Soybean price rises on buying fresh deals

– गजानन गावंडे

वर्धा. केंद्र सरकार ने एक फैसले के कारण तेजी में चले रहे कपास, सोयाबीन व तुवर के दामों में गिरावट का दौर शुरू हुआ है. गत तीन दिनों में कपास व सोयाबीन के दामों में करीब 200 रूपयों की गिरावट दर्ज हुई है. गिरावट का सिलसिला और कुछ दिन चलने की जानकारी व्यापारी व कृषि तज्ञों ने दी.

इस वर्ष सरकार ने कपास का गैरंटी मूल्य 5825 रूपये, सोयाबीन 3880 रूपये, तुवर का 6 हजार रूपये घोषित किया है. नये सिजन की उपज आने के पुर्व कपास, सोयाबीन के दाम गैरंटी मूल्य से कम थे. किंतु निरंतर बारीश व खोड इल्ली के कारण सोयाबीन का भारी नुकसान होने के कारण दामों में तेजी आयी.दाम गैरंटी मूल्य से बढकर 4300 रूपये प्रति क्विंटल तक पहुंचे. कपास के दाम शुरू में कम ही रहे. बावजूद इसके सरकी व रूई के दामों में अन्तराष्ट्रीय बाजार में उछाल आने के कारण दाम बढने लगे.

सरकार के गैरंटी मूल्य से अधिक दाम देना व्यापारियों ने आरंभ किया था. किंतु अचानक केंद्र सरकार ने आरसीएम टैक्स पर अपनी निती स्पष्ट नहीं की. व्यापारी संगठनों व्दारा नियमित पत्राचार करने के बावजूद सरकार ने 5 प्रश आरसीएम टैक्स पर निती साफ नही की. उक्त टैक्स के कारण प्रतिवर्ष सरकार के पास व्यापारियों का करोडों रूपया बकाया रहता है. उसी तरह बोंड इल्ली के कारण कपास की क्वॉलिटी अच्छी नहीं है. दोनों कारणों के चलते व्यापारियों ने गत तीन दिनों में कपास के दाम कम किये है.

सोयाबीन का उत्पादन कम होने के कारण सोयाबीन के दाम तेजी से बढे. उम्मीद जताई जा रही थी कि, नवंबर के अंत तक दाम 5 हजार तक जायेगें किंतु अचानक केंद्र सरकार के एक फैसले से सोयाबीन के दामों में गिरावट दर्ज हुई है. व्यापारी 3200 से 4300 रूपये तक दाम देकर सोयाबीन की खरिदी कर रहे थे. किंतु अचानक सरकार ने पाम तेल की एक्साईज ड्यूटी 37.5 प्रश से 27.5 प्रश कर दी. एक्साईज डयुटी कम होने के कारण पाम तेल रस्ता हो गया. उल्लेखनिय है कि, पाम तेल की सभी तेलों में मिलावट की जाता है. जिससे सोयाबीन के दामों पर असर हुआ. स्थानीय मंडीयों तथा प्लांट में सोयाबीन के दाम 150 से 200 रूपये तक कम हो गये है.

तुवर के दाम 3 हजार लुडके

गत दो माह में तुवर के दाम तेजी से निचे आये है. सरकार ने इस वर्ष तुवर का गैरंटी मूल्य 6 हजार घोषित किया था. किंतु बाजार में तुवर की कमी के चलते दाम तेजी से बढकर 9 हजार तक जा पहुंचे. किंतु सरकार ने मसुर दाल का आयात कर 30 प्रश से सिधा 10 प्रश कर दिया. तथा तुर की आयात को दिसंबर तक अनुमती दी. परिणामस्वरूप तुवर के दाम तेजी से गिरकर 6 हजार तक आये है.

सरकार की निती किसान विरोधी

पाम तेल व मसुर दाल पर टैक्स कम करने के कारण उसका उसर दामों पर हुआ है. तेल व तुवर के दाम कम हो गये. जल्द ही नये सिजन की तुवर बाजार में आयेगी. तब किसानों को गैरंटी मूल्य से कम दाम मिलेंगे. गैरंटी मूल्य से 50 प्रश अधिक दाम होने पर जिवनावश्यक कानून लगता है. किंतु सरकार ने इस कानून को नजरअंदाज किया है. पाम तेल सस्ता होने के कारण व्यापारी उसका भंडारण करेंगे. उत्तर भारत में सरसों व करडी की बुआई शुरू है. यह फसल निकलने के बाद दाम पर और असर होगा. तथा किसानों को उचित दाम नहीं मिलेंगे. – विजय जावंधिया, किसान नेता

प्लांट में सोयाबीन के दाम कम हुए

पाम तेल की टैक्स कम करने से उसका असर तेल के दामों पर हुआ है. व्यापारी अपना माल प्लांट में भेजते है. किंतु प्लांट के रेट में 150 से 200 रूपये कम हुए है. अच्छे क्वॉलीट के सोयाबीन का अच्छे दाम दे रहे है. – मोहन चितलांगे, सोयाबीन व्यापारी 

कपास की क्वालीटी ठिक नही

बोंड इल्ली के कारण कपास की क्वॉलीटी खराब हुई है. जिससे कपास के दाम 100 से 200 रूपये तक निचे आये है. – विनोद घिया, कपास व्यापारी

आरसीएम का रिटर्न कम

व्यापारी कपास खरेदी के उपरांत 5 प्रश आरसीएम टैक्स भरते है. किंतु सरकार व्दारा यह राशी पुर्ण रूप से लौटाई नही जाती. सरकार की और व्यापारियों के करोडों रूपये अटके है. गत माह अर्थमंत्री निर्मला सितारामण के साथ चर्चा हुई. परंतु कोई निर्णय नही हुआ. कपास की क्वॉलीटी पर रेट निर्भर होते है. – हरिष हांडे, कपास व्यापारी