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    समुद्रपुर. तहसील के सावंगी (झाड़े) में दो दिन पूर्व मां और उसकी बेटी की मौत हुई़ इस ओर ग्रामीण अस्पताल तथा तहसील वैद्यकीय अधिकारियों की लापरवाही के कारण संबंधित परिवार त्रस्त हो गया है़ इस दौरान पुलिस विभाग ने ही महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है़ पुलिस प्रशासन ने सुरक्षा का ध्यान रखते हुए स्वास्थ्य विभाग का कार्य करना, इसे लेकर सवाल उठ रहे है. सावंगी में सोमवार को मां और बेटी की मौत हो गई़ दोनों के शव 4 दिनों से घर में पड़े होने का अंदेशा लगाया जाता रहा.

    दोनों शव सडी गली हालत में पाए गए़ स्वास्थ्य विभाग द्वारा घटनास्थल पर ही दोनों शवों का पोस्टमार्टम किया गया़ उपरांत शवों को ले जाने से स्वास्थ्य विभाग ने इनकार किया गया़ परिणामस्वरूप पुलिस प्रशासन को शव ग्रामीण अस्पताल में लाने पड़े. उल्लेखनिय है की दोनों की कोरोना से मौत होने से गांववासी भी उनसे दूर थे़ शव ले जाने का कार्य हमारा नहीं होने की जानकारी स्वास्थ्य विभाग ने पुलिस विभाग को दिए जाने की जानकारी प्राप्त हुई है.

    स्वास्थ्य विभाग की टालमटोल भूमिका

    समुद्रपुर वैद्यकीय अधीक्षक डा़  म्हैसकर से संपर्क करने पर उन्होंने टालमटोल जवाब देते हुए कहा कि अभी मैं बैठक में जा रही हूं. इस बारे में बाद में चर्चा करेंगे़  जबकि तहसील वैद्यकीय अधिकारी डा़ भगत से संपर्क नहीं हो पाया़, जिससे कोरोना के इस संकट में स्वास्थ्य विभाग की उदासीनता सामने आ रही है़ 

    नहीं मिला मेडिकल स्टाफ

    उक्त शव कोरोना पाजिटीव होने से उन्हें अस्पताल ले जाने की जिम्मेदारी स्वास्थ्य विभाग की थी़  लेकिन वैद्यकीय अधिकारी एवं ग्रामीण अस्पताल के अधिकारियों द्वारा किसी भी प्रकार की मदद नहीं की गई़  हमारे कर्मचारियों के पास पीपीई किट नहीं थी़  ऐसे में कोरोना बाधित सड़ी गली लाश ले जाना खतरे से खाली नहीं था़  इस बारे में एसडीएम को जानकारी दी है तथा जिलाधिकारी से भी बात की जाएगी़  दोनों शव अस्पताल के पीएम रूम तक ले जाने का कार्य कर्मचारियों द्वारा किया है़  

    -हेमंत चांदेवार, थानेदार.