आखिरकार 18 वर्ष बाद मिला न्याय, वृद्धा को शुरू हुआ निवृत्ती वेतन

वर्धा. पति के गुजर जाने के बाद पत्नी को सेवानिवृत्ती वेतन का लाभ दिया जाना चाहिए़ परंतु इसके लिए ग्रामसेवक की पत्नी को 18 वर्ष तक इंतजार करना पडा. आखिरकार 82 वें वर्ष में उन्हें न्याय मिला.

बता दे कि, मधुकर मारोतराव चामटकर की 10 अप्रैल 1957 को बतौर ग्रामसेवक हिंगनघाट पंचायत समिति में नियुक्ती हुई थी. इसके बाद उन्होंने विविध पंस में अपना सेवाकाल पूर्ण किया. उन्होंने जिप के पंचायत विभाग तथा वरिष्ठों की ओर निवृत्ती वेतन विषयक अन्य लाभ मिलने के लिए पत्रव्यवहार किए थे. परंतु जिप के पंचायत विभाग ने समय रहते इसकी दखल न लेते हुए उन्हें निवृत्ती वेतन के लाभ से वंचित रखा. इसी बीच 11 दिसंबर 2002 को उनका देहांत हो गया.

इसके बाद उनकी पत्नी मालती मधुकर चामटकर ने जिप के पंचायत विभाग की ओर आवेदन कर बार बार सेवानिवृत्ती का लाभ देने के लिए बिनती की. परंतु मधुकर चामटकर यह जिप के आस्थापन में कार्यरत ही नहीं थे, ऐसी भूमिका ली थी. इसपर मालती चामटकर ने लोक आयुक्त मुंबई से न्याय की अपील की. परंतु पंस विभाग ने बार दिये गलत रिपोर्ट के कारण उन्हें न्याय नहीं मिल पाया. पश्चात मालती चामटकर ने विभागीय आयुक्त, नागपुर विभाग की ओर आवेदन किया. वहां पर भी उन्हें निराशा हाथ लगी.

पश्चात महाराष्ट्र शासन ग्रामविकास विभाग, मंत्रालय, विभागीय आयुक्त, मुकाअ से बार बार मिलकर उनका सभी बातों पर ध्यान खींचा गया. आखिरकार वरिष्ठों के आदेश पर मालती मधुकर चामटकर को 82 वें वर्ष में न्याय मिला. उन्हें पती की सेवानिवृत्ती वेतन शुरु किया गया. इस प्रकरण में वर्धा जिप के कर्मचारी, अधिकारी, मुकाअ विपुल जाधव का सहयोग मिला. करीब 18 वर्ष तक चामटकर परिवार को सेवानिवृत्ती वेतन के लाभ के लिए इंतजार करना पडा.