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  • आगे नहीं बढ रही जांच, कार्यप्रणाली पर संदेह

वर्धा. 14 वर्षिय किशोरी के अपहरण मामले में पुलिस जांच की पोल खोलनेवाली गंभीर जानकारी सामने आयी है़ प्रकरण को लेकर जांच कार्य आगे न बढ पाने से विभाग की कार्यप्रणाली संदेह के दायरे में आ गई है़ वहीं दूसरी ओर दहेगांव पुलिस ने घटनाक्रम को अलग ही मोड देकर अकल के तार तोडने की बात पुर्णत: स्पष्ट हुई है़ 

विश्वसनीय सूत्रों के अनुसार किशोरी अपहरण मामले में तत्कालीन अपर पुलिस अधीक्षक निलेश मोरे ने जांच तो शुरु कर दी थी़ परंतु जांचपडताल में बडी मात्रा में कोताई बरती गई़ इस दौरान दहेगांव पुलिस ने अपने बचाव के रास्ते तलाशने शुरु कर दिया़ प्रकरण से जुडी हर कडी को डराधमकाने का काम शुरु हुआ़ पीडिता व परिजनों को दहेगांव पुलिस द्वारा दर्ज किये गए बयानो पर कायम रहने के लिए दबाव बनाया जा रहा है़ इसी बीच जांच अधिकारी निलेश मोरे का नांदेड में तबादला हो गया है़ दूसरी ओर मामले से जुडी महत्वपूर्ण जानकारी अब सामने आयी हैं, जिससे दहेगांव पुलिस के घटनाक्रम की ही धज्जियां उड गई है.

पुलिस के अनुसार पीडिता 26 जुलाई को स्वयं एसटी बस से आर्वी पहुंची थी़ किन्तु दूसरी ओर जिस शख्स के यहां पीडिता गई, ऐसा पुलिस का कहना है़ उसी शख्स के अनुसार पीडिता 26 जुलाई को आर्वी उसके यहां पहुंची ही नहीं. ऐसा हैं तो, पुलिस ने असली घटनाक्रम छीपाकर नया घटनाक्रम लिखने का कारण क्या? आरोपी को दो दिन थाने में रखकर बिना किसी कार्रवाई के क्यों छोडा गया? आर्वी के एक समाजसेवी की प्रकरण में भूमीका क्या है? इन सभी सवालों के जवाब अब तक नहीं मिल पा रहे है़ पुलिस ने सभी रिश्तेदारों के बयान अपने मर्जी से लिखे है, हमें इसकी कल्पना तक नहीं, ऐसा भी कुछ कहा कहना है़ तत्कालीन अपर पुलिस अधीक्षक लगातार तीन दिनों तक दहेगांव थाने का मुआयना करने पहुंचे थे़ इस दौरान उन्होंने प्रकरण से जुडे केवल एक ही व्यक्ती का बयान जांचने की जानकारी है़ जबकि अन्य बातों पर पडदा डालने का काम किया गया़ दहेगांव पुलिस की लापरवाही को छीपाने के पिछे क्या कारण हो सकता है? ऐसे कई सवाल अब उठने लगे है़ इस गंभीर प्रकरण में अब स्वयं जिला पुलिस अधीक्षक ने ध्यान देकर स्वतंत्र जांच अधिकारी नियुक्त करने की जरुरत है़ ताकि प्रकरण में बरती गई लापरवाही, बयानो में हुई छेडछाड, दहेगांव पुलिस का असली चेहरा सामने आ सकता है़ 

पीडिता आर्वी पहुंची ही नहीं

पुलिस के अनुसार पीडिता 26 जुलाई को गांव से ऑटो में वर्धा पहुंची़ जहां से एसटी बस से आर्वी अपने रिश्तेदार के यहां गई़ परंतु संबंधीत के अनुसार पीडिता उसके यहां पहुंची ही नहीं. बल्की पीडिता का 26 जुलाई को आर्वी निवासी एक युवक ने अपहरण किया़ परंतु दहेगांव पुलिस ने आर्थिक लाभ के लिए युवक पर हिरासत में लेने के बाद भी किसी प्रकार की कार्रवाई नहीं की़ प्रकरण को दबाने के लिए आर्वी के समाजसेवी की मदद भी ली गई़ पीडिता व उसकी माँ के अज्ञानता का लाभ उठाते उन्हें डराधमका गया़ प्रकरण में जांचकार्य आगे न बढ पाने से पुलिस विभाग की कार्यप्रणाली पर संदेह व्यक्त किया जा रहा है़