Ujwala Yojna

    पुलगांव. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गरीब परिवार के लिए अपने चुनावी जुमले के तहत महत्वपूर्ण घोषणा करते हुए महिलाओं के घर का बजट बनाने के लिए उज्ज्वला गैस योजना शुरू की. इस योजना की गाजे-बाजे के साथ शुरूआत की गई, जिसका अनेक महिलाओं ने लाभ लिया.

    वहीं अब इसी योजना ने महिलाओं के घर का बजट ही पूरी तरह से बिगाड़ दिया है. गैस सिलेंडर के आसमान छूते दाम से उज्ज्वला गैस योजना विफल साबित हो गई है.  गैस सिलेंडर के दाम बढ़ते ही जा रहे है. हर मध्यम परिवार की तीखी नजर भाजपा सरकार की ओर जा रही है. राशन में भले ही प्रधानमंत्री गरीब कल्याण योजना के तहत नवम्बर माह तक मुफ्त अनाज देने की घोषणा की है, लेकिन उसे पकाने के लिए गैस सिलेंडर की आवश्यकता है. 

    नियमित रूप से खरीदी करना हुआ मुश्किल 

    आसमान छूते दाम से अब गैस सिलेंडर खरीदी करना पाना मुश्किल हो गया है, जिससे घरों से फिर चूल्हे से धुआं निकलने लगा है. महिलाओं को धुएं से छुटकारा देने की बात करने वाली मोदी सरकार अब फिर महिला व गरीब परिवार को जंगल में जाकर लकड़ियां काटने व चूल्हा जलाने पर मजबूर कर रही है. सिलेंडर की दरवृध्दि के साथ ही मिलने वाली सब्सिडी भी पूरी तरह से बंद की गई है. शुरूआत में तो यह सब्सिडी जमा भी नहीं हुई, जिससे नागरिकों में रोष व्याप्त है. वहीं सरकार को इससे कुछ भी लेना-देना नहीं है. 

    प्रति सिलेंडर 870 रुपए तक पहुंचे दाम 

    दो माह पूर्व 600 रुपए में मिलने वाले सिलेंडर के दाम अब 870 रुपए तक पहुंच गए है. इससे मध्यम वर्ग के परिवार का बजट पूरी तरह से बिगड़ गया है. पिछले डेढ़ साल से कोरोना के कारण पहले ही सभी लोग त्रस्त हो गए हैं. अनेकों का रोजगार छीन गया है. व्यापार डूब गया है. अभी भी अर्थव्यवस्था पटरी पर नहीं आई है. वहीं दूसरी ओर लाकडाउन की तलवार कायम है. इस स्थिति में भी सिलेंडर के दाम बढ़ते ही जा रहे हैं. 

    जंगल में बिनी जा रही जलाऊ लकड़ियां

    सिलेंडर के बढ़ती दर से अब फिर से ग्रामीण विभाग में चूल्हे जलने लगे है, जिससे अब जंगल में लकड़ियां बिनी जा रही है. महावितरण की पेड़ों की कटाई के बाद कई बुजुर्ग कटे हुए पेड़ों की टहनियों को चूल्हा जलाने के लिए जमा कर रहे हैं. अब फिर से सिर पर लकड़ियों का ढेर देखना आम बात हो गया है.

    बड़ी संख्या में महिलाओं को दिए कनेक्शन 

    उज्ज्वला गैस योजना के तहत बड़ी संख्या में महिलाओं को गैंस सिलेंडर बांटे गए. वहीं सिलेंडर के बढ़ते दाम से इस योजना की धज्जियां उड़ गई. घर-घर चूल्हे जलने लगे. क्या सरकार इस ओर राहत दिलाने का कोई नया फैसला लेगी. फिर से चूल्हे की जगह गैस जलने लगेगी क्या, यह सवाल उपस्थित हो रहा है.