साइकिल सवार की मौत, ग्रामीणों का रास्ता रोको

  • दंगा नियंत्रक दल तैनात, इसापुर में तनावपूर्ण स्थिति
  • सांसद- तहसीलदर ने की मध्यस्थता

देवली. रविवार की रात 7.30 बजे के दौरान ईसापुर गांव के करीब हाईवे पर अज्ञात वाहन ने साइकिल सवार को उडा दिया. जिसमें ईसापुर निवासी अरुण पंढरी रोडे (55) की मौत हो गई. पुल के अभाव में इसापुर में दो माह में हुई 10 दुर्घटना में 8 लोगों को अपनी जान गवानी पडी. जिससे रोष में आये ग्रामीणों ने सडक पर उतरकर सोमवार को हाईवे पर रास्ता रोको किया. जब तक ईसापुर जाने के लिए उडानपुल नही बनता तक मृतक पर अंतिमसंस्कार करने से इंकार किया. जिससे परिसर में तनावपूर्ण स्थिति निर्माण हुई.

अब तक ईसापुर के चौराहे पर दस दुर्घटनाएं हो चुकी है. जिनमें 8 लोगों की जान गई है 4 घायल हुए हैं. यवतमाल नागपुर हाईवे पर हर गांव के ऊपर उड़ान पुल बनाया गया. सेलसुरा, देवली, रत्नापुर, भिड़ी, जैसे सभी गांव में उड़ान पुल बनाया लेकिन इसापुर गांव पर उड़ान पुल क्यों नहीं बनाया गया? ऐसी संतप्त प्रतिक्रिया लोगों ने दी. ग्रामीणों ने आरोप लगाया की देवली तहसील के बड़े नेता की जमीन हाईवे को लगी होने के कारण इस गांव पर उड़ान पुल नहीं बनाया गया. 70 फीसदी किसानों का गांव होने के कारण यहां के किसान हाईवे से अपनी बैलगाड़ी, मवेशी को लेकर आना जाना करते हैं.

इस लिए वो हाईवे का उपयोग करते हैं. उसी हाईवे पर अनियंत्रित वाहन दौड़ते हैं इस कारण इस गांव के पास दुर्घटनाएं होती रहती है. इसी तरह रविवार रात्रि हुए हादसे में ग्रामीण को अपनी जान गवानी पडी. जिससे ग्रामीण रोष में आए व सडक पर उतर गए. ग्रामीणों का गुस्सा देख मौके पर देवली, पुलगांव पुलिस अधिकारी तृप्ति जाधव, थानेदार लेवलकर अपने दल के साथ मौके पर पहुंचे. देवली के तहसीलदार राजेश सरोदे वहां पहुंचे व उन्होंने ग्रामीणों से बात की, लेकिन ग्रामीण जिलाधिकारी को मौके पर बुलाने की बात पर अडे रहे.

जब तक लिखित में उड़ान पुल बनाने का आश्वासन नही मिलता तक तक रास्ते से नही हटने की भूमिका ग्रामीणों ने ली. शव गाड़ी में रास्ते पर रखा गया और ग्रामीण रास्ते पर बैठ गए. तभी सांसद रामदास तडास ओर हाईवे इंजीनियर मेंडे मौके पर पहुंचे. सभी अधिकारी वर्ग, सांसद ओर ग्रामीणों ने उड़ान पुल बनाने के विषय पर चर्चा की तथा ग्रामीणों को आश्वस्त किया गया कि जल्द ही यहां उड़ान पुल का काम किया जाएगा. उसके लिए थोड़ा समय लगेगा.ग्रामीणों को लिखित रूप में आश्वासन दिया गया. तब जाकर ग्रामीण शांत हुए. इस दौरान परिसर में तनावपूर्ण स्थिति निर्माण हुई. जिससे परिसर में दंगल नियंत्रण दल को तैनात किया गया.