ड्रेस कोड: अधिकारियों ने सराहा तो कर्मियों में नाराजगी

वर्धा. राज्य सरकार ने सरकारी कार्यालय में ड्रेस कोड लागू करने का निर्णय लिया है. अधिकारियों ने सरकार के निर्णय की सराहना की है, तो कुछ हद तक कर्मियों ने निर्णय के प्रति नाराजी जाहिर की है. जिससे यह निर्णय प्रभावी रूप से अमल में आएगा या नही समय ही बतलायेगा.

जीन्स टी-शर्ट पर बैन लगाते हुए अब सरकार ने शासकीय कर्मचारियों के लिए ड्रेस कोड लागू किया है. हालाकि अनेक कर्मचारियों का मानना है कि, अभिव्यक्ति स्वातंत्र हमे संविधान से मिला है. जिससे हम क्या पहने ओर क्या नही यह हमारा वैयक्तिक निर्णय होना चाहिए. परंतु कार्यालयों की बात करें तो सरकार का यह निर्णय एकदम उचित है. क्योकि, सरकारी यंत्रणा को प्रभावी रहना आवश्यक है. साथ ही कार्यालयों में अनुशासन लगने के साथ ही अच्छा प्रभाव होगा. राज्य सरकार ने सरकारी कार्यालयों में कैसे और कौनसे कपडे पहनने है, इस बारे में निर्देश जारी किए है. कार्यालय में काम करनेवाले अधिकांश अधिकारी और कर्मचारी ऐसे कपडे पहनते है जिससे लोगों के दिमाग में सरकारी कर्मचारियों की छवि धूमिल होती है.

जबकि सभी सरकारी अधिकारी और कर्मचारियों से यह अपेक्षा की जाती है कि वे अच्छा व्यवहार करें और एक अच्छा व्यक्तित्व रखे. ऐसी स्थिति में, यदि अधिकारी और कर्मचारियों का ड्रेस कोर्ड अभद्र, कलंकित और अस्वच्छ है तो इससे अनेक संपूर्ण प्रदर्शन पर अप्रत्यक्ष प्रभाव पडता है. राज्य सरकार ने मंत्रालय के अधिकारियों और कर्मचारियों के साथ-साथ सभी सरकारी कार्यालयों को अपने हर दिन के कपडे पहनने और व्यवहार करने के तरीके पर निर्देश जारी किए है.

कितना प्रभावी होगा अमल

राज्य शासन द्वारा सरकारी कार्यालयों में ड्रेस कोड लागू करने का निर्णय लिया गया है, परंतु यह निर्णय कितना प्रभावी होगा या शत-प्रतिशत अमल होगा या नही? यह सोचनेवाली बात है. शासन का निर्णय है तो सभी सरकारी कार्यालयों को लागू करना ही है, परंतु अगर कोई कर्मचारी इस आदेश का उल्लंघन करता है तो क्या उपसर कार्रवाई होगी, इसके लिए क्या नियोजन है‍? ऐसे अनेक सवाल है. आज से पहले कई कार्यालयों ने ड्रेस कोड लागू करने का प्रयास किया, परंतु वह पूरी तरह से सफल नही पाया. जिससे अब देखना यह है कि, क्या इस निर्णय पर शत-प्रतिशत अमल हो पाता है.

कार्यालयों में लगेगा अनुशासन

सरकार का एकदम सही निर्णय है. कार्यालयों में लोग कैसे भी कपडे पहनते है. जिससे आंफीस की छवि धुमिल होती है व अनुशासन भी नही रहता. परंतु अब सरकार के इस निर्णय से कार्यालयों में अनुशासन लगेगा. इस ड्रेस कोड का पालन करना आवश्यक है. 

अनिल इंगले, जिला कृषि अधीक्षक

कार्यालय की सुधरेगी प्रतिमा

ड्रेस कोड का निर्णय एकदम सही है व अच्छा है. इससे कार्यालय में अनुशासन बढेगा, साथ ही प्रतिमा भी सुधरेगी. कार्यालय में यह निर्णय हम लागू करेंगे.

विपीन पालीवाल, सीओ, 

नगर परिषद वर्धा

निर्णय सही, पर कारगर नही

सरकार द्वारा ड्रेस कोर्ट संबंधित लिया गया निर्णय एक तरह से उचित है, परंतु दूसरी ओर से देखा जाए तो अभिव्यक्ति स्वातंत्र के दृष्टिकोण से निणर्य सही नही है. हमारा फॉरेस्ट का विभाग है, यहा पहले से ही ड्रेस कोड है, उनमें से प्रोबेशनरी स्टाफ को ही ड्रेस कोड नही था, परंतु अब क्या पहने यह वैयक्तिक निर्णय है, मंत्रालय छोड अन्य जगह यह निर्णय इतना कारिगर साबित नही होगा.

श्री एस एस साखरे, डीएफओ कार्यालय, वर्धा

स्वागतार्ह निर्णय

सरकार द्वारा ड्रेस कोड लागू करने संदर्भ में जो निर्णय लिया वह स्वागतार्ह है. शासन जो भी निर्णय लेगी वह अच्छा के लिए ही लेगी. ड्रेस कोड से अच्छा प्रभाव पडेगा. हालाकि, क्या पहने और क्या नही यह वैयक्तिक स्वातंत्र है.

वैभव राऊतराय, संरक्षण अधिकारी

महिला व बालविकास विभाग

एकदम उचित निर्णय

सरकार द्वारा लिया गया निर्णय एकदम उचित है. यह निर्णय लेना आवश्यक था. जीन्स-टीशर्ट कार्यालयीन कामकाज में पहनना उचित नही है. अब सरकार ने सही निर्णय लिया है. जिससे कार्यालय में शिस्त लगेगी.

चंद्रशेखर कांबले, कर्मचारी जिप

टीशर्ट पर बैन उचित

सरकार ने शासकीय कार्यालयों में ड्रेसकोड लागू किया है. परंतु आज कल हर कोई जिन्स पहनता है. ऐसे में जीन्स पहनने की अनुमति देनी चाहिए थी. टीशर्ट पर बैन उचित है.

बाबासाहब कनेर, स्वास्थ्य विभाग