरी इंपेरिकल डाटा राज्य सरकार जमा नहीं कर पाई. इससे आज महाराष्ट्र राज्य के ओबीसी समाज का राजनीतिक आरक्षण रद्द हुआ है़  भविष्य की जरूरत पहचानकर राज्य सरकार पर निर्भर न रहते केंद्र सरकार ने पहल कर ओबीसी समाज की जातिनिहाय जनगणना के लिए पहल करनी चाहिए.