प्रतीकात्मक तस्वीर
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  • अस्पतालों में बढ़ रहे मरीज

वर्धा. बारिश के दिनों में आमतौर पर जलजन्य बीमारियां बढ़ती है़ परंतु पिछले कुछ दिनों से जिले में मिट्टीमिश्रित व दूषित जलापूर्ति हो रही़ इसका सीधा असर बालकों के स्वास्थ्य पर हो रहा है़ जुलाब, पेट के विकार व उलटियां आदि की चपेट में बच्चे आ रहे हैं. परिणामवश अस्पतालों में इन बीमारियों के मरीजों की संख्या बढ़ रही है़ बारिश के दिनों में जलजन्य बीमारियां पैर पसार रही है़ं इसके पीछे मुख्य कारण दूषित अथवा मिट्टीमिश्रित जल का सेवन है.

ग्रामीण इलाकों में खतरा अधिक

जिले में शहर की तुलना में ग्रामीण अंचल में ये बीमारियां अधिक पायी जाती है़ं  गर्मी के दिनों में पेयजल के सभी स्रोत लगभग सूखने की कगार पर आ जाते है़ं  ऐसे में वर्षा के मौसम में होनेवाली बारिश से जलस्रोतों को संजीवनी मिलती है़  परंतु इसमें लोगों के घरों तक आनेवाला यह पानी मिट्टीमिश्रित अथवा दूषित रहता है़  इसके सेवन से बीमारियां बढ़ती है़  पिछले कुछ दिनों से शहर से सटे ग्रापं क्षेत्र में ऐसे ही मिट्टीमिश्रित व दूषित पेयजल की आपूर्ति हो रही है़  इसके सेवन से छोटे बच्चे व बुजुर्ग नागरिक जलजन्य बीमारी की चपेट में आ रहे है.

जम रहा मिट्टी का थक्का

पिछले कुछ दिनों से पिपरी (मेघे) सहित आसपड़ोस के कई गांवों में मिट्टीमिश्रित जलापूर्ति हो रही है़ बर्तनों में पानी भरने के कुछ समय बाद निचले हिस्से में मिट्टी का थक्का जम जाता है़ शतप्रतिशत शुध्द जलापूर्ति का दावा करनेवाले मजीप्रा प्रशासन ने इस ओर ध्यान देना चाहिए.

उल्टी व जुलाब की शिकायत

दूषित व मिट्टीमिश्रित जल के सेवन से विशेष कर छोटे बच्चों में उल्टी व जुलाब की शिकायत देखी जा रही है़ पिछले कुछ दिनों से इसके मरीजों की संख्या बढ़ गई है़  इस पर गंभीरता से ध्यान नहीं दिया गया तो पीलिया अथवा टाइफाइड जैसी बीमारी के जखड़ने की आशंका है. 

उबाल कर पीयें पानी

बारिश के दिनों में अमुमन यह बीमारियां होती है़ं  पिछले कुछ दिनों से उल्टी, जुलाब के मरीज बढ़ें है़ं  विशेष कर छोटे बच्चों पर ध्यान देना जरूरी है़  नल का पानी उबाल कर बच्चों को पिलाए़ं  घरों में साफ-सफाई बनाये रखे़ं  समय-समय पर बच्चों के हाथ स्वच्छ धोए़. 

-डा़ सचिन पावडे, बालरोग विशेषज्ञ