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  • कोरोना संक्रमण में वृध्दि, बैखौफ नागरिक

वर्धा. बढ़ते कोरोना संक्रमण के मामलों के चलते पुन: लाकडाउन लागू किए जाने की चर्चा जोर पकड़ने लगी है. चर्चा के चलते छोटे कारोबारियों के साथ मजदूरों में दहशत का माहौल है. छोटे कारोबारियों के साथ चर्चा करने पर उनका कहना है कि अब कोरोना का डर नहीं लगता, लेकिन लाकडाउन के डर साथ उसके लागू होने को लेकर संभ्रम बना हुआ है. लाकडाउन के कारण बड़ी मुसीबत आती है. रोजगार के व्यवसाय पर संकट आने से परिवार का गुजारा कैसे करना, यह गंभीर प्रश्न बीते वर्ष में अनेक बार निर्माण हुआ.

कोरोना संक्रमण के चलते केंद्र व राज्य सरकार ने मार्च 2020 में लाकडाउन लागू किया था. परिणामस्वरूप सभी उद्योग बंद रहे. लाकडाउन के बाद अनलाक की प्रक्रिया आरंभ हुई. किंतु आज भी रोजगार व व्यवसाय पहले की तरह नहीं रहे. अनेक पाबंदियों का सिलसिला आज भी शुरू है. शाम 7 बजते ही दूकानें बंद करनी पड़ती है, जिससे लाया हुआ माल पूर्णरूप से नहीं बेचा जाता.

पानटपरी की दूकान पर बुरा असर

शाम होते ही पानटपरी बंद करनी पड़ती है. पानटपरी का व्यवसाय शाम 7 बजे के बाद भी होता है. कोरोना संक्रमण के कारण व्यवसाय पर बड़ा संकट आया है. पहले की तरह अब व्यवसाय नहीं हो रहा है.

-मोहन इंगोले, पानटपरी संचालक.

व्यवसाय हो गया चौपट

त्योहारों के मौसम में कुमकुम, अगरबत्ती, धूप आदि पूजा सामग्री की मांग रहती है़  अन्य दिनों में तो व्यवसाय उतना नहीं होता़  होली को कुछ ही दिन शेष है़  ऐसे में लाकडाउन लागू किए जाने की चर्चा शुरू है़  कोरोना नियमों का हम पालन करेंगे. हमें व्यवसाय करने की अनुमति देनी चाहिए़ 

-सचिन तिजघाटे, विक्रेता  पूजा सामग्री.

कैसे होगा व्यवसाय

4 दिन बाद होली का त्योहार है़  इस दौरान चिकन की मांग बढ़ने से हम पहले से ही माल बुलाना पड़ता है़  लेकिन लाकडाउन लगने की चर्चा से हमारी मुश्किल बढ़ गई है़  सभी आर्थिक संकट में है़  ऐसे में  कोरोना से निपटने लाकडाउन को विकल्प के रूप में नहीं देखना चाहिए़  हर त्योहार पर लाकडाउन लागू किया तो व्यवसाय कैसे होगा.

-राजा शेख, विक्रेता चिकन.

फूल खराब होने से नुकसान

पहले ही लंबे लाकडाउन के कारण व्यवसाय पर संकट है़  त्योहारों के मौसम में फूल एवं हार लेने ग्राहक आते है़  नियमों का पालन कर प्रशासन को सहयोग तो हम करते आए है़ं  होली के दिनों में अचानक लाकडाउन नहीं करना चाहिए, अन्यथा फूलों का माल खराब हो जाएगा.  

-शेख हनीफ, फूल विक्रेता.

लाकडाउन से नुकसान का डर

बंडी लगाकर प्रतिदिन फलों की हम बिक्री करते है़  उसके माध्यम से घर चलता है़  अब कोरोना से ज्यादा लाकडाउन का डर लगता है़  त्योहार के समय लाकडाउन नहीं लगना चाहिए. हम कोरोना नियमों का पालन करने को तैयार है. 

-अजीज कुरैशी, फल विक्रेता

लाकडाउन विकल्प नहीं

लाकडाउन से छोटे व्यवसायियों को ही हर बार परेशानी होती है़  कर्ज के हफ्ते कैसे भरे इसकी चिंता लगी रहती है़  हम कोरोना के नियमों का पालन कर रहे है़  प्रशासन ने लाकडाउन की बजाए नियमों के पालन पर ही ध्यान देने की जरूरत है.  

-प्रवीण सयाम, होटल व्यवसायी.

व्यवसायियों के बारे सोचना चाहिए

होली के त्योहार पर पाड़वा मनाने की परंपरा है, जिसके चलते मटन की मांग रहती है़  अनेक होटलों में भी हम इसकी आपूर्ति करते है़  लेकिन लाकडाउन के कारण चिंता बढ़ गई है़  प्रशासन ने अचानक लाकडाउन नहीं लगाना चाहिए.

-मनोहर गुजर, मटन विक्रेता.