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हिंगनघाट.  शहर बचाओ समिति द्वारा तथा विधायक समीर कुणावार की भूमिका से शहर में बढ़ते कोरोना संक्रमण की चैन तोड़ने 25 सितंबर से 1 अक्टूबर तक 7 दिन का जनता कर्फ्यू हिंगणघाट शहर में लगाने का निर्णय लिया गया. इस संबंध में उपविभागीय अधिकारी चंद्रभान खंडाइत की उपस्थिति में सर्व पक्षीय बैठक का आयोजन किया गया. इस सभा में जनता कर्फ्यू के बारे में मतभेद के सूर उजागर हुए. भाजपा, कांग्रेस, राकांपा, शिवसेना, विदर्भ विकास आघाडी समेत अन्य सामाजिक व्यवसायिक संगठन के पदाधिकारियों को बुलाया गया.

जनता कर्फ्यू के बारे में विधायक समीर कुणावार ने अनुकूलता जताई. शहर की सभी दुकाने बंद करने का निर्णय इच्छा शक्ति के अनुसार होना चाहिए, ऐसी भूमिका शिवसेना के पूर्व विधायक अशोक शिंदे ने रखी. कांग्रेस और राष्ट्रवादी कांग्रेस ने इस कर्फ्यू के बारे में प्रतिकूलता दर्शाकर अपनी सहमति नहीं होने की बात जाहिर की. कर्फ्यू के संबंध में प्रशासन का किसी भी प्रकार का हस्तक्षेप नहीं है ऐसा कहां गया. परंतु राका के पूर्व आमदार राजू तिमांडे ने इस कर्फ्यू पर अपना आक्षेप दर्ज कर सभी पार्टियों के सभी नेताओं का अभिप्राय विचार में नहीं लिया गया है ऐसा प्रति प्रश्न उपस्थित किया.

इस सभा में शिवसेना के पूर्व विधायक अशोक शिंदे ने जोर जबरदस्ती से दुकानें बंद करने की बात बर्दाश्त नहीं की जाएगी यह बंद  ऐच्छिक रूप से होना चाहिए ऐसा कहा. कांग्रेस के शहर अध्यक्ष पंढरीनाथ कापसे ने सब्जी विक्रेता हाथ गाड़ी पर व्यवसाय करने वाले पर किसी प्रकार का दबाव न लाया जाए ऐसा  कहा.  विदर्भ विकास आघाडी के अध्यक्ष अनिल जवादे ने जनता कर्फ्यू को अपना तीव्र विरोध दर्शाया कर्फ्यू की वजह से कुछ भी नहीं होगा और गरीब जनता का कर्फ्यू के कारण नुकसान होगा, ऐसा मत सभा में रखा. इस सभा में थानेदार सत्यवीरबंडीवार, नगर परिषद के मुख्य अधिकारी अनिल जगताप, प्रभारी तहसीलदार विजय पवार, सुनील डोंगरे, अंकुश ठाकुर, नगरसेवक धनंजय बकाने, ज्वलंत मून, मंगला ठक, भूषण पिसे, गज्जू कुबड़े, नितिन वाघ व अन्य कार्यकर्ता उपस्थित थे.