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  • साहुकारग्रस्त किसानों ने लगाई न्याय की गुहार, खेती पर कब्जा करने का आरोप, जिलाधिकारी को सौंपा ज्ञापन

वर्धा. समुद्रपुर तहसील के विविध गांव में नागपुर-चंद्रपुर स्थित अवैध साहुकारों ने हुडदंड मचाकर रखा है. सर्वसामान्य गरीब किसानों की आर्थिक समस्या का फायदा उठाकर उन्हे 3 से 5 फीसदी दर से ब्याज पर पैसे देकर गारंटी के तौर पर खेती की विक्री अवैध साहुकार ने अपने नाम पर की है. परंतु अब पैसे लौटाने के बाद भी जमीन किसानों के नाम पर करने अतिरिक्त पैसों की मांग की जा रही है. साथ ही खेती पर भी कब्जा करने का आरोप साहुकारग्रस्त किसानों ने लगाते हुए जिलाधिकारी से न्याय की गुहार लगाई है. 

आज तक अनेक किसानों की खेती हडपने का प्रयास अवैध साहुकारों ने किया है. वर्ष 2011 से 2020 तक खेती कब्जा मूल सावकारग्रस्त किसान के खेती पर है. यह सभी व्यवहार 2010 से 2015 के बीच हुए है. 2016 में अवैध साहुकार द्वारा हो रही धोखेबाजी ध्यान में लेकर साहुकारी प्रतिबंधक कानून तत्कालीन गृहमंत्री आर आर पाटील ने किया था. जिससे अवैध साहुकारों पर रोक लगी थी. नागपुर के सुरेश पाटील ने समुद्रपुर परिसर के विविध गांव में जाकर 9 किसानों की जमीन 3 फीसदी ब्याज दर पर गिरवी रखी. खेती की विक्री खुद के व पुत्र के नाम पर की. दिये ब्याज के पैसे व ब्याज भी सभी ने लौटाया.

तहसील के उसेगांव निवासी महिला किसान कुसुम बा तिमांडे की वानरचुवा में खेत सर्वे क्रमांक 183 यह जमीन 3 लाख रुपए 3 फीसदी ब्याज से देकर खेती की विक्री पुत्री के नमा पर कराई. विक्री होकर भी वर्ष 2011-2020 तक खेती कुसूम तिमांडे के कब्जे में है. बिच में 13 जून 19 को 3 लाख व 11 जुलाई 19 को 3 लाख कुल 6 लाख चेक से लौटाए. पैसे भी अवैध साहुकार के अकाऊंट में जमा हुए. जिसके बाद खेती की फेर विक्री अवैध साहुकार ने कुसूम तिमांडे के नाम पर करना अपेक्षित था. परंतु अवैध साहुकार पाटील ने फिर से 15 की मांग कर खेती नाम पर करने से मना कर दिया.

इसी तरह का व्यवहार स्वप्नील जटिले, ईश्वर जटिले, किशोर भोयर, डोमा खेलकर, देवराव भोयर से हुआ है. अब गुंडों की धमकी देकर जमीन पर कब्जा करने का प्रयास हो रहा है. जिस कारण किसानों ने अवैध साहुकार से मुक्ति दिलाने की मांग की है. उक्त समय किसान सभा के यशवंत झाडे, जिला सचिव जगन चांभारे, कार्याध्यक्ष देवेन्द्र शिनगारे, बालकृष्ण तिमांडे, किशोर भोयर, देविदास ढगे, गुड्डू वैरागडे, आत्माराम कोलसे, किशोर चरडे, भास्कर डवरे व अन्य पीडित किसान मौजूद थे.